बिहार : जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के पीछे है किसकी जिद? - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

बिहार : जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के पीछे है किसकी जिद?

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पटना. पीएमसीएच, एनएमसीएच समेत राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल नौवें दिन भी जारी है. कल (बुधवार) स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों और जूनियर डॉक्टरों के बीच कोई वार्ता नहीं हो सकी. हालांकि देर शाम जेडीए के प्रेसिडेंट ने मीडिया को जानकारी दी कि स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद हमारा प्रतिनिधिमंडल आज (गुरुवार) स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत से मिलने जाएगें तब तक हड़ताल जारी रहेगी. आखिर जिद किसकी है? यह सवाल बिहार में तैरने लगा है. क्या वह जूनियर डॉक्टरों की मांगों की जिद है? क्या वह बिहार सरकार के संकल्प पत्र की घोषणा को अमल न करने की जिद है?आईएमए की जिद है कि वह नौ दिनों से जारी हड़ताल में बीच बचाव नहीं करेंगे. इस बीच जिद के कारण 11लोगों की मौत हो गयी है. 113 लोगों का ऑपरेशन रोक दिया है.करीब 400 मरीजों का पलायन हो गया है.यह हाल है पीएमसीएच के 600 जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से उत्पन्न हो गयी है.बिहार के सभी नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के 1300 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं.  इस संदर्भ में रेजींडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार ने कहा कि हमलोग जिद नहीं कर रहे हैं.बस जूनियर डॉक्टरों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि जेडीए व आरडीए द्वारा अनेक बार स्वास्थ्य मंत्री व प्रधान सचिव, स्वास्थ्य को रेजीडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड व सैलरी बढ़ाने को लेकर कई माध्यमों से सूचित किया गया है.इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. 2014 में ही बिहार सरकार के संकल्प पत्र में ये घोषणा हुई थी कि प्रत्येक 3 वर्षों पर रेजिडेंट्स डॉक्टरों ( पीजी और सीनियर रेजिडेंट्स) का स्टाइपेंड और सैलरी को संशोधित किया जाएगा और इसके तहत मई 2017 में बढ़ोतरी की गई पर 2020 में अभी तक इसपर कोई विचार नहीं किया गया है. जबकि सभी जूनियर व सीनियर डॉक्टर कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहे हैं. इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान में जूनियर डॉक्टरों को 90 हजार स्टाइपेंड दिया जाता है.वहीं बिहार के सभी नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के जूनियर डॉक्टर्स को 2017 में छात्रवृत्ति प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के लिए क्रमश: 50 हजार, 55 हजार व 60 हजार रुपए मासिक निर्धारित हुई थी. तब प्रत्येक तीन वर्ष पर छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी किए जाने का आश्वासन स्वास्थ्य विभाग ने दिया था. इसके अनुसार, जनवरी, 2020 में छात्रों की छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी की जानी थी लेकिन उसे अबतक नहीं किया गया है.


बताते चले कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर बीते आठ दिनों से जारी राज्य के नौ मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों की बेमियादी हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है.मरीज अस्पतालों से पलायन करने को मजबूर हैं.वहीं हड़ताली जूनियर डॉक्टर अपनी जिद पर अड़े हैं.राज्य सरकार की सख्ती भी इन हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को नहीं डिगा पाई. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत से मौखिक आश्वासन मिलने के बावजूद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल नहीं टूटी और वे लिखित आश्वासन देने की मांग की. मरीजों की परेशानी को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के आवास पर जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों की बात प्रधान सचिव से फोन पर हुई. इस दौरान पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. बिमल कारक और प्राचार्य डॉ. बीपी चौधरी भी मौजूद थे.उनकी मौजूदगी में प्रधान सचिव ने जूनियर डॉक्टरों को काम पर लौटने का आग्रह किया और कहा कि अगले कुछ दिनों में उनकी मांगों को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा. आईएमए अध्यक्ष के रूप में डॉ. बिमल कारक ने भी जूनियर डॉक्टरों की लड़ाई में उनका साथ देने का भरोसा दिया. साथ ही यह भी लिखित आश्वासन देने को तैयार हुए कि अगले एक महीने में उनके स्टाइपेंड पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आइएमए उनकी लड़ाई लड़ेगा. उनके तमाम तरह के आश्वासन और आग्रह के बाद भी जूनियर डॉक्टर अपनी जिद पर अड़े रहे और बिना लिखित आश्वासन के काम पर लौटने से साफ मना कर दिया. सभी मेडिकल कॉलेजों के नेताओं से बातचीत के बाद जेडीए ने लिखित आश्वासन के बिना हड़ताल खत्म करने से मना कर दिया.इस पर अध्यक्ष डॉ. बिमल कारक ने कहा कि यदि एक माह में उनको बढ़ा मानदेय नहीं मिलेगा तो आइएमए उनकी लड़ाई लड़ेगा.वह इस बात को लिखकर देने को तैयार थे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने यह कहते हुए कार्य पर वापस लौटने से मना कर दिया कि जब दो दिन बाद प्रधान सचिव से मुलाकात होगी तभी हड़ताल खत्म होगी. पीएमसीएच जेडीए अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार व सचिव कुंदन सुमन ने बताया कि प्रधान सचिव ने हमारी मांगों पर विचार जारी होने की बात कही है. कब तक इसे लागू किया जाएगा, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। पूर्व में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में भी उन्होंने विचार की बात कही थी लेकिन चार से वह लंबित है.ऐसे में लिखित आश्वासन मिलने तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की है. उन्होंने कहा, जनता का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए. मरीजों को कष्ट पहुंचाना कहीं से भी उचित नहीं है.चिकित्सक काम पर वापस लौटें और मरीजों का दर्द दूर करें.राज्य सरकार हड़ताली डॉक्टरों की मांग पर विचार करके उनके हक में अच्छा निर्णय लेगी.

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