बिहार : पीएम ऑफिस के निर्देश पर फुलवारी पुलिस ने मामला दर्ज - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

बिहार : पीएम ऑफिस के निर्देश पर फुलवारी पुलिस ने मामला दर्ज

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फुलवारीशरीफ .कोरोना पीडि़तों के इलाज के नाम पर राजधानी में लाखों रुपये की ठगी का मामला प्रकाश में आया है. फुलवारीशरीफ स्थित एम्स, पटना में कई कोरोना पीडि़तों से फर्जी डॉक्टर बनकर उनसे दवा के नाम पर मोटी राशि वसूलने का आरोप है. मामला प्रकाश में आते ही आरोपित फर्जी चिकित्सक फरार हो गया है.इस मामले में एक पीड़िता ने फुलवारीशरीफ थाने में आरोपी जयप्रकाश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी है. पुलिस जांच कर रही है. इस मामले में पीड़िता साक्षी गुप्ता ने बताया कि वह रोहतास जिले के संझौली की रहने वाली है.उसके पिता लालबाबू गुप्ता को पहले से किडनी और ब्लड शुगर की बीमारी थी. 17 जुलाई 2020 को कोरोना संक्रमित हुए थे.उन्हें उसी दिन इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था.साक्षी ने कहा कि पटना एम्स के नियमानुसार कोरोना वार्ड में मरीज के परिजन या बाहरी लोग नहीं जा सकते हैं.परिवार वालों को हॉस्पिटल कैम्पस के बाहर ही रहना पड़ता था. एम्स के पास पेशेंट के अटेंडेंट का मोबाइल नंबर मौजूद रहता था.ऐसे में एम्स के डॉक्टर और नर्स ही मरीज की खिदमतदारी करते हैं.दवा खरीदने का Rx देते हैं.इस बीच 21 जुलाई को साक्षी के भाई दिनेश को एक रिश्तेदार के जरिए डॉ. जय प्रकाश का मोबाइल नंबर 9835465566 मिला.  बताया गया था कि वो पटना के ही पारस हॉस्पिटल का डॉक्टर है, पर मोबाइल पर उसने कहा कि वह अभी अपोलो हॉस्पिटल अगमकुआं का डॉक्टर है.उसने कहा कि लालबाबू गुप्ता को फोर्टिस दिल्ली में उसके बैचमेट रहे डॉ. हर्षवर्धन देख रहे हैं.वह फॉलोअप करता रहेगा. उसी दिन उसने कॉल किया कि लालबाबू गुप्ता की हालत सीरियस है.कुछ दवाएं बताईं और कहा कि AIIMS में यह नहीं है. कागज पर देना भी मना है. 5 डोज देना होगा. बाहर से मंगाना होगा. भरोसा दिलाने के लिए उसने हॉस्पिटल के अंदर एडमिट लालबाबू गुप्ता का फोटो भी चैट पर भेजा. दिनेश तस्वीर देखकर विचलित हो गया.उसने डॉक्टर के अकाउंट में पहले 900, फिर 20 हजार रुपए गूगल-पे के जरिए भेज दिए.अगले दिन 22 जुलाई को फिर अगले डोज के लिए 20 हजार रुपए मांगे. जान बचाने के नाम पर उसने फिर गूगल-पे से ही पैसा भेज दिया.साक्षी कहती है कि किसी तरह से पैसे जुटाकर उक्त व्यक्ति को दिया.इस तरह रोहतास के लालबाबू गुप्ता के परिजनों ने 40 हजार 900 रुपए दे दिए. 


