28 जनवरी को पूरे राज्य में सभी चीनी मिलों के गेट पर होगा धरना प्रदर्शन - Live Aaryaavart

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शनिवार, 23 जनवरी 2021

28 जनवरी को पूरे राज्य में सभी चीनी मिलों के गेट पर होगा धरना प्रदर्शन

  •  गन्ना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 400 रु. प्रति क्विंटल तय करे सरकार.
  • रीगा चीनी मिल का पेराई सत्र अविलंब आरंभ करे
  • भाजपा-जदयू के राज में एक-एक कर बंद होती गईं चीनी मिलें

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पटना 23 जनवरी, आज पटना में अखिल भारतीय किसान महासभा से संबद्ध बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सत्र में गन्ना का मूल्य 400 रु. प्रति क्विंटल तय करने, सभी प्रकार के बकाए का भुगतान, रीगा चीनी मिल को पेराई सत्र अविलंब आरंभ करने, घटतौली पर रोक और गन्ना किसानों के अन्य सवालों पर 28 जनवरी को पूरे राज्य में चीनी मिलों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. उक्त बातें भाकपा-माले के सिकटा विधायक व बिहार राज्य गन्ना उत्पादक संघ के राज्य संयोजक बीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कही. संवाददाता सम्मेलन में उनके साथ अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केडी यादव और बिहार राज्य सह सचिव उमेश सिंह भी उपस्थित थे. नेताओं ने कहा कि सूबे में विगत ढाई महीने से चीनी मिलें चालू हैं, लेकिन अब तक सत्र 2020-21 के लिए गन्ना मूल्य का निर्धारण नहीं हो सका है. इस बीच डीजल, खाद, कीटनाशक जैसी वस्तुओं और जरूरी कृषि उपकरणों के मूल्य लगातार बढ़ते गए हैं. गन्ना से पैदा होने वाली वस्तुओं चीनी, इथेनाॅल और अन्य वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं, लेकिन किसानों के लिए गन्ना का मूल्य अभी तक निर्धारित नहीं हो सकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हमारी मांग है कि गन्ना का न्यूनतम मूल्य 400 रु. प्रति क्विंटल तय किया जाए. राज्य के सीतामढ़ी जिले में रीगा चीनी मिल का पेराई सत्र अब तक शुरू नहीं हो पाया है. मिल बंद पड़ा है. आज राज्य में मात्र 11 चीनी मिलें बची हैं. रीगा चीनी मिल के बंद हो जाने के बाद यह संख्या घटकर 10 रह जाएगी. इसके कारण वहां के करीब 40 हजार ईख काश्तकार और करीब 700 मिल कामगार के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है. काश्तकारों के खेतों में करीब 15 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है, जिसकी कीमत 50 करोड़ के आसपास बताई जा रही है. ये सब बर्बाद हो रहे हैं. किसानों का 60 से 70 करोड़ रुपये का बकाया पड़ा हुआ है. केसीसी के मार्फत दिए गए ईख मूल्य पर बैंकों की दावेदारी भी 60 करोड़ के आसपास बताई जा रही है. मिल मजदूरों का ढाई करोड़ रु. का बकाया भी प्रबंधन के पास है. स्थिति बेहद गंभीर हो चली है, लेकिन मिल अभी तक चालू नहीं हुआ है.  2017 में बिहार के पश्चिम चंपारण और उत्तर बिहार के अन्य क्षेत्रों में प्रलंयकारी बाढ़ से गन्ना की फसल भी काफी बर्बाद हुई थी. बर्बाद गन्ना फसल के मुआवजे के लिए सरकार द्वारा राशि भी आवंटित की गई, लेकिन किसानों को मुआवजा आज तक नहीं मिला है. इस संदर्भ में माननीय उच्च न्यायालय में एक वाद ब्ॅश्रब् छव 20158/2018 चला, जिसमें 02-12-19 को गन्ना किसानों को फसल का मुआवजा देने का फैसला आया. लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया है.


हमारी मांग है कि 

1.  रीगा के 40 हजार किसानों, 7 हजार कामगारों व इलाके के व्यापक हित में हर हाल में रीगा चीनी मिल को अविलंब चालू कराया जाए और बकाए राशि का भुगतान किया जाए. 

2. सासामूसा, गोपालगंज, सिधवलिया चीनी मिलों ने पिछले साल का भुगतान अभी तक नहीं किया है. ऊपर से रीगा के किसानों को भी अब उपर्युक्त चीनी मिलों में ही गन्ना आपूर्ति करने को कहा जा रहा है. यह किसान हित के प्रतिकुल है. इस फरमान को रद्द कर रीगा चीनी मिल को ही चलाने की व्यवस्था की जाए.

3. सत्र 2020-21 के लिए गन्ना का मूल्य कम से कम 400 रु. प्रति क्विंटल तय किया जाए.

4. नियमानुसार 14 दिनों के अंदर किसानों के बकाये पैसे के भुगतान की व्यवस्था की जाए. यदि 14 दिनों के अंदर भुगतान नहीं होता है तो नियमानुसार ब्याज सहित भुगतान की गारंटी की जाए.

5. मझौलिया चीनी मिल द्वारा विगत साल के बकाये का भुगतान कराया जाए. भुगतान में ब्याज राशि भी जोड़ी जाए.

6. उच्च, सामान्य व निम्न प्रभेद घोषित कर गन्ना की कीमत को कम निर्धारित करने का खेल बंद किया जाए. इस साल निम्न प्रभेद घोषित किए गए 2061 जैसे प्रभेदों को सामान्य प्रभेद घोषित किया जाए.

6. 6 से 8 प्रतिशत गन्ना की घटतौली कर गन्ना का वजन निर्धारित करने पर अविलंब रोक लगाई जाए. किसानों के सेस के पैसे से किसान संगठनों के नियंत्रण में धर्मकांटा की व्यवस्था की जाए.

7. गन्ना आच्छादित क्षेत्र की मापी, आपूर्ति चलान आदि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए.

8. छोटे-मध्यम किसानों की आपूर्ति चलान सबसे बाद में दिया जाता है, जिसके चलते गन्ना खेती उनपर काफी भारी पड़ती है, इस पर रोक लगाई जाए. उनके गन्ना पहले लेने की व्यवस्था की जाए.

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