मानवधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी के खिलाफ धरना - Live Aaryaavart

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रविवार, 18 अक्तूबर 2020

मानवधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी के खिलाफ धरना

'स्टैंड फॉर स्टेन स्वामी’ के बैनर तले शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों के हजारों लोग रांची के जिला स्कूल से राजभवन तक ‘न्याय मार्च’ निकाले...

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रांची। 'स्टैंड फॉर स्टेन स्वामी’ के बैनर तले शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों के हजारों लोग रांची के जिला स्कूल से राजभवन तक ‘न्याय मार्च’ निकाले।वहीं लातेहार जिला मुख्यालय पर सामाजिक और मानवधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी के खिलाफ धरना दिया। वक्ताओं ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा की और स्टेन स्वामी को तुरंत रिहा करने की मांग की। इस धरना-प्रदर्शन में मानवाधिकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही बड़ी संख्या में सियासी लीडर भी शामिल हुए। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में  मानवाधिकार कार्यकर्ता 84 वर्षीय फादर स्‍टेन स्‍वामी की एनआइए ( राष्‍ट्रीय सुरक्षा एजेंसी) द्वारा आठ अक्‍टूबर को रांची के नामकुम स्थित उनके आवास से गिरफ्तारी के विरोध में विभिन्‍न संगठनों ने शनिवार को जिला स्‍कूल से राजभवन मार्च किया। राजभवन के पास सभा की और राज्‍यपाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्‍टेन स्‍वामी सहित राजनीतिक बंदियों की रिहाई, भीमा कोरेगांव मामले को बंद करने और यूएपीए एवं एनएसए कानून को रद करने की मांग की गई है।

कहा गया है कि दशकों से स्‍टेन स्‍वामी झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों के अधिकारों के लिए काम करते आये हैं। उन्‍होंने विस्‍थापन, प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय के अधिकार और विचाराधीन कैदियों पर शोधपरक काम किया है। लगातार संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेशा कानून के क्रियान्‍वयन के लिए अभियान करते आये हैं। स्‍टेन स्‍वामी पर झारखंड में माओवादी कनेक्‍शन का कोई आरोप नहीं लगा जिसमें एनआइए उन्‍हें गिरफ्तार कर ले गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्‍टेन स्‍वामी पर माओवादी कनेक्‍शन और आश्रय देने का आरोप लगाया गया है जबकि प्रदेश के किसी मुख्‍यमंत्री या पुलिस महानिदेशक या एसपी ने उन पर माओवादी होने का आरोप नहीं लगाया। राजभवन मार्च में वाम दलों, कांग्रेस सहित कोई डेढ़ दर्जन जन संगठनों ने हिस्‍सा लिया। भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह, आदिवासी महासभा की आलोका कुजूर, झामुमो की महुआ मांजी, कांग्रेस प्रवक्‍ता प्रभाकर तिर्की, सीपीआइ के भुवनेश्‍वर मेहता, राज्‍य आदिवासी सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्‍य रतन तिर्की दया मनी बारला सहित विभिन्‍न जन संगठनों के लोगों ने सभा को संबोधित किया और रिहाई की मांग की। एक दिन पहले ही ईसाई समाज के लोगों ने रांची में एक किलोमीटर लंबे मानव श्रृंखला का निर्माण किया था। शुक्रवार को ही जन संगठनों ने बिरसा समाधि पर पांच दिनों से जारी अनशन की समाप्ति की। लातेहार जिला मुख्यालय पर सामाजिक और मानवधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी के खिलाफ धरना दिया। वक्ताओं ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा की और स्टेन स्वामी को तुरंत रिहा करने की मांग की। इस धरना-प्रदर्शन में मानवाधिकार, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही बड़ी संख्या में सियासी लीडर भी शामिल हुए। मानव अधिकार रक्षा मंच के नेतृत्व में विभिन्न जन संगठनों, राजनीतिक संगठनों ने एक दिवसीय धरना दिया। धरना की अध्यक्षता मंच के संयोजक सुरेश कुमार उरांव, संचालन झामुमो के लातेहार के केंद्रीय सदस्य सह प्रवक्ता दीप कुमार सिन्हा ने की। धरना के बाद राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। धरना को संबोधित करते हुए फादर जॉज मॉनिपोली ने कहा कि हम झारखंड राज्य में चार दशकों से मानवाधिकारों और आदिवासियों-मूलवासियों के जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्षरत 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी को एनआईए द्वारा 8 अक्तूबर 2020 को की गई गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं। कोविड महामारी के दौरान एक उम्रदराज व्यक्ति को, जिन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हैं, कि गिरफ़्तारी पूर्णत: अमानवीय है। हमारी स्पष्ट मान्यता है कि भीमा कोरेगांव केस मोदी सरकार द्वारा एक आधारहीन और फर्जी मुकदमा है। इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार ने कहा कि मोदी सरकार पूरी तरह जन विरोधी और कॉरपोरेट परस्त है। जन हक की बात करने वाले हर व्यक्ति को मोदी सरकार अपना दुश्मन मानते हुए किसी भी स्तर तक जाकर षड़यंत्र कर सकती है। इसी षड़यंत्र के तहत झारखंड के शोषितों की आवाज स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी हुई है। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी नहीं बल्कि झारखंड में मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों पर सीधा हमला है। 

