बिहार : और सुमित कुमार सिंह को मंत्री बनना तय - Live Aaryaavart

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शनिवार, 14 नवंबर 2020

बिहार : और सुमित कुमार सिंह को मंत्री बनना तय

लो बात बन गयी.बिहार के कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह के पुत्र सुमित कुमार सिंह निर्दलीय प्रत्यासी होकर चकाई से  विजयी हो गये.तब नीतीश कुमार ने पार्टी सिम्बल देने से इंकार कर दिये.चुनौती को स्वीकार करके जन सहमति के बल पर चुनावी मैदान में कूद पड़े.जन समर्थन के कारण विधायक बने.नम्बर गेम के चलते नीतीश कुमार को इकलौते निर्दलीय विधायक को कॉल करना पड़ा.जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने सुमित कुमार सिंह को नीतीश कुमार के दरबार तक पहुंचाये.विधायक सुमित कुमार सिंह ने जदयू को समर्थन देने का वादा किये हैं.इसके बाद सुमित सिंह को मंत्री  बनना तय है....

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पटना. यह जगजाहिर है कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है.इसी तरह की खबर चकाई से निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह के हवाले से आयी है.स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाने वाले के पुत्र हैं बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री की सुरक्षा में लगे जेड प्लस को हटा लिये.इसके बाद चौहतर आंदोलन के नेता नरेंद्र सिंह से वाई श्रेणी की सुरक्षाकर्मियों हो भी हटा लिये.इससे भी संतुष्ट नहीं हुए तो उनके पुत्र सुमित कुमार सिंह को टिकट काट दी.तब जाकर चकाई से निर्दलीय मैदान में कूदे.जहां की जनता ने सुमित सिंह को विजयी माला पहना दिये.एकमात्र निर्दलीय सुमित कुमार सिंह विजयी हुए. तब बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र पूर्व विधायक सुमित कुमार सिंह का पत्ता कटने से परेशान होकर लिखते हैं कि मैं निःशब्द हूं, स्तब्ध हूं.स्पष्ट हो गया कि प्रचलित राजनीति अब सिर्फ तिल-तिकड़म का अखाड़ा रह गया है.यहां चंद लोग लोकतंत्र को अपनी चेरी बनाकर रखना चाहते हैं. क्या मुझे ऐसी राजनीति करनी चाहिए? लेकिन मुझ से इस जन्म में ऐसी गन्दी राजनीति नहीं हो सकती है. मैं मिट जाऊंगा लेकिन ऐसी सियासत कदापि नहीं करूंगा. सियासत मेरा शौक नहीं  है.कुछ कर गुजरने का जरिया है, सोनो-चकाई, जमुई जिला और अंग क्षेत्र को एक नई ऊंचाई देने का माध्यम मात्र है.इसका निर्वाह अगर जब नहीं होगा तो वैसी सियासत से मेरा दूर-दूर तक वास्ता न है, न रहेगा. मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है? हर बार मेरा टिकट ही क्यों काटा जाता है? मुझे दलीय उम्मीदवारी से वंचित कर जनतंत्र को हरण करने का खेल कौन करता है?  क्या जनता जनप्रतिनिधि तय करेंगे या, चंद परजीवी चीलर किस्म के नेता? मेरे साथ जनता का जो स्नेह संबंध है उससे किन हवा हवाई नेताओं को जलन होती है, यह आप जानते हैं! जनता से मेरा रिश्ता इन्हें बेचैन कर दे रही है, तो क्या मैं इससे अपना स्वभाव बदल लूं?


क्या यह मेरा अपराध है? क्या यह मेरी गलती है कि मैं जनता जनार्दन को जनतंत्र का असली मुखिया मानता हूं? क्या यह मेरा अपराध है कि मैं गणेश परिक्रमा के बजाय जनता के बीच मर-मिटने को अपना जीवन धर्म मानता हूं? क्या यह मेरा अपराध है कि विकास को राजनीति का आधार मानता हूं? क्या यह मेरा अपराध है कि मैं जाति-धर्म से परे राजनीति करता हूं? क्या यह मेरा जुर्म है कि मैं अपने चकाई-सोनो को सबसे आगे देखना चाहता हूं?  सोनो-चकाई मेरा दीन धर्म, ईमान है। जिस मिट्टी ने मुझे पहचान दी उससे कोई मुझे दूर नहीं कर सकता है. बिहार के इस अंतिम विधानसभा क्षेत्र को राज्य का सर्वश्रेष्ठ विधानसभा क्षेत्र बनाने की मेरी दिली ख्वाहिश से न जाने किसे बैर है? मुझे ऐसी गंदी राजनीति नहीं करनी है. मुझे ऐसी सियासत पसंद नहीं है जिसमें सिर्फ निज स्वार्थ और अहंकार की तुष्टि ही मूल लक्ष्य है.मेरी राजनीति के प्राणवायु तो चकाई-सोनो की आम जनता का हित है.उसके सर्वस्व न्योछावर, सब कुछ कुर्बान है. इससे किसी को क्या बैर है  कि चकाई-सोनो मानव विकास सूचकांक में सबसे आगे हो, आधारभूत संरचना सड़क, बिजली, पुल के विकास में अव्वल हो, बिहार में यह शैक्षणिक क्रांति का केंद्र बने.स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे विशिष्ट हो.औद्योगिक पुनर्जागरण की हृदयस्थली बने. रोजगार के प्रसार का आधार बने. इससे किसी को ईर्ष्या क्यों होती है कि मैं जनतंत्र की असली जनता मालिक के द्वार पर शासन-प्रशासन को नतमस्तक करवाने की राजनीति करता हूं? तो इससे किसी को पेट में दर्द क्यों होता है? क्या ऐसे तत्वों के सामने सुमित इस जीवन में आत्मसमर्पण कर सकता है? राजनीति का यह घृणित स्वरूप अक्षम्य है, मुझे नितांत अस्वीकार्य है। इसके खिलाफ मैं हर कुर्बानी देने को हूं तैयार.


बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण इतने बदल गए हैं कि चुनाव के दौरान जिस पूर्व विधायक सुमित कुमार सिंह का टिकट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चहेतों के कहने पर काट दिया था. आज उन्हें लाने के लिए उन्हें अपने पार्टी के तीसरे प्रमुख नेता अशोक चौधरी को भेजना पड़ा.दरअसल निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह तथा उनके पिता पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह दोनों ही नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं.पिता नरेंद्र सिंह तो पहले से नाराज हैं.मगर टिकट कटने के बाद सुमित सिंह भी नाराज हो गए.अब सुमित सिंह बिहार के इकलौते निर्दलीय विधायक हैं.ऐसी परिस्थिति में जदयू को उनकी बड़ी जरूरत आन पड़ी है.खबरों के मुताबिक आज सीएम नीतीश के निर्देश पर जदयू के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री अशोक चौधरी निर्दलीय विधायक सुमित सिंह के आवास पर पहुंचे तथा पुराने निजी तथा राजनीतिक संबंधों के हवाले देकर उन्हें मुख्यमंत्री आवास चलने के लिए राजी कर लिया.प्राप्त सूचना के अनुसार निर्दलीय विधायक सुमित सिंह अशोक चौधरी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने सीएम हाउस गए हैं.इसके पूर्व राजधानी में जारी राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच आज पूर्व मंत्री अशोक चौधरी सीएम नीतीश के लिए समर्थन मांगने निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह के आवास पर पहुंचे.ज्ञात हो कि सुमित कुमार सिंह चकाई से निर्दलीय जीतने वाले बिहार के इकलौते निर्दलीय विधायक हैं.चुनाव के पूर्व तक जदयू में रहे सुमित सिंह को जदयू के टिकट का पूरा भरोसा था।मगर अंतिम समय में सिंबल मिलने के एक दिन पहले उन्हें पार्टी के द्वारा बड़ा धोखा दिया गया.उनके स्थान पर राजद से आए विधान पार्षद संजय प्रसाद को जदयू ने टिकट दिया.जो तीसरे स्थान पर रहें.कहा जाता है कि संजय प्रसाद को चकाई से जदयू का टिकट सांसद ललन सिंह के वजह से प्राप्त हुआ. जदयू से टिकट नहीं मिलने पर सुमित सिंह निर्दलीय मैदान में उतरें तथा चकाई से जीत हासिल की.अब निर्दलीय सुमित का समर्थन पाने के लिए महागठबंधन तथा एनडीए में होड़ मची हुई है.सुमित बिहार की राजनीति के सर्वाधिक कद्दावर नेताओं में पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र हैं.2005 में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने में नरेंद्र सिंह की अहम भूमिका थी.वहीं राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ नरेंद्र सिंह के स्कूली जीवन से मित्रता जगजाहिर हैं.ऐसे में पूर्व मंत्री अशोक चौधरी आज निर्दलीय सुमित सिंह के आवास पर पहुंचे.दोनों के बीच मंत्रणा हुई.इस मौके पर विधायक सुमित सिंह ने कहा कि चकाई के मतदाता मालिकों के निर्णय के बाद ही तय कर पाएंगे कि उन्हें किस गठबंधन के साथ जाना है. बिहार में नई सरकार बनने की कवायद जारी है. NDA नेताओं की मीटिंग सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के सरकारी आवास पर हो रही है. इसी बीच एक बड़े सियासी घटनाक्रम के तहत चकाई से निर्दलीय विधायक सुमित सिंह (Independent MLA Sumit Singh) सीएम आवास पहुंचे और मुख्यमंत्री को अपना समर्थन देने की बात कही. भाई अजय सिंह ने भी सीएम से मुलाकत की है. बता दें कि सुमित सिंह बिहार के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह (Former Agriculture Minister Narendra Singh) के बेटे हैं. सुमित सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल की वर्तमान विधायक सावित्री देवी को 581 वोटों के अंतर से हरा दिया था.

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