बिहार : समीर परिमल जी ने अपनी कविता - " मेरे प्यारे वतन" पेश किया - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 26 मार्च 2021

बिहार : समीर परिमल जी ने अपनी कविता - " मेरे प्यारे वतन" पेश किया

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पटना। नाट्य संस्था - रंगम , पटना ( बिहार ) द्वारा बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन , कदमकुआं , पटना में " महफ़िलें - ए - रंग " ( कवि सम्मेलन ) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० अनिल सुलभ जी ने किया। इस मौके पर देश के कई चर्चित साहित्यकार , कवि , गायक एवं कलाकार उपस्थित थे। वरिष्ठ शायर श्री नसीम अख़्तर साहेब , डॉ० अनिल सुलभ जी , श्री समीर परिमल , श्री रमेश सिंह , श्री कुमार दिव्यम , पूर्णिमा देवी , युवा रणकर्मी & रंग निर्देशक रास राज़ जी एवं युवा कवियों ने अपनी - अपनी कवितायों से " महफ़िलें - ए - रंग " को सजाया। श्री U , ए दुलारे वतन , जान तुझ पर लुटाए मज़ा आ गया " सुनाया एवं मो० नसीम अख्तर साहेब ने - " देखो तो फ़क़त रंग का त्योहार है होली , सोचो तो मुहब्बत है , वफ़ा प्यार है होली " सुनाया एवं कई युवा कवियों ने " महफ़िलें - ए - रंग " में अपनी - अपनी कवितायों से दर्शकों को खूब हँसाया और झुमाया और कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया। रंगम , पटना ( बिहार ) के वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंच से घोषणा किया कि सांस्कृतिक रंग संस्था - रंगम , पटना ( बिहार ) द्वारा प्रतिवर्ष युवा कवियों के प्रोत्साहन हेतू 2 कवि सम्मेलन कराया जायेगा। एक कवि सम्मेलन ( जेनरल ) कराया जायेगा और दूसरा कवि सम्मेलन ( प्रतियोगिता ) के रूप में कराया जायेगा। जिसमे प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार में ( प्रतीक चिन्ह , प्रमाण पत्र , नगद पुरस्कार ) शामिल होगा। कार्यक्रम के अंत मे सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया और युवा कवियों को प्रमाण पत्र दिया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक युवा कवि अश्विनी कविराज एवं युवा रंगकर्मी & रंग निर्देशक रास राज़ जी थे।

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