बिहार : किसान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत 100गांव में किसान पंचायत - Live Aaryaavart

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बुधवार, 16 दिसंबर 2020

बिहार : किसान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत 100गांव में किसान पंचायत

* 20दिसम्बर को 100 गांवों में दिल्ली बाॅर्डर पर किसान आंदोलन में मौत के शिकार हुए किसानों  की स्मृति में आयोजित होगी श्रद्धांजलि सभा - किसान महासभा

* 29दिसंबर के राजभवन मार्च की तैयारी में  निकलेगी किसान संघर्ष यात्रा

* केन्द्र सरकार किसान आंदोलन के प्रति हठधर्मिता छोड़ कर किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को वापस ले 

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मुजफ्फरपुर, 16दिसम्बर। अखिल भारतीय किसान महासभा, खेत व ग्रामीण मजदूर सभा तथा भाकपा-माले की संयुक्त बैठक हरिसभा चौक स्थित माले जिला कार्यालय में आयोजित हुई।  बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसान संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर 20दिसम्बर को किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली बाॅर्डर पर मौत के शिकार हुए किसानों को शहीद का दर्जा देते हुए 100 गांव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाये।  इस अवसर पर गांवों में  किसान शहीद बेदी का भी निर्माण होगा। यह भी तय किया गया कि किसान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत 28 दिसंबर तक 100से ज्यादा गांव-पंचायतों में किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पंचायत का आयोजन कर काले कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव लिया जायेगा। 


इन प्रस्तावों को 29दिसंबर को पटना में आयोजित किसानों के  राजभवन मार्च के दौरान राज्यपाल को समर्पित किया जायेगा। राजभवन मार्च की तैयारी में प्रखंडों में किसान संघर्ष यात्रा भी निकलेगी। यात्रा के दौरान ग्रामीण चौक-चौराहों पर जनसभा कर किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों के बारे में आमलोगों को बताया जायेगा।  बैठक में किसान महासभा के जिला सचिव जितेन्द्र यादव, खेत मजदूर सभा के जिला अध्यक्ष रामनंदन पासवान,सचिव शत्रुघ्न सहनी, माले जिला सचिव कृष्णमोहन सहित किसान-मजदूर नेता बिन्देश्वर साह,  होरिल राय, वीरेन्द्र पासवान, परशुराम पाठक, सीताराम पासवान, सुलेखा देवी, मो.करीम, सुरेश राम, नीलकमल, गुड्डू कुमार, राजकिशोर मंडल, सकल ठाकुर, प्रो अरविंद कुमार डे सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। बैठक के दौरान किसान-मजदूर नेताओं ने कहा कि कि केन्द्र सरकार व भाजपा नेताओं द्वारा किसान आंदोलन को बदनाम करना खतरनाक है। मोदी सरकार को किसानों व देश हित में तीनों कृषि कानूनों को अविलंब वापस ले लेना चाहिए जिसके लिए हजारों किसान भारी ठंड में दिल्ली बाॅर्डर पर पिछले 21दिनों से बैठे हैं। प्रधानमंत्री को आंदोलनकारी किसानों के प्रति हठधर्मिता छोड़ कर उनकी मांगों को मान लेना चाहिए। बैठक की शुरुआत किसान आंदोलन के दौरान मौत के शिकार हुए किसानों को दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि व सलामी देने साथ हुई।

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