मधुबनी : प्रलेस ने किया काव्यगोष्ठी का आयोजन - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 2 मार्च 2021

मधुबनी : प्रलेस ने किया काव्यगोष्ठी का आयोजन

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मधुबनी (आर्यावर्त संवाददाता) मधुबनी ज़िला प्रगतिशील लेखक संघ(प्रलेस) के तत्त्वावधान में दिनांक28.02.2021 की संध्या 4:30 बजे से केंद्रीय पुस्तकालय मधुबनी के सभागार में श्री प्रीतम कुमार निषाद की अध्यक्षता में काव्यगोष्ठी आरम्भ हुई। गोष्ठी में सर्वप्रथम प्रलेस के प्रधान सचिव अरविन्द प्रसाद ने कोरोना के आपत्काल के लंबे अंतराल के बाद नये वर्ष के आरंभ और ऋतुराज वसन्त के पदार्पण के साथ आहूत इस आयोजन में सभी उपस्थित कवियों/साहित्यकारों का स्वागत किया। श्री उमेश लाल कर्ण"कल्पकवि" नेअपनी कविता"शिक्षा का अवमूल्यन" के द्वारा बिहार और भारत की शिक्षा की वर्तमान दुरवस्था पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए जनता को इसके प्रति सावधान  होने का आह्वान किया। कवि जयबोध झा ने अपनी कविता -"युवती"  द्वारा नारी के भव्य सौंदर्य और उसकी दारुण सामाजिक विवशता का मनोहारी चित्रांकन किया। डॉ विजयशंकर पासवान की कविता-"सीमित-असीमित" की आरंभिक पंक्तियों---"भोरक सीमा दुपहर, दुपहरक सीमा सांझ, साँझक सीमा राति आ रातिक सीमा भोर" ने लोगों की भरपूर तालियाँ बटोरीं। दिलीप कुमार झा की कविता -"पानि आ  मोन" में कवि द्वारा पानी के ढलान की ओर प्रवाह और मन के ऊपर की ओर उड़ान की स्वाभाविकता के सहज वर्णन ने लोगों का मन मोह लिया। कवि प्रीतम कुमार निषाद की कविता "ओ के छथिन्ह" की  पंक्तियाँ--"ओ के छथिन्ह कने चिन्ह तs दिअ" ने लोगों के पहचानने की कवि की जिज्ञासा का मनोहारी भाव प्रदर्शन किया। अरविन्द प्रसाद की कविता "छोटकी ननदि" की  पंक्तियाँ --"हमर छोटकी ननदि चमचिकनी चुगलपन नै छोड़ै छै।तिलबिखनी ओ तेहने उकट्ठी उकठपन नै छोड़ै छै।।" की आरंभिक पंक्तियों ने जहाँ लोगों के दिलों को गुदगुदाया; वहीं अंतिम पंक्तियों --" देखैत देखैत हमरो जे देखल नै जेतै, हुनका पटा' ई प्लान सेट हेतै। अहाँक दियोर अपन खुरलुच्चा भाइ सँ चमचिकनो के ब्याहि क' सैंत हम देबै।" ने लोगों को ठहाके लगाने को मजबूर कर दिया। समीक्षा प्रीतम कुमार निषाद ने ,धन्यवाद ज्ञापन संरक्षक सुखदेव राउत जी ने तथा आभार प्रदर्शन सचिव श्रीप्रसाद ने किया।

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