बिहार : बिना किंतु-परंतु के सबके लिए मुफ्त में टीकाकरण की गारंटी हो : कुणाल - Live Aaryaavart

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बुधवार, 28 अप्रैल 2021

बिहार : बिना किंतु-परंतु के सबके लिए मुफ्त में टीकाकरण की गारंटी हो : कुणाल

  • सरकार की अदूरदर्शिता व जनविरोधी नीतियों के कारण आॅक्सीजन की उपलब्धता संकटग्रस्त
  • आॅक्सीजन की कमी नहीं, बल्कि उसके सप्लाई व स्टोर तंत्र की है बुनियादी समस्या.
  • सरकार की गलत स्वास्थ्य नीतियों का ही परिणाम है कि डाॅक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को झेलने पड़ रहे हमले.
  • माले के मांग दिवस के तहत पूरे राज्य में कार्यकर्ताओं ने किया पोस्टर प्रदर्शनी

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पटना 28 अप्रैल, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि हमारा देश आॅक्सीजन उत्पादक देशों की अगली कतार में है, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार की अदूरदर्शिता व जनविरोधी नीतियों के कारण मरीजों के लिए आॅक्सीजन की उपलब्धता संकट में फंस गया है. सरकार ने आॅक्सीजन की सप्लाई व स्टोर के लिए किसी भी प्रकार का तंत्र बनाया ही नहीं है. यदि सरकार यह तंत्र नहीं बना सकती तो फिलहाल उसे आॅक्सीजन की सप्लाई करने वाले सामानों को आयातित करना चाहिए और समस्या का निवारण करना चाहिए. भाकपा-माले द्वारा आज बेड की व्यापक व्यवस्था, निजी सहित तमाम अस्पतालों के 50 प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित करने, अस्थाई अस्पताल खोलने आदि मांगों पर आयोजित मांग दिवस के तहत राज्य कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर माले राज्य सचिव ने उक्त बातें कही. कार्यक्रम में पार्टी नेता बृजबिहारी पांडेय, प्रदीप झा, विभा गुप्ता व प्रकाश कुमार भी शामिल हुए.


उन्होंने डाॅक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों पर लगातार हो रहे हमले की कड़ी निंदा की. कहा कि यदि अस्पतालों में मरीजों को बेड अथवा आॅक्सीजन नहीं मिल रहा है, तो इसके लिए उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता है. बड़े पैमाने पर डाॅक्टर व स्वास्थ्यकर्मी भी कोविड की चपेट में आ रहे हैं और उनकी मौतें भी हो रही हैं. आधारभूत व मानव संसाधनों की व्यवस्था करना सरकार का काम है, लेकिन इसके प्रति सरकार थोड़ा भी चिंतित नहीं है. कहा कि इंडियन मेडिकल कमीशन ने साफ तौर पर कहा कि जो पीजी के स्टूडेंट को प्रमोट कर दिया जाए तो वे रेजीडेंट के रूप में डाॅक्टरों की आ रही समस्या को हल कर सकते हैं. टेक्नीशियनों की बहाली पर भी सरकार चुप है. देहात में चिकित्सा से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देकर इस कार्य में उन्हें लगाया जा सकता है. डाॅक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों का बड़ा सुरक्षित पुल होना चाहिए, ताकि उनके बीमार पड़ने पर अस्पतालों में डाॅक्टर व कर्मियों की तत्काल बहाली की जा सके. ये सारी चीजें लैक कर रही हैं और वे डाॅक्टरों की दुर्भाग्यपूर्ण पिटाई के रूप में सामने आ रही है. जनता से हमारी अपील है कि वे इस तरह के कदमों से बचें और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करें. आगे कहा कि सबके लिए टीका की व्यवस्था होनी चाहिए. हमारा देश कुछ रेयर किस्म की चीजें उत्पादित करता है, जो आज अमेरिका को भी सप्लाई कर रहा है. लेकिन हमारे पास टीका रखने के लिए शीशी तक नहीं है. जिसके कारण समस्या गंभीर हो चुकी है. अन्यथा बहुत आसानी से पूरे देश में टीकाकरण हो सकता था. सुशील मोदी के उस ट्वीट की निