वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र की समीक्षा कृति लोकार्पित - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

रविवार, 14 फ़रवरी 2021

वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. कृष्णगोपाल मिश्र की समीक्षा कृति लोकार्पित

krishna-gopal-mishra
विगत छः दशकों से सतत साधनारत वरिष्ठ गीतकार डॉ. विनोद निगम के गीतों पर आधारित समीक्षा कृति ‘गीत यात्रा में निरंतर: डॉ विनोद निगम‘ का लोकार्पण एन.ई.एस कॉलेज के सभागार में पूर्व विधायक श्री गिरिजाशंकर शर्मा एवं प्रख्यात व्यंग्यकार श्री सुरेश उपाध्याय की उपस्थिति में संपन्न हुआ।  कार्यक्रम की अध्यक्षता भोपाल से पधारे वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र दीपक ने की। मुख्य अतिथि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री भवानी शंकर शर्मा और विशिष्ट अतिथि गजलकार श्री सुरेश पबरा ने अन्य अतिथियों के साथ मां शारदा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा कार्यक्रम आयोजक सप्तक मित्र समूह के सदस्यों ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। समीक्षा कृति के लोकार्पण से पूर्व नगर के वरिष्ठ कवि डॉक्टर संतोष व्यास ने ग्रंथ के लेखक डॉ कृष्णगोपाल मिश्र की साहित्य-साधना को रेखांकित करते हुए बताया कि यह डॉक्टर मित्र की 56वीं रचना है। इससे पूर्व उनके आठ काव्य-संग्रह, 8 प्रबंध-काव्य एवं 39 समीक्षा ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति-विभाग द्वारा संचालित साहित्य अकादमी के श्रीकृष्ण सरल सम्मान और आचार्य नंददुलारे वाजपेई आलोचना सम्मान से सम्मानित डॉ मिश्र के विस्तृत कृतित्व पर देश के अनेक विश्वविद्यालयों में विभिन्न उपाधियों के लिए 11 शोधप्रबंध स्वीकृत हो चुके हैं। इस नवीनतम समीक्षा ग्रंथ में उन्होंने विनोद निगम के गीतकाव्य की विस्तृत समीक्षा कर गीत समीक्षा को अभिनव उत्कर्ष दिया है। डॉ पुष्पा दुवे ने ग्रंथ की समीक्षा करते हुए डॉ. मिश्र को शुभकामनाएं दीं। डॉ मिश्र ने समीक्षा के वर्तमान परिदृश्य का विवेचन करते हुए रचनाकारों के प्रदेय को समीक्षा के माध्यम से प्रकाश में लाने की आवश्यकता बताई। मुख्यअतिथि श्री भवानीशंकर शर्मा ने गीतकार निगम के गीतों की चर्चा करते हुए इस समीक्षा ग्रंथ को बड़ी उपलब्धि बताया। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए श्री नरेंद्र दीपक ने कहा कि इस समीक्षा कृति में गीतों से संबंधित प्रत्येक पक्ष पर गंभीर शोधकार्य प्रस्तुत किया गया है। इसलिए गीत समीक्षा के क्षेत्र में यह कृति विशेष रुप से उल्लेखनीय है। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में सप्तक मित्र समूह द्वारा डॉ कृष्णगोपाल मिश्र को उनकी साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया गया तथा अतिथियों ने काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय गार्गव ने और आभार प्रदर्शन श्री कमलेश सक्सेना ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य डाॅ. ओ.एन. चौबे , संजय चौधरी, डाॅ. हंसा व्यास, डाॅ. नर्मदा प्रसाद सिसोदिया, गिरिमोहन गुरु, श्री अरुण शर्मा, श्री नित्यगोपाल कटारे आदि नगर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी, युवा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

कोई टिप्पणी नहीं: