पटना : मेयर सीता साहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 5 सितंबर 2020

पटना : मेयर सीता साहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं

याचिका के जरिये इस मामले के लंबित रहने तक पटना के मेयर के कामकाज पर रोक लगाने का भी आग्रह किया गया है। इस मामले पर 4 सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी......
patna-mayor-sita-sahu-trouble
पटना,05 सितम्बर। पटना की मेयर सीता साहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। 1 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव की अग्निपरीक्षा सीता साहू ने पास कर अपनी कुर्सी तो बचा लिया, लेकिन अभी भी कुर्सी छिन जाने की संभवना बरकरार हैं।इसको लेकर पटना हाईकोर्ट ने सीता साहू को नोटिस जारी किया है। पटना नगर निगम की राजनीति अब हाईकोर्ट पहुंच गई है। इसके साथ ही अब एक बार फिर नगर निगम में राजनीति गरमाने लगी है। मेयर और डिप्टी मेयर गुट खुलकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहा है। वहीं, हाईकोर्ट का इस पूरे मामले में आदेश निगम की राजनीति में बड़ा प्रभाव डालेगा। पूरा मामला यह है कि पटना नगर निगम के पूर्व उपमेयर विनय कुमार पप्पू के नेतृत्व में 41 वार्ड पार्षदों ने 31 जुलाई को मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। बैठक की अध्यक्षता डिप्टी मेयर कर रही थीं। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में हुई बैठक को पीठासीन पदाधिकारी के अधिकार के तहत उन्होंने स्थगित करने का फैसला लिया। मेयर के देरी से पहुंचने पर डिप्टी मेयर मीरा देवी ने बैठक तीन दिन बाद के लिए टाल दिया था।इस फैसले के खिलाफ मेयर समर्थक विधायक हंगामा करने लगे। उनका कहना था कि मेयर के खिलाफ अगर विपक्ष के पास पर्याप्त 38 पार्षदों का समर्थन है तो वे अविश्वास प्रस्ताव पास करा लें। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला गुट जरूरी 38 पार्षदों को अपनी तरफ करने में असफल रहा।अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले 41 पार्षदों में से कई सीता साहू के साथ नजर आए।वहीं मेयर खेमा के दो और विरोधी खेमा के पांच पार्षद कोरोना से संक्रमित होने के कारण बैठक में नहीं शामिल हो सके।बैठक का आयोजन हुआ या नहीं? अगर हुआ तो कहीं उसमें नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई? इन सवालों के जवाब मिलने हैं। डिप्टी मेयर मीरा देवी पर 31 जुलाई की बैठक स्थगित किए जाने के बाद दोबारा बैठक बुलाने का आदेश न मानने का आरोप लगाया गया है।



बैठक के स्थगित किए जाने को मेयर समर्थक पार्षदों ने जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त पर्यवेक्षक के समक्ष चुनौती दी। नियमों का हवाला देकर दोबारा बैठक शुरू कराया गया, जिसमें मेयर के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया गया। डिप्टी मेयर ने इस बैठक के आयोजन को ही गलत करार दिया। उनका कहना है कि नियम के तहत पीठासीन पदाधिकारी ने जब बैठक स्थगित किया तो फिर तीन दिनों के बाद ही दोबारा बैठक का आयोजन किया जा सकता है। डिप्टी मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर दोबारा बैठक का आयोजन कराने की भी मांग की, लेकिन उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक होने की जानकारी दी गई। डिप्टी मेयर हाईकोर्ट में इसी मामले को लेकर पहुंची हैं, जिस पर सुनवाई शुरू हुई है। मेयर गुट की ओर से भी डिप्टी मेयर पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता सशक्त स्थायी समिति सदस्य इंद्रदीप चंद्रवंशी का कहना है कि पीठासीन पदाधिकारी किसी भी गुट का प्रतिनिधि नहीं हो सकता है। 31 जुलाई को बैठक मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। इसमें उस पर चर्चा होनी चाहिए थी। लेकिन, पद का दुरुपयोग करते हुए विपक्षी गुट के पास संख्या बल का अभाव देखकर बैठक को ही स्थगित कर दिया गया। इस प्रकार उन्होंने पीठासीन पदाधिकारी की गरिमा को गिराया। याचिका में उन्होंने डिप्टी मेयर को पद से हटाने और नए सिरे से डिप्टी मेयर का चुनाव कराने की मांग की है। दरअसल, डिप्टी मेयर पद पर मीरा देवी का चुनाव वर्ष 2019 में हुआ है, इसलिए दो साल बाद ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। मेयर गुट अब इस मसले को उछाल कर डिप्टी मेयर की मुश्किलें बढ़ाने की तैयारी में है। वहीं, नगर निगम में राजनीति गरमा गई है। दोनों गुट अब अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने में जुट गए हैं।

पटना हाईकोर्ट ने पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने को चुनौती देने वाली याचिका को मंजूर करते हुए मेयर सीता साहू और नगर निगम दोनों को नोटिस जारी किया है।ऐसा लगता है कि मेयर सीता साहू की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।31 जुलाई को भारी हंगामे के बीच सीता साहू ने अविश्वास प्रस्ताव को हराकर सदन में अपना विश्वास मत हासिल किया था और कुर्सी बचाई थी।मेयर के देरी से पहुंचने पर डिप्टी मेयर मीरा देवी ने बैठक तीन दिन बाद के लिए टाल दिया था। लेकिन मेयर सीता साहू पहुंचीं और फिर वोटिंग कराया गया जिसमें विपक्षी पार्षदों ने हंगामा किया। तब नगर आयुक्त ने कहा था कि कोरम पूरा होने के बाद भी विपक्ष ने हंगामा किया जबकि मेयर समय पर आई थीं। पटना हाईकोर्ट कोर्ट ने मेयर और पटना नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए जबाब मांगा है और अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद के लिए मुकर्रर की है।न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय की एकल पीठ ने अविश्वास प्रस्ताव में पराजित डिप्टी मेयर मीरा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। डिप्टी मेयर ने अर्जी में मेयर सीता साहू पर भ्रष्टाचार सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं।अर्जी में आरोप लगाया गया है कि मेयर ने कोविड-19 महामारी के दौरान पटना के गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मामला के कोर्ट में लंबित रहने तक पटना मेयर सीता साहू के कामकाज पर रोक लगाने की भी अपील कोर्ट से की गई है।

कोई टिप्पणी नहीं: