बिहार : DMऔर SSP के वेतन से ढ़ाई हजार कटौती कर कोर्ट को सूचित करना था - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

बिहार : DMऔर SSP के वेतन से ढ़ाई हजार कटौती कर कोर्ट को सूचित करना था

  • आज एडीजे 17 ने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश का उल्लंघन क्यों हुआ? पूरे मामले में 21 जनवरी तक जवाब देने का निर्देश जारी हुआ है....

salary-cut-dm-ssp-civil-court-patna
पटना. पटना सिविल कोर्ट ने बिहार के डीजीपी एसके सिंघल और बिहार के चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार पर सख्‍ती दिखाई है. एडीजे-17 ने दोनों  अधिकारियों  को नोटिस देकर  पूछा है कि कोर्ट के आदेश का पालन इन्‍होंने सुनिश्चित क्‍यों नहीं किया है. कोर्ट ने एक मामले में पटना डीएम कुमार रवि और पटना एसएसपी उपेंद्र कुमार शर्मा के वेतन से ढ़ाई-ढ़ाई हजार रुपये कटौती कर कोर्ट को सूचित करने का आदेश दिया था. जानकारी के अनुसार ये मामला 4 अप्रैल 2015 को फुलवारीशरीफ के आलमपुर गांव में हुई मॉब लिंचिंग से जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि तब सब इंस्पेक्टर जय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उस गांव में भीड़ द्वारा पीटे जा रहे एक व्यक्ति को बचाया था. हालांकि हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही उसकी मौैत हो गई थी. इस मामले में सब इंस्पेक्टर सिंह की लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी.  लिंचिंग केस में शंकर ठाकुर एंड विनोद राय को नामजद बनाते हुए मुख्य अभियुक्त बनाया गया था.  इस लिंचिंग केस में इसके अलावा कई अज्ञात भी आरोपी बनाए गए थे. फुलवारीशरीफ में एक व्‍यक्ति की पीट-पीटकर हत्‍या कर दी गई थी.यह मामला कोर्ट में चल रहा था.इसमें डीएम और एसएसपी समय पर गवाह पेश नहीं कर पाए थे. जिसके कारण कोर्ट ने उनके वेतन में कटौती का आदेश दिया था.


बिहार के डीजीपी और मुख्य सचिव (DGP and Chief Secretary of Bihar) को पटना सिविल कोर्ट (Civil Court) ने नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? एडीजे 17 ने पटना के फुलवारीशरीफ के एक गांव में पीट-पीटकर हत्या मामले में कोर्ट का एक आदेश नहीं मानने को लेकर यह नोटिस भेजा है. इस वक्त एक बड़ी खबर पटना से सामने आ रही है. बिहार के पुलिस महानिदेशक को पटना सिविल कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है. डीजीपी के साथ-साथ बिहार के मुख्य सचिव को भी नोटिस भेजा गया है. इन्हें कोर्ट को जवाब देना है. पटना में हुई मॉब लिंचिंग की एक घटना को लेकर इन दोनों बड़े अफसरों को सिविल कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. कोर्ट के मुताबिक मॉब लिंचिंग के एक मामले में गवाह पेश नहीं करने को लेकर पटना के एसएसपी और यहां के जिलाधिकारी का वेतन काटने का आदेश दिया गया था. हालांकि कोर्ट के आर्डर के बावजूद भी राज्य के सीनियर अफसरों ने ऐसा नहीं किया. वरीय पुलिस अधीक्षक और डीएम के वेतन से 2500-2500 रुपये  कटौती करने का आदेश दिया गया था, जो नहीं हुआ.  इसी मामले में कोर्ट ने पुनः संज्ञान लेते होते बिहार के डीजीपी और यहां के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है. क्योंकि कोर्ट के आदेश के बावजूद भी न तो डीएम के वेतन से 2500 रुपये काटे गए और न ही एसएसपी के वेतन से इतनी ही राशि की कटौती की गई. दरअसल इस मामले के तहत पटना के डीएम और एसपी को गवाह प्रस्तुत नहीं करने को लेकर दोनों अधिकारियों के 2500 रुपए वेतन से काट कर मुख्यमंत्री रिलीफ फंड में जमा कर कोर्ट को सूचित करने का आदेश दिया था. बता दें कि कोर्ट के आदेश के बावजूद इन दोनों अधिकारियों के वेतन नहीं काटे गए और कोर्ट को मुख्य सचिव व डीजीपी के द्वारा इसकी कोई सूचना भी नहीं दी गई. इसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन मानते हुए कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है. इसी मामले पर आज एडीजे 17 ने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश का उल्लंघन क्यों हुआ? पूरे मामले में 21 जनवरी तक जवाब देने का निर्देश जारी हुआ है.

कोई टिप्पणी नहीं: