झारखण्ड : ट्राइबल राइट एक्टिविस्ट हैं फादर स्टेन स्वामी - Live Aaryaavart

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शनिवार, 3 अप्रैल 2021

झारखण्ड : ट्राइबल राइट एक्टिविस्ट हैं फादर स्टेन स्वामी

  • *173 दिनों से होली और होली वीक के अवसर पर  तलोजा जेल में कैद हैं फादर स्टेन
  • * सरकारी रवैया के फादर को अपना 84 वां जन्मदिन 26 अप्रैल को जेल में ही मनाना पड़ जाएंगा
  • * 08 अक्टूबर 2020 से फादर जेल में हैं 
  • * फादर को बाइज्जत बरी करने की मांग 

sten-swami
रांची. एल्गार परिषद-माओवादी (Elgar Parishad) संबंधों के आरोप में गिरफ्तार और तलोजा जेल में बंद आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को ‘सिपर’ और अन्य सुविधाएं गिरफ्तारी के दूसरे दिन से मुहैया कराई जा रही है. यह बात रविवार को जेल के वरिष्ठ अधिकारी ने कही. उल्लेखनीय है कि 83 वर्षीय स्वामी पार्किंसन (Parkinson) सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्हें गुरूवार आठ अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं.


कौन है स्टेन स्वामी?

स्टेन स्वामी को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है. झारखण्ड में चल रहे जल, जंगल जमीन, विस्थापन जैसे आंदोलन को उन्होंने बौद्धिक समर्थन दिया.फादर स्टेन स्वामी 60 के दशक में तमिलनाडु के त्रिचि से झारखण्ड़ पादरी बनने आये थे. थियोलॉजी (धार्मिक शिक्षा) पूरी करने के बाद वह पुरोहित बने.लेकिन ईश्वर की सेवा करने के बजाय उन्होंने आदिवासियों और वंचितों के साथ रहना चुना.लेकिन कुछ संदिग्ध गतिविधियों के कारण स्टेन स्वामी पूरे देश मे चर्चा में आ गए.


क्या है पूरा मामला?

कोरेगांव-भीमा गांव में 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था.कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया था.एल्गार परिषद के सम्मेलन के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी.भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे.इस हिंसा में माओवादी कनेक्शन भी सामने आया था.महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था. इसमें राव, स्वामी और कई अन्य कार्यकर्ता शामिल है.


जमशेदपुर धर्मप्रांत के जेसुइट प्रीस्ट हैं

ट्राइबल राइट एक्टिविस्ट फादर का पूरा नाम है फादर स्तानिस्लाउस लूर्दस्वामी.ये येसु समाज के सदस्य हैं.उनका जन्म 26 अप्रैल 1937 को तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु में हुआ है.उन्होंने कहा कि उक्त आयोजन में नहीं गया था और न ही माआेवादी संगठनों से दूर दूर तक का रिश्ता नहीं है.मैं लोकनायक जयप्रकाश  नारायण द्वारा निर्मित पीयूसीएल का सदस्य रहा हूं.झारखंड में सरकारी महकम्मा से विफलता की ओर जाती योजनाओं से लोगों को लाभ पहुंचाने का काम किया है.

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