73 साल बाद भी त्रयोदशी के आयोजन की ये परंपरा अनवरत जारी - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

73 साल बाद भी त्रयोदशी के आयोजन की ये परंपरा अनवरत जारी

tryodashi
श्योपुर. आज काेराेना गाइडलाइन काे देखते हुए 30 जनवरी 1948 को बापू की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियां 12 फरवरी 1948 को रामेश्वर त्रिवेणी संगम में ही विसर्जित करने का कार्यक्रम का दायरा सीमित रखा गया.इस बार 12 फरवरी को त्रिवेणी संगम तट पर बापू की आत्मशांति के लिए तर्पण देकर दुनिया काे महामारी से मुक्ति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गयी. सर्वधर्म प्रार्थना, विचार संगोष्ठी के बाद त्रयोदशी भंडारा किया गया. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948  के बाद उनकी अस्थियां और भस्म काे पूरे देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर विसर्जन किया गया था. उस वक्त एक अस्थि कलश जयपुर नरेश सवाई भवानी सिंह के नेतृत्व में 12 फरवरी 1948 को रामेश्वर धाम पर लाकर चंबल, बनास एवं सीप नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम में विसर्जित किया गया. तभी से संगम तट पर बापू की तेरहवीं मनाने की परंपरा निर्बाध निभाई जा रही है.सवाई माधोपुर के तत्कालीन विधायक श्रीदास गोयल, वीरेंद्र सिंह तथा श्योपुर के पूर्व विधायक सत्यभानु सिंह चौहान ने परंपरा काे आगे बढ़ाया. तभी से 12 फरवरी को मध्य प्रदेश व राजस्थान के गाँधीवादी यहाँ आते हैं और 'बापू स्मृति दिवस' के रूप में मनाते हैं.इस अवसर सर्वधर्म प्रार्थना सभा की जाती है.इस बार भी  'बापू स्मृति दिवस' के अवसर पर गांधीवादी श्योपुर जिले के मानपुर कस्बे के निकट रामेश्वर त्रिवेणी संगम पहुंचे.इस अवसर पर जिले के विधायक पूर्व विधायक सहित सभी पार्टियों के जनप्रतिनिधि एवं आम नागरिकों ने बापू सहित अनाम शहीदों व कोरोना महामारी से जो लोग हमलोगों को छोड़कर चले गये हैं उन सबको एक मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी. बता दें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और पुण्यतिथि तो देश भर में मनाई जाती है, लेकिन श्योपुर जिले में उनकी त्रयोदशी भी पूरी आस्था के साथ मनाई जाती है.मानपुर क्षेत्र के त्रिवेणी संगम रामेश्वर पर जहां, बापू की अस्थियां विसर्जित हुई थी. विशेष बात यह है कि 73 साल बाद भी त्रयोदशी के आयोजन की ये परंपरा अनवरत जारी है. तभी से यहां अनवरत रूप से हर वर्ष गांधीवाद नेताओं व उनके अनुयायियों का एकत्रीकरण होते हैं और त्रयोदशी मनाते हैं.त्रयोदशी के आयोजन के दौरान रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर श्योपुर जिले ही नहीं बल्कि राजस्थान के उस पार सवाईमाधोपुर जिले के गांधीवादी नेता भी शामिल होते हैं. गांधी विचार मंच के सचिव कैलाश पाराशर ने बताया कि महात्मा गांधी की त्रयोदशी पर  कलेक्टर और विधायक सहित राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि आए.इस कार्यक्रम में ग्वालियर चंबल संभाग के अलावा राजस्थान के सवाई माधाेपुर से गांधी के अनुयायी सैंकड़ाें की तादाद में सम्मिलित हुए. यहां के सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भाग लिये.बापू के प्रिय भजनों का गायन गाए और सुने भी साथ ही बापू की आत्मशांति के लिए पूजा पाठ का आयोजन शामिल हुए.

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