बिहार : नशीली पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

बिहार : नशीली पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

संविधान में नीति निर्देशक सिद्धांत के तहत अनुच्छेद 47 में कहा गया है कि सरकार शराब और दूसरे नशीली पदार्थों जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है पर रोक की दिशा में काम करेगी....

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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनावी सभा में कहते हैं कि पटना में आयोजित ग्रामवार्ता कार्यक्रम में 9 जुलाई 2015 को जीविका से जुड़ी महिलाओं से शराबबंदी की बात कही थी। नीतीश संबोधन के बाद बैठ चुके थे। इसी बीच एक महिला की आवाज गूंजी-मुख्यमंत्री जी, शराब बंद कराइए। घर बर्बाद हो रहा है। कई और महिलाएं बोलने लगीं। सीएम उठे, माइक पर बोले-अगली बार सरकार में आए, तो कर दूंगा। इस तरह बिहार में शराबबंदी कानून लागू कर दी गयी। 2015 में विजयी होकर सीएम की कुर्सी पर बैठे थे। बिहार में 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू कर दी गयी। 

बिहार में दूसरी बार बैन

1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने भी रोक लगाई थी। लेकिन डेढ़ साल के अंदर ही फैसला वापस ले लिया था। सरकारों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया शराब ही होती है। यही वजह है कि आंध्रप्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु में बैन तो लगा, लेकिन रेवेन्यू लॉस को देखते हुए फैसले वापस भी ले लिए गए। हालांकि नीतीश कुमार कहते हैं कि बिहार के भविष्य और महिलाओं की चिंता को देखते हुए ये फैसला सख्ती से लागू होगा। जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई के लिए विकल्प तलाशे जाएंगे।बिहार में 1977-78 में शराबबंदी लागू की गई थी। हालांकि वह सफल नहीं हुई। कुछ लोग इसी आधार पर कह रहे हैं कि फिर रोक लगी तो दूसरी जगह से लोग मंगा लेंगे। मैं ऐसे लोगों को बता देना चाहता हूं कि जब ऐसी स्थिति होगी तो उससे निपट लेंगे। लेकिन काम होने तो दीजिए। 

लगभग 4 हजार करोड़ रु. का नुकसान होने लगा

प्रारंभिक दौर में राज्य सरकार को लगभग 4 हजार करोड़ रु. का नुकसान होने लगा। लेकिन सरकार का मानना था कि सोशल इंपैक्ट के लिहाज से ये कदम सही है। राज्य में शराब की खपत तेजी से बढ़ रही थी। बिहार के लोग हर साल 1410 लाख लीटर शराब पी जाते थे। इनमें 990.36 लाख लीटर देशी शराब और 420 लाख लीटर विदेशी शराब शामिल था। पूरे बिहार में शराब की करीब 6 हजार दुकानें थी।एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक के दौरान शराब से मिलने वाले पैसे में दस गुना बढ़ोतरी हुई थी। 2005-06 में सरकार को शराब 295 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी, जो 2014 में बढ़कर 3हजार करोड़ से ज्यादा हो गई थी।2015-16 का लक्ष्य ही 4 हजार करोड़ था। देशभर में बीयर मार्केट में 10% का इजाफा हुआ, वहीं बिहार में ये 30% से ज्यादा का रहा। शराब बंदी की पहल हुई थी 9 जुलाई 2015 को। जब नीतीश के कार्यक्रम में एक महिला ने कह दिया कि 'मुख्यमंत्री जी, शराब बंद कराइए। घर बर्बाद हो रहा है।' नीतीश ने फौरन ऐलान कर दिया कि अगली बार सरकार में आए, तो शराब बंद कर दूंगा। 

अपना पहला वादा पूरा किया

बिहार राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में संशोधन विधेयक 2018 सहित तीन अन्य संशोधन विधेयकों को विधानमंडल सत्र में पेश किए जाने को मंजूरी दे दी थी।संशोधन विधेयक में शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए मौजूदा सजा के प्रावधान में बदलाव कर उसे कम किया गया।बिहार में पांच अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे कड़ाई से लागू किए जाने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को सर्वसम्मिति से विधानमंडल से पारित करवाया था पर बाद में इसके कुछ प्रावधानों को कड़ा बताए जाने तथा इस कानून का दुरूपयोग किए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष द्वारा इसकी आलोचना की जाती रही है।

सजा का प्रावधान किया

बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 में संशोधन विधेयक, 2018 के बारे में बात करते हुए बताया कि पहले शराब के उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता, विक्रेता के लिए दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था, उसे अब दो स्लैब में किया गया है।पहली बार यह जुर्म करने वाले को उन्हें कम से कम पांच वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है तथा उसके बाद भी वही जुर्म करते हैं तो उनके लिए दस साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।शराब पीने वाले के लिए पहले पांच साल के कारावास की सजा थी, पर अब पहली बार यह जुर्म करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना और जुर्माना नहीं भरने पर तीन महीने के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

