मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी कविता के प्रतिनिधि हस्ताक्षर - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी कविता के प्रतिनिधि हस्ताक्षर

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नई दिल्ली : प्रख्यात कवि मंगलेश डबराल का निधन हो गया है। उन्होंने  बुधवार शाम एम्स में आखिरी सांस ली, जहाँ बीते कुछ दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे कोरोना से संक्रमित हो गए थे जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। 1948 में टिहरी गढ़वाल के काफलपानी में जन्मे मंगलेश जी को समकालीन हिंदी कविता के प्रतिनिधि हस्ताक्षरों में शुमार किया जाता है। उनके निधन पर शोक जताते हुए राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा, साहित्य अकादेमी पुरस्कार समेत अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित मंगलेश जी हिंदी कविता के ऐसे हस्ताक्षर थे जिनकी न केवल अखिल भारतीय स्तर पर बल्कि पूरी दुनिया में पहचान थी। हमने अपने प्रकाशन समूह के राधाकृष्ण प्रकाशन से उनके कविता संग्रहों, पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं और नए युग मे शत्रु का प्रकाशन  किया, जो आज आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख कृतियों में शामिल हैं। हम जो देखते हैं कविता संग्रह पर उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रदान किया गया था। माहेश्वरी ने कहा, हाल ही में मंगलेश जी ने अरुंधति राय के दूसरे चर्चित उपन्यास का अपार खुशियों का घराना के नाम से हिंदी में अनुवाद किया था, जिसको व्यापक रूप से सराहा गया। उनका यह अनुवाद राजकमल प्रकाशन से ही प्रकाशित है।  उन्होंने कहा, मंगलेश जी का जाना समूचे साहित्य समाज के साथ साथ हमारे लिए अपूरणीय क्षति है। हमारी स्मृतियों और अपनी कृतियों में वे हमेशा उपस्थित रहेंगे।


मंगलेश डबराल के बारे में

मंगलेश डबराल का जन्म 16 मई, 1948 को उत्तराखंड में टिहरी ज़िले के गांव काफलपानी में हुआ। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लंबे समय तक काम करने के बाद वे तीन वर्ष तक नेशनल बुक ट्रस्ट के सलाहकार रहे। उनके पांच कविता संग्रह ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’, ‘नये युग में शत्रु’; तीन गद्य संग्रह ‘एक बार आयोवा’, ‘लेखक की रोटी’, ‘कवि का अकेलापन’ और साक्षात्कारों का एक संकलन प्रकाशित हैं। उन्होंने बेर्टोल्ट ब्रेश्ट, हांस माग्नुस ऐंत्सेंसबर्गर, यानिस रित्सोस, जि़्बग्नीयेव हेर्बेत, तादेऊष रूज़ेविच, पाब्लो नेरूदा, एर्नेस्तो कार्देनाल, डोरा गाबे आदि की कविताओं का अंग्रेज़ी से अनुवाद किया है। वे बांग्ला कवि नबारुण भट्टाचार्य के संग्रह ‘यह मृत्यु उपत्यका नहीं है मेरा देश’ के सह-अनुवादक भी हैं। उन्होंने नागार्जुन, निर्मल वर्मा, महाश्वेता देवी, उ र अनंतमूर्ति, गुरदयाल सिंह, कुर्रतुल-ऐन हैदर जैसे कृती साहित्यकारों पर वृत्तचित्रों के लिए पटकथा लेखन किया है। वे समाज, संगीत, सिनेमा और कला पर समीक्षात्मक लेखन भी करते रहे हैं।


प्रायः सभी भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, डच, फ्रांसीसी, स्पानी, इतालवी, पुर्तगाली, बल्गारी, पोल्स्की आदि विदेशी भाषाओं के कई संकलनों और पत्र-पत्रिकाओं में मंगलेश डबराल की कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हैं। मरिओला ओप्ऱे$दी द्वारा उनके कविता-संग्रह ‘आवाज़ भी एक जगह है’ का इतालवी अनुवाद ‘अंके ला वोचे ऐ उन लुओगो’ नाम से प्रकाशित हुआ और अंग्रेज़ी अनुवादों का एक चयन ‘दिस नंबर दज़ नॉट एग्ज़िस्ट’ भी शीघ्र प्रकाश्य है। उन्हें ओम् प्रकाश स्मृति सम्मान, शमशेर सम्मान, पहल सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, हिंदी अकादेमी दिल्ली का साहित्यकार सम्मान और कुमार विकल स्मृति सम्मान आदि प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आयोवा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय लेखन कार्यक्रम, जर्मनी के लाइपज़िग पुस्तक मेले, रोतरदम के अंतरराष्ट्रीय कविता उत्सव में और नेपाल, मॉरिशस और मॉस्को की यात्राओं के दौरान कई जगह कविता पाठ किये हैं। जन संस्कृति मंच से जुड़े हुए मंगलेश डबराल आजीविका के लिए पत्रकारिता करते हैं।



-संतोष कुमार-

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