बिहार : सावित्रीमाई फुले की 190 वीं जयंती का उत्सव - Live Aaryaavart

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शनिवार, 2 जनवरी 2021

बिहार : सावित्रीमाई फुले की 190 वीं जयंती का उत्सव

महान क्रांतिकारी शिक्षक, कवियत्री और संस्थान निर्माता, सावित्रीमाई फुले की 190 वीं जयंती का उत्सव...

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पटना. वर्तमान समय में देश में नफरत की राजनीति खेली जा रही है.देश में सावित्रीबाई फुले और फ़ातिमा शेख भी थीं.जो मज़हवी दीवारों को माना ही नहीं वरण दलितों और महिलाओं के उत्थान में लगी रह गयी.3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले का जन्म जयंती है. 9 जनवरी को फ़ातिमा शेख का है.दोनों वीरांगनाओं का जन्म जयंती मनाने का निश्चय ऐपवा ने किया है.यह जानकारी ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने दी हैं. उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख की जन्म जयंती के अवसर पर उनकी साझी विरारत को आगे बढ़ाने के लिए ऐपवा पूरे देश में 3 जनवरी से 9 जनवरी 2021 के बीच  ब्राह्मण वाद, पितृसत्तात्मक सोच व साम्प्रदायिकता के खिलाफ न्याय, समानता, भाईचारा व आजादी के लिए अभियान चलाएगा.इस अवसर  ऐपवा की राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे ने कहा कि  सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षक, कवियत्री, समाजसेविका हैं जिनका लक्ष्य लड़कियों को शिक्षित करना रहा है. सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के एक दलित परिवार में हुआ. मात्र नौ साल की उम्र में उनकी शादी क्रांतिकारी ज्योतिबा फुले से हो गई, उस वक्त ज्योतिबा फुले सिर्फ 13 साल के थे.सावित्रीबाई फुले, फ़ातिमा शेख.  फ़ातिमा शेख़ मियां उस्मान शेख की बहन थी, जिनके घर में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने निवास किया था जब फुले के पिता ने दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे उनके कामों की वजह से उनके परिवार को घर से निकाल दिया था. वह  आधुनिक भारत में सबसे पहली मुस्लिम महिला शिक्षकों में से एक थी और उसने फुले स्कूल में दलित बच्चों को शिक्षित करना शुरू किया. ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख के साथ, दलित समुदायों में शिक्षा फैलाने का आरोप लगाया. राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि पूरे देश में गोष्ठी, धरना, प्रदर्शन आदि के जरिए स्त्रियों, लड़कियों के अधिकारों को बुलंद किया जाएगा अपितु सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख के योगदान की चर्चा की जाएगी. साथ महिला आन्दोलन के सामने पेश चुनौतियों पर भी विचार विमर्श कर महिला आन्दोलन तेज किया जाएगा.उन्होंने कहा कि फ़ातिमा शेख़ और सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं और उत्पीड़ित जातियों के लोगों को शिक्षा देना शुरू किया था, स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें धमकी दी गई थी. उनके परिवारों को भी निशाना बनाया गया था और उन्हें अपनी सभी गतिविधियों को रोकना या अपने घर छोड़ने का विकल्प दिया गया था उन्होंने स्पष्ट रूप से बाद का चयन किया. सरोज चौबे,राज्य अध्यक्ष, ऐपवा बिहार ने जानकारी दी है कि कल रविवार को पटना सिटी, भोला पासवान शास्त्री भवन व दीघा में कार्यक्रम आयोजित है.पालीगंज में 5 को गोष्ठी व कल ही भोजपुर के गड़हनी में गोष्ठी है. 9 को फुलवारी व पूर्वी चम्पारण में गोष्ठी आयोजित है.

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