10 मिनट के अंदर एक गिरफ्तारी 

शराबबंदी क़ानून के तहत अब तक कुल 116,670 मामले दर्ज हुए हैं और इस सिलसिले में 161,415 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। इनमें से 13214 लोगों पर शराब का अवैध व्यापार कर रहे गिरोहों से जुड़े होने का आरोप है।शराबबंदी के इन तीन सालों की अवधि में कुल 50,63,175 लीटर शराब बरामद की जा चुकी है।यदि शराबबंदी को मिनट दर मिनट आंका जाए तो आंकड़े गवाही देते हैं कि, "एक अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी क़ानून लागू होने के बाद से लेकर 31 मार्च, 2019 तक हर एक मिनट में कम से कम तीन लीटर शराब की बरामदगी हुई और 10 मिनट के अंदर एक गिरफ्तारी की गई।"13% लोग रोज पीते हैं शराब 30% लोग शराब पीते हैं भारत में। 4 से 13% लोग नियमित पीते हैं। खपत के मामले में तीसरा बड़ा देश। हर साल 6 से 8% की रफ्तार से बढ़ रही है संख्या। 45% हिस्सा आमदनी का ग्रामीण भारतीय शराब पर खर्च करते हैं। 20% की मौत शराब पीकर गाड़ी चलाने से होती है। 04 गुना खपत बढ़ी देशी शराब की, विदेशी शराब की 5 गुना b बीयर की 11 गुना खपत बढ़ी पिछले कुछ सालों में।

बछवाड़ा की रैली में

हाल में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बछवाड़ा की रैली में कहा, "चचा (नीतीश कुमार) ने बिहार में शराबबंदी की।लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।लोग अभी भी जम कर शराब पी रहे हैं।"200 रुपया का बोतल 1500 में मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है? तो ये 1500 और 200 के बीच का जो अंतर 1300 रुपया है, वो किसके पॉकेट में जा रहा है?" विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता होने के नाते ये कहा जा सकता है कि तेजस्वी का ये बयान शराबबंदी क़ानून को लेकर विपक्ष का स्टैंड भी है।लेकिन जिस तरह से तेजस्वी शराबबंदी क़ानून की असफलता को जनता के सामने रख रहे हैं, उसे लेकर सरकार ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसे सवालों पर बार अपना पक्ष ये कहकर देते रहे हैं कि "वे बिहार को शराबमुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

जाप नेता पप्पू यादव

जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन शराब खुलेआम बेची जा रही। हर रोज पुलिस भारी मात्रा में शराब को जब्त कर रही है और शराब लोगों के घरों तक होम डिलिवरी होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बताएं राज्य में यह किस प्रकार की शराबबंदी है। 

शराबबंदी से सूबे के रेवेन्यू को नुकसान 

शराबबंदी के दौरान मानव श्रृंखला बनाई गई थी।जिसको लेकर लोगों ने इस बात का ख़ैरमकदम भी किया था।तो वहीं नीतीश ने भी इसे अपनी हुसूलयाबियों (उपलब्धियों) में शुमार किया था। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि शराबबंदी से सूबे के रेवेन्यू को नुकसान हुआ है। क्योकि सरकार ने जिस मकसद से इसे नाफिज़ किया था। वो उस मकसद से भटक गई। जिसके सबब सूबे में गैर कानूनी कारोबार हो रहा है।और इसका सीधा फायदा पुलिस को हो रहा है। क्योकि सूबे की अवाम अभी भी इससे परेशान है। ऐसे में जब आरजेडी की कयादत में कांग्रेस पार्टी इक्तेदार (सत्ता) में आयेगी।तो इसकी सही से समीक्षा की जाएगी। अब चूंकि चुनावी सीज़न है और इस वक्त में बिहार के कई इलाकों में शराब पकड़े जाने की भी खबरे आई है, जो कि नीतीश कुमार के इस फैसले के अमल करने पर सवाल खड़े करती है।

शराबबंदी पर एलजेपी उठा चुकी सवाल

लोक जनशक्ति पार्टी के लीडर चिराग पासवान ने भी शराबबंदी पर सवाल उठाए थे।चिराग ने कहा था कि क्या सिर्फ शराबबंदी करने से ही महिला सशक्तिकरण हो गया है। शराबबंदी का फैसला सही तरीके से नाफिज़ नहीं हुआ है। लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर शराबबंदी (Liquor Ban) को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को तस्कर बनाया जा रहा है। बिहार की माताएं-बहनें अपनों को तस्कर बनते नहीं देखना चाहतीं। चुनाव अखाड़े में अकेले उतरे चिराग पासवान ने नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर एक बार जोरदार हमला बोला। पासवान ने अपने ट्वीट में कहा, "शराबबंदी के नाम पर बिहारियों को तस्कर बनाया जा रहा है।बिहार की माताएं-बहनें अपनों को तस्कर बनते नहीं देखना चाहती।बिहार के मुख्यमंत्री के संग सभी मंत्रियों को पता है कि बिहारी रोज़गार के अभाव में शराब तस्करी के तरफ बढ़ रहा है, लेकिन सब के सब को मानो सांप सूंघ लिया है।" शराबबंदी के नाम पर बिहारीयों को तस्कर बनाया जा रहा है।बिहार कि माताएँ बहने अपनो को तस्कर बनते नहीं देखना चाहती।बिहार के मुख्यमंत्री के संग सभी मंत्रियों को पता है की बिहारी रोज़गार के अभाव में शराब तस्करी के तरफ बढ़ रहा है लेकिन सब के सब को मानो साँप सूँघ लिया है।

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