बिहार : दूसरे चरण में भाकपा-माले के छह उम्मीदवार मैदान में - Live Aaryaavart

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सोमवार, 2 नवंबर 2020

बिहार : दूसरे चरण में भाकपा-माले के छह उम्मीदवार मैदान में

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महागठबंधन 243 सीट पर चुनाव लड़ रहा है। प्रथम चरण में 71 विधानसभा होने के बाद 1066 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो गया है। बताते चले कि19 सीटों पर भाकपा माले के प्रत्याशी भाग्य अजमा रहे हैं। माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों के लिए कुल 19 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की थी। 28 अक्टूबर को प्रथम चरण में पालीगंज- संदीप सौरभ, आरा -कयामुद्दीन अंसारी,अंगियावा (सुरक्षित)- मनोज मंजिल, तरारी- सुदामा प्रसाद,डुमराव- अजित कुमार सिंह,काराकट- अरुण सिंह, अरवल- महानन्द प्रसाद और घोषी - रामबलि सिंह यादव का चुनाव हो गया है। 03 नवम्बर को दूसरा चरण का चुनाव होगा।दूसरा चरण में भोरे सुरक्षित सीट- जितेंद्र पासवान, जीरादेई - अमरजीत कुशवाहा,दरौली सुरक्षित सीट- सत्यदेव राम,दरौंदा - अमरनाथ यादव,दीघा - शशि यादव और फुलवारी सुरक्षित सीट- गोपाल रविदास हैं।दूसरे चरण में भाकपा-माले के छह उम्मीदवार मैदान में है।07 नवम्बर को तीसरा चरण में सिकटा- वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता,और औराई -आफताब आलम,बलरामपुर- महबूब आलम,कल्याणपुर सुरक्षित सीट - रणजीत राम और वारिसनगर- फूलबाबू सिंह हैं।तीसरे चरण में भाकपा-माले के पांच उम्मीदवार मैदान में है। सभी निगाहे मुजफ्फरपुर से कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य के साथ बहुत ही कम उम्र में पटना तक पद यात्रा में शिरकत करने वाले एवं स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ वर्गीय कर्मी का बेटा रंजीत राम पर है। जो कल्याणपुर विधानसभा चुनाव में महागठबंधन समर्थित सीपीआई(एम. एल)(एल) उम्मीदवार हैं। उम्मीदवार बनाने पर क़ई लोगों को आश्चर्य लग रहा था।लेकिन उसके जानने वाले के लिए ये कोई आश्चर्य नहीं हैं।रंजीत राम छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहें। मिथिला विश्वविद्यालय के सीएम साइंस जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज से इंडस्ट्रीयल केमिस्ट्री से स्नातक किये हैं। कॉलेज में सेल्फ फाईनेंस व्यावसायिक कोर्स के लिए उस समय काफ़ी बढ़ी हुई फीस लिया गया था लेकिन उस अनुरूप कोई भी व्यवस्था कॉलेज प्रशासन छात्रों को नहीं दिया केवल फीस लेने और सुविधा नहीं देने के खिलाफ रंजीत ने आइसा के नेतृत्व में आंदोलन का शंखनाद कर दिया। आंदोलन के बल पर व्यवस्थित लैब, अध्ययन रूम, इंडस्ट्री ट्रेनिंग की शुरूआत करवाया। सत्र नियमित करने व छात्रों से ली जा रही अवैध उगाही के खिलाफ भी उन्होंने निर्णायक आंदोलन का नेतृत्व किया। क़ई वर्षो तक आइसा के जिला सचिव भी रहें।  उन्होंने साम्प्रदायिक उन्माद के खिलाफ  हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत को मजबूत करने व प्रथम स्वन्त्रता संग्राम के शहीदों के याद में फैजाबाद में आयोजित शहीद मेला में दरभंगा से शिरकत कर रहें सैकड़ों नौजवानों का नेतृत्व किया और भाजपा समर्थित मायावती सरकार ने छात्र- नौजवानों को रोकते हुए हजारों छात्र-नौजवानों को जेल भेजने का काम किया। उसमें कॉमरेड रंजीत राम भी मउ जेल गए और देशव्यापी आंदोलन के बाद एक सप्ताह के बाद सरकार के पीछे हटने के बाद सभी छात्र-नौजवान रिहा हुए।

कॉमरेड रंजीत राम का यह पहला जेल यात्रा था। उसके बाद ये पीछे मुड़कर नहीं देखे और 2003 में तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री एल के आडवाणी द्वारा दरभंगा में आकर मिथिलांचल के मूल समस्या बाढ़, बंद कल-कारखाने व बिजली के स्थाई समाधान पर न बोलकर मिथिला वासियों को मैथली चैनल का झुनझुना थमा रहे थे जो कॉमरेड रंजीत राम व उनके साथियों को नागवार गुजरा और पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच उप-प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाने में सफल हो गये। पुलिस की लाठी खाते हुए उनके साथ 4 साथियों की गिरफ्तारी हुई और उन-लोगों पर शहीदे-आज़म भगत सिंह की तरह ही आजाद भारत में राष्ट्रद्रोह का मुकदमा लाद कर जेल भेज दिया गया। छात्र-नौजवानों के गिरफ्तारी के खिलाफ उठे जन-ज्वार ने कलेक्ट्रियट का फाटक तोड़ दिया और सरकार को राष्ट्रद्रोह का मुकदमा हटाना पड़ा। स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद पारिवारिक दवाब में आर्थिक उपार्जन के लिए मुंबई के फर्मास्टिक्ल कम्पनी में प्रोडक्शन केमिस्ट के पद पर काम से जुड़े लेकिन वहाँ करीब एक महीने काम किये थे कि कम्पनी के मजदूर द्वारा एक मजदूर के खिलाफ बदसलूकी करने को वो सहन नहीं कर सके और मैनेजर से मजदूर के हक में आवाज बुलंद करते हुए काम छोड़कर घर की ओर मुड़ गये और उन्होंने फिर मिथिला विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज से LLB की पढ़ाई किए और दरभंगा न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस करने लगे। लेकिन इस दौरान उनकी राजनैतिक व सामाजिक गतिविधि में कमी नहीं आई और वो भाकपा(माले) से सम्बद्ध युवाओं का क्रांतिकारी संगठन इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) में सक्रिय हुए और नगर के सचिव बने और राज्य कार्यकारिणी सदस्य चुने गए। वे अभी दरभंगा भाकपा(माले) के नगर कमिटी के सदस्य हैं। रंजीत राम दरभंगा में दलित अधिकार आंदोलन के चर्चित चेहरा हैं। उन्होंने कल्याण छात्रावास के विभिन्न सवालों पर भी आंदोलन का नेतृत्व किया। बड़े-बड़े काम करने के बाद भी रंजीत राम हमेशा पर्दे के पीछे ही रहने में विश्वास करते हैं। वे कभी भी लाइमलाइट में आने की कोशिश में नही रहते हैं। इस बार जब विधानसभा चुनाव में भाकपा(माले) ने उनको 131कल्याणपुर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया तो उन्हें ये विश्वास ही नहीं हुआ। कॉमरेड रंजीत राम मुज्जफरपुर गोलू अपहरण कांड के खिलाफ मुजफ्फरपुर से कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य के साथ बहुत ही कम उम्र में पटना तक पद यात्रा में शिरकत किए थे।आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इन्हें कल्याणपुर की जनता रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाकर जननायक कर्पुरी ठाकुर जी के वारिस के रूप में बिहार विधानसभा जरूर भेजेगी।

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