झामुमो के जिलाध्यक्ष लाल मोतीनाथ शाहादेव ने कहा कि झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व की सरकार लोगों के अधिकारों के साथ हमेशा खड़ी रहेगी। फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के लिए केंद्र की दमनकारी सरकार की निंदा करते हैं, क्योंकि केंद्र सरकार एनआईए और सीबीआई के द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुनव्वर उरांव ने कहा की दशकों से झारखंड में आदिवासियों और जल, जंगल, जमीन तथा विस्थापन के विरोध में शांतिमय रूप से सक्रिय 84 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी को बिना शर्त रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि इनकी गिरफ्तारी से यह साबित हो गया कि केंद्र सरकार दमन कर शासन करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी हमेशा लोगों के अधिकार के लिए संघर्ष करती रहेगी। सीपीआई के केडी सिंह ने कहा कि भीमा कोरेगांव फर्जी मुकदमे में फंसाए गए अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार झूठे मुकदमे में फंसा कर और डरा कर शासन करना चाहती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि UAPA जैसे अन्य काले कानूनों का दुरुपयोग कर केंद्र सरकार शासन करना चाहती है, क्योंकि देश के सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी है, इसके लड़ने की जरूरत है। वरिष्ठ नेता अयूब खान, प्रमोद साहू, विक्टर केरकेट्टा, समतुल्य होदा, झारखंड जेनरल मजदूर यूनियन के शमशुल हुदा, अधिवक्ता कमर खान, इप्टा पलामू के रविशंकर, शशि, संजीव, जेम्स हेरेंज, भाकपा माले के गोपाल जी, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष विरेंद्र कुमार, कालेश्वर कुमार यादव, झामुमो लातेहार के प्रेम गंझू, मनोज चौधरी, सरफराज़, असगर अली, आर्जन उरांव, रतिब खान, सामाजिक कार्यकर्ता बलराम उरांव, भारत  ज्ञान-विज्ञान समिति के शिवशंकर प्रसाद, बरवाडीह के मुखिया सुनिता टोप्पो सहित कई लोगों ने धरने पर बैठे लोगों को संबोधित किया। कार्यक्रम में पलामू ईप्टा के साथियों ने जनवादी गीतों के माध्यम से फादर स्टेन स्वामी को रिहा करने की मांग की। कार्यक्रम में रोमी एक्का, लाल बिहारी सिंह, प्रेमा तिग्गा, दिलिप रजक, जितेंद्र सिंह, पचास सिंह सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।

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