वाराणसी : गल्फ कंट्री, अमेरिका व यूरोप में भी लगेगा ‘वर्चुअल कारपेट फेयर’ - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

वाराणसी : गल्फ कंट्री, अमेरिका व यूरोप में भी लगेगा ‘वर्चुअल कारपेट फेयर’

  • जनवरी, 2021 में ‘मेगा वर्चुअल शो’ कराने की भी है योजना 
  • वर्चुअल कारपेट फेयर की लगातार दुसरी बार बंपर सफलता के बाद आयोजक कमेटी सीईपीसी व निर्यातकों में बेहतर कारोबार की जगी उम्मींदें 
  • कोरोनाकाल में छह माह से भी अधिक समय से ठप पड़े कारपेट इंडस्ट्री में वर्चुअल फेयर से मिली संजीवनी 

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वाराणसी (सुरेश गांधी) वर्चुअल कारपेट फेयर की लगातार दुसरी बार बंपर सफलता के बाद आयोजक कमेटी कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) काफी आशान्वित है। या यूं कहे कोरोनाकाल में छह माह से भी अधिक समय से ठप पड़े कारपेट इंडस्ट्री में वर्चुअल फेयर संजीवनी साबित हुई है। सीईपीसी के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह का कहना है कि वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर शुरु किए गए वर्चुअल फेयर की सफलता को देखते हुए देश के कालीन निर्यातकों की उम्मींदे बढ़ी है। दोनों वर्चुअल फेयर में बढ़े कारोबार व निर्यातकों की रुचि को देखते हुए सीईपीसी अब अगले माह गल्फ कंट्री में भी वर्चुअल फेयर का आयोजन करेगी। इसके बाद अमेरिका व यूरोंप में भी वर्चुअल फेयर का आयोजन करेगी। इसके अलावा जनवरी, 2021 में मेगा वर्चुअल शो की भी योजना है।  बता दें, सीईपीसी अब तक दो वर्चुअल फेयर का आयोजन कर कर चुकी है। दुसरे वर्चुअल फेयर का समापन शुक्रवार को हुआ है। इसका उद्घाटन 29 सितंबर को सीईपीसी के अध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने किया। इस फेयर का मुख्य उद्देश्य ओशिनिया मार्केट पर भारतीय निर्यातकों की पकड़ मजबूत करने की थी, जो सफल रहा। बीएसएम को लगभग 76 विदेशी खरीदारों से भारी प्रतिक्रिया मिली है। बीएसएम ने भाग लेने वाले निर्माताओं और निर्यातकों के लिए जबरदस्त व्यावसायिक अवसर प्रदान किया है। खासकर कालीन के आयातकों के लिए एक छत के नीचे पूरे भारत के निर्यातकों से मिलने, नवाचार और रुझानों के नवीनतम उत्पादों को लेने और स्पॉट ऑर्डर पर जगह लेने का एक शानदार अवसर मिला है। इससे कालीन निर्यातक भी काफी उत्साहित है। लगभग हर प्रतिभागी निर्यातक के पास विदेशी खरीदारों के साथ पर्याप्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व बैठकें हुई हैं। प्रतिनिधियों को खरीदने और बहुत सारी पूछताछ प्राप्त हुई है। सभी प्रदर्शक आयोजकों के साथ उन्हें ऐसा शानदार अवसर प्रदान करने के लिए बहुत खुश हैं।  सीईपसी चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह का दावा है कि कारोनोकाल में मंदी से जूझ रहे कारपेट इंडस्ट्री के लिए यह फेयर आॅक्सीन का काम करेगा। खरीदार भारतीय स्टाॅलों पर जमकर इंक्वायरी व बुकिंग कराई है। इन दोनों फेयर से न सिर्फ निर्यातकों को आशा की किरण दिखी है बल्कि ओशिनिया मार्केट में भारतीय कालीन निर्यातकों की पकड़ भी मजबूत हुई है। इस फेयर से मझोले तबके निर्यातक बहुत खुश हैं। क्योंकि उन्हें वर्चुअल प्लेटफ़ॉर्म पर बहुत अच्छा एक्सपोज़र मिला है। इसके पहले फिजिकल फेयर के दौरान उन्हें इस तरह की खुशी नहीं मिल रहा था। मझोले तबके के निर्यातकों ने खुद बताया है कि वे बहुत अच्छा बिजनेस कर रहे हैं। बीएसएम “आकार, डिजाइन, रंग और गुणवत्ता के मामले में खरीदारों की आवश्यकताओं के अनुसार नया संग्रह दिखाया है, जिसे खरीदारों ने खूब पसंद किया है। विदेशी ग्राहकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला हैंड नॉटेड व टफटेड कालीन है। श्री सिंह ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए परंपरागत मेलों का आयोजन फिलहाल संभव नहीं है। ऐसे में वर्चुअल फेयर आयातक-निर्यातक मीट का सबसे बेहतर साधन है। ग्राहकों की बेहतर आमद को देखते हुए ओशिनिया मार्केट के साथ-साथ गल्फ कंट्री, अमेरिका व यूरोप में होने वाले वर्चुअल फेयर कालीन उद्योग को गति देने में सफल होगा इसकी पूरी संभावना है। 

