बिहार : स्टेशन मास्टर 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

बिहार : स्टेशन मास्टर 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे

यदि रेल प्रशासन ने अपना आदेश वापस नहीं लिया तो स्टेशन मास्टर 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे..

station-master-strike-on-31
पटना। केंद्र सरकार व रेलवे बोर्ड ने नाइट ड्यूटी भत्ते की पात्रता पर सीलिंग लगाने के आदेश दिए हैं। इससे रेलवे स्टेशन मास्टर्स सहित अन्य रेल कर्मचारी जिन्हें रात्रि कालीन शिफ्ट में ड्यूटी करना होती है, आक्रोशित हैं। वे इस आदेश का विरोध कर रहे हैं।स्टेशन मास्टर्स का तर्क है कि रिटायर्ड जस्टिस मैभाय की अध्यक्षता में गठित रेलवे एक्ट ट्रिब्यूनल की अनुशंसा पर रेलवे में रात्रि ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को 1969 से नाइट ड्यूटी भत्ता स्वीकृत किया था। रात्रि भत्ता और अन्य मांगों को लेकर देशभर में स्टेशन मास्टर आंदोलन कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने रात्रि भत्ता के लिए वेतन की सीमा निर्धारित कर दी है जिसका स्टेशन मास्टर विरोध कर रहे हैं। रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा पहुंचाए उनका आंदोलन चल रहा है। इसी कड़ी में 20 से 26 अक्टूबर तक काला सप्ताह मनाया गया। स्टेशन मास्टर बांहों पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी किये। उनका कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।

ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (आइस्मा) के दिल्ली मंडल अध्यक्ष नरेंद्र कुमार का कहना है कि रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार 43600 रुपये तक मूल वेतन वालों को ही रात्रि भत्ता दिया जाएगा। बोर्ड के इस आदेश का देशभर के 39000 स्टेशन मास्टर विरोध कर रहे हैं।उनका कहना है कि कई मेडिकल परीक्षण में यह सिद्ध हुआ है कि दिन के स्थान पर रात्रि ड्यूटी करने वाले लोग जल्दी बीमार होते हैं। ऐसे कर्मचारियों को बदले में अतिरिक्त भत्ता दिया जाना चाहिए। सबसे पहले आइस्मा के पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को ईमेल भेजकर विरोध जताया था। दूसरे चरण में रात की ड्यूटी के दौरान में मोमबत्ती जलाकर विरोध जताया गया था। अब तीसरे चरण में काला सप्ताह मनाया गया। यदि रेल प्रशासन ने अपना आदेश वापस नहीं लिया तो स्टेशन मास्टर 31 अक्टूबर को 12 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे। ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन रात्रि ड्यूटी भत्ता देने सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में चल रहे आंदोलन की गति को तेज करने की तैयारी कर रहा। 31 अक्टूबर को बापूधाम सहित विभिन्न स्टेशनों पर तैनात स्टेशन मास्टर भूखे रहकर विरोध जताएंगे। इसमें ऑन व ऑफ ड्यूटी वाले सभी स्टेशन मास्टर्स शामिल होंगे। जानकारी स्टेशन अधीक्षक श्याम कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि मांगों के समर्थन में स्टेशन मास्टरों का विरोध जारी है। सातवें दिन मंगलवार को भी विरोध में काली पट्‌टी बांधकर स्टेशन मास्टरों ने अपनी सेवाएं दी। अब तक रेल मंत्रालय ने इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 2017 से रात्रि भत्ता उठाने वाले स्टेशन मास्टरों से रात्रि भत्ता रिकवरी किया जाएगा।एक स्टेशन मास्टर को अधिकतम तीन लाख रू.तक वसूला जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्टेशन मास्टर विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं। कोरोना काल में भी स्टेशन मास्टर अपनी जान जोखिम में डालकर जिम्मेदारी ईमानदारी पूर्वक निभा रहे हैं जिससे कि रेल परिचालन में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। इस स्थिति में रात्रि भत्ता से उन्हें वंचित करना अनुचित है। उन्होंने स्टेशन मास्टर को 50 लाख रुपये का बीमा देने और रेलवे के निजीकरण व निगमीकरण बंद करने की भी मांग की है। 

कोई टिप्पणी नहीं: