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सोमवार, 21 सितंबर 2020

आम सहमति से काम किया होता तो इतनी बुरी स्थिति न होती : विपक्ष

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नयी दिल्ली 20 सितंबर, विपक्ष ने आज आरोप लगाया कि कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने में सरकार का तंत्र पूरी तरह से विफल रहा। यदि सरकार ने एकतरफा फैसले लेने की बजाय एक राजनीतिक आम सहमति के साथ इस संकट का सामना किया होता तो स्थिति इतनी बुरी नहीं होती। लोकसभा में नियम 193 के अंतर्गत कोविड-19 की स्थिति पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा, “केवल एक चीज़ अच्छी हुई है। सरकार को इस बीमारी की वजह से मुंह छिपाने का बहाना मिल गया है।” उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व में सर्वाधिक पॉजिटिव केस और सर्वाधिक मौत के आंकड़े वाला देश बन गया है। यह स्थिति असाधारण है। इसने समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है। सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल रहा है। हम दरअसल तैयार नहीं है। एक अंधेरा है। इस अंधेरे से कैसे निकलें। श्री थरूर ने कहा कि जनवरी में ही वुहान में वायरस की महामारी के संकेत आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मार्च में वैश्विक आपदा घोषित की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी फरवरी से चेतावनी दे रहे थे। लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने साढ़े तीन घंटे की मोहलत दे कर संपूर्ण देश में लॉकडाउन कर दिया। सरकार ने गंभीर चूक की। किराना की दुकानों पर भीड़ लग गयी। रातों रात प्रवासी मजदूर पैदल की गृह नगर की ओर निकल पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार की कोई तैयारी नहीं थी। अगर सरकार सभी दलों से मिलजुल कर इस आपदा का मुकाबला करती तो स्थिति बहुत बेहतर होती। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के लाखों लोग हजारों किलोमीटर पैदल चले। हम इन लोगों की भूख मिटाने एवं विषाणु के प्रसार को रोकने से विफल रहे। यदि इन प्रवासी मजदूरों को पहले ही घरों तक पहुंचने का मौका दिया होता तो कोरोना को नियंत्रित कर पाते और मजदूरों की दिक्कतें नहीं होती। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण देश में दो करोड़ 10 लाख नौकरियां चलीं गयीं। 80 प्रतिशत कामगारों के वेतन कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण देश में तीन नुकसान हुए। बेरोजगारी बढ़ी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नुकसान हुआ तथा कोविड के केस तेजी से बढ़ रही है। सरकार को 16 सलाहें दी गयीं लेकिन मानी नहीं गयीं। उन्होंने कहा कि सरकार किसान गरीब को टीवी दिखा कर गुमराह नहीं कर पाएंगे। भाजपा के किरीट सोलंकी ने चर्चा में कहा कि इस असाधारण महामारी के समय विश्व के तकरीबन सभी देश असहाय हो गये थे लेकिन भारत के जननायक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस प्रकार से इससे मुकाबला किया है, उसकी सबने तारीफ की है। देश का मेडिकल ढांचा दुरुस्त हो रहा है। जनता पूरी तरह से प्रधानमंत्री के साथ खड़ी है। लॉकडाउन का निर्णय जनता ने जिस गंभीरता से माना, उससे इस विश्वास का पता चलता है। उन्होंने काेरोना के कारण जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने चीन एवं डब्ल्यूएचओ की भूमिका को लेकर दुनिया भर में उठ रहीं उंगलियों का भी जिक्र किया।

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