श्री सिंह ने कहा कि यह फेयर माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण की ओर परिषद का एक छोटा सा कदम है “आत्मीय निर्भर भारत“ और “ओकल फार लोकल”। आशा करते हैं कि होने वाले और वुर्चअल फेयरों में अधिक खरीदार आएंगे और एक्सपो को बहुत सफल बनाएंगे। सीईपीसी के सीनियर प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार ने पूरी समिति को एक महान मंच की व्यवस्था करने के लिए बधाई दी है। श्री गुप्ता ने कहा कि सीईपीसी ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार के उन देशों में उत्पाद बेचने की पहल की है जहां कोविड-19 से पहले चीन का प्रभुत्व रहा था। आयातकों द्वारा कलात्मक कालीनों को पसंद की गई पूछताछ से आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में व्यापार के नए स्रोत खुलने की संभावना जगी है। भारत का आस्ट्रेलिया से चार व न्यूजीलैंड से महज एक फीसद कालीन व्यवसाय में भागीदारी है। ऐसे में इन देशों में व्यापार की प्रबल संभावना है। आयातकों के रुझान को देखते हुए व्यापार सृजन की अच्छी संभावना बनी है। या यू कहे जिस मकसद से फेयर का आयोजन किया गया है उसमें लगातार सफलता मिल रही है। इस पहल ने भारतीय उत्पादों के बीच की खाई को पाटने और महामारी के बाद के युग में दुनिया भर में हस्तनिर्मित कालीनों और फर्श कवरिंग की मांग बढ़ाया है।  इस मौके पर कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव (कपड़ा) एवं आईएएस रवि कपूर ने वीडियो संदेश में वर्चुअल बीएसएम के आयोजन में परिषद के प्रयासों की सराहना की। साथ ही सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश व समर्थन देते रहेंगे। कपड़ा मंत्रालय, सरकार के आईएएस एवं विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) शांतमनु ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ओशिनिया मार्केट के लिए बीएसएम ने 2 वर्चुअल प्रदर्शनी का आयोजन किया है। ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार कालीने तैयार रखने की जरुरत है। भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग में बेहतरीन कालीनें बनाने की क्षमता है। इसलिए अधिक से अधिक ग्राहक आभासी प्रदर्शनी में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कराएं। सीईपीसी के सीनियर सीओए उमेश कुमार गुप्ता ने परिषद की ओर से कालीन निर्यातकों एवं विदेशी ग्राहकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आप लोग अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। अंत में श्री गुप्ता ने सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को बेहतर व्यसाय करने की शुभकामनाएं दीं। प्रशासन समिति के सभी सदस्य खुश और आशान्वित हैं कि बीएसएम सदस्यों के लिए फायदेमंद होगा और वे अच्छा व्यवसाय प्राप्त करेंगे। सीईपीसी के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने परिषद सब का साथ और सबका विकास की दृष्टि से काम कर रही हैं। श्री उमेश कुमार गुप्ता की अगुवाई में सभी सदस्यों ने अपनी उपस्थति दर्ज कराई। जिसमें संदीप कटारिया, गुलाम नबी भट, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, हुसैन जाफर हुसैनी, फिरोज वजीरी, श्रीराम मौर्य और श्री बोधराज मल्होत्रा सहित अन्य ​सदस्य मौजूद थे।

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