उन्होंने कहा कि खुद को वहां के पोस्टेड डॉक्टर का बैचमेट बताने वाले ने पिताजी लालबाबू गुप्ता की तस्वीर भेजने के साथ 21 जुलाई को जयप्रकाश ने 2 मोबाइल पास में नहीं रखने की भी ताकीद की थी. अगस्त में लालबाबू गुप्ता का निधन हो चुका है. डॉ. जय प्रकाश के शातिराना अंदाज से साक्षी को उसपर शक होने लगा.पिता हॉस्पिटल में एडमिट थे, तो वह अपनी मां के साथ होम क्वारेन्टीन में थी.उसने 23 जुलाई 2020 को PMO के नंबर पर कॉल कर बताया कि AIIMS में मेडिसीन नहीं है. PMO के अधिकारी चौंक गए. फिर अचानक AIIMS से कॉल आया और वहां पूछताछ के बाद साफ हो गया कि जय प्रकाश ने उसे ठगा है.बीमारी और इलाज के अपडेट के साथ पिता की तस्वीर उसके दिमाग में थी, जिससे उसे यह भी यकीन हो गया कि जय प्रकाश ने AIIMS के ही किसी स्टाफ से मदद ली है. इधर, 15 अगस्त को AIIMS से डिस्चार्ज होने के बाद 24 अगस्त को लालबाबू गुप्ता ने IGIMS में अंतिम सांस ली.पूरा परिवार गम में डूबा था.चार बहनों में सबसे छोटी साक्षी भी टूट गई थी, लेकिन उसने खुद को संभाला. साक्षी ने ट्रू कॉलर सब्सक्रिप्शन के जरिए शातिर जय प्रकाश के मोबाइल नंबर से उसकी Email id निकाली.फिर उस रेस्टोरेंट रिव्यू को निकाला, जिसे जय प्रकाश ने अपनी Email id से मार्क दिया था.अब साक्षी जय प्रकाश के सोशल साइट की id तक पहुंच गई. वहां उसे भगवानो हेल्थ केयर क्लिनिक और उसके डिटेल के बारे में पता चला.इस क्लिनिक के बारे में कन्फर्म करने के लिए साक्षी ने अपनी एक दोस्त का सहारा लिया, उसके जरिए मोबाइल पर बात कर सबूत जुटाया.जय प्रकाश खुद को पारस अस्पताल का डॉक्टर बता रहा है.एक बार फिर से पूरी जानकारी PMO को भेजी.अब उसे 14 जनवरी 2021 को PMO का Email आया और बताया गया कि AIIMS के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अमित कुमार के जरिए जय प्रकाश ने पेशेंट की जानकारी हासिल की थी. PMO ने अपनी जांच कर FIR दर्ज करने और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया.PMO के इस आदेश के बाद अब पटना पुलिस हरकत में है.वह दानापुर में किराया पर रहता है, वैसे मूल निवासी मुजफ्फरपुर का है.फुलवारीशरीफ के ASP मनीष खुद इस केस को देख रहे हैं.24 जनवरी को साक्षी के बयान पर फुलवारी थाना में IPC की धारा 406 और 420 के तहत शातिर ठग डॉक्टर जय प्रकाश के खिलाफ FIR नम्बर 63/2021 दर्ज कर लिया गया. डॉ. जय प्रकाश नाम के इस शख्स ने इस तरह का खेल कितने लोगों के साथ किया, यह अब पुलिस ढूंढ़ेगी.लेकिन, लालबाबू गुप्ता की 17 साल की बेटी साक्षी ने जिस तरह इस शातिर के खिलाफ साक्ष्य जुटाए और PMO से जांच कराई, वह मिसाल है. PMO के आदेश पर अब फुलवारीशरीफ थाने में FIR दर्ज कर पुलिस डॉ. जय प्रकाश की गिरफ्तारी में जुट गई है. AIIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. CM सिंह ने इस मामले में कहा कि कोरोना के भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी लेने के लिए बहुत सारे परिजन, डॉक्टर-स्टाफ बेड नंबर बताकर वीडियो कॉल, फोटो आदि कराते हैं.हमें भी लगता है कि कोई इस हालत में अपने मरीज को देखना चाह रहा तो अनुमति दे देते हैं. नहीं देखने दें तो यह भी अमानवीय होगा.इसी में किसी ने दुरूपयोग कर लिया है.

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