भाजपा-जदयू की सरकार यह बताए विगत 16 वर्षों में बिहार में कितने खुले उद्योग? - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 21 जनवरी 2021

भाजपा-जदयू की सरकार यह बताए विगत 16 वर्षों में बिहार में कितने खुले उद्योग?

  • अनर्गल बयानबाजी से बाज आएं सुशील मोदी, बिहार के किसानों की बर्बादी के लिए भाजपा-जदयू है जिम्मेवार
  • 2006 में सत्ता में आते ही मंडी व्यवस्था भंग करने का अपराध किया है भाजपा-जदयू ने

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पटना 21 जनवरी 2021, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि भाजपा सांसद सुशील मोदी ने अनर्गल बयानबाजी करना ही अपना काम बना लिया है. विगत 16 वर्षों से बिहार में भाजपा-जदयू की तथाकथित डबल इंजन की सरकार है. अभी बिहार से 39 सांसद एनडीए के ही हैं, फिर उनको बिहार में उद्योगों की स्थापना से कौन रोक रहा है? बिहार में कृषि आधारित उद्योगों के विकास की बजाए आज तो भाजपा पूरे देश की खेती को अंबानी व अडानी सरीखे काॅरपोरेटों को नीलाम करने पर आमदा है. बरसो से संचित देश की संपत्ति को ये मिट्टी के भाव बेचने का काम कर हैं. आज जब भाजपा की काॅरपोरेटपरस्ती के खिलाफ व्यापक आंदोलन फूट पड़ा है, तो ये भाजपाई किसान समर्थक होने का स्वांग रच रहे हैंत्र. कहा कि आज राज्य में मात्र 11 चीनी मिलें बची रह गई हैं. रीगा चीनी मिल के बंद हो जाने के बाद यह संख्या घटकर 10 रह जाएगी. काश्तकारों के खेतों में करीब 15 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है, जिसकी कीमत 50 करोड़ के आसपास बताई जा रही है. ये सब बर्बाद हो रहे हैं. किसानों का 60 से 70 करोड़ रुपये का बकाया पड़ा हुआ है. केसीसी के मार्फत दिए गए ईख मूल्य पर बैंकों की दावेदारी भी 60 करोड़ के आसपास बताई जा रही है. मिल मजदूरों का ढाई करोड़ रु. का बकाया भी प्रबंधन के पास है. स्थिति बेहद गंभीर हो चली है. लोग आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मिल अभी तक चालू नहीं हुआ है. क्या इसका जबाव भाजपा के पास है? बिहार के किसानों का न तो एमएसपी पर धान खरीदा जाता है, न ही गन्ने का कोई मूल्य निर्धारण है. बटाईदारों को यह सरकार कोई सुविधा प्रदान नहीं करती है. बिहार के किसानों को यह अच्छी तरह याद है कि सत्ता में आते ही भाजपा-जदयू की सरकार ने सबसे पहला काम मंडी व्यवस्था भंग कर बिहार के किसानों को कंगाल बनाने का काम किया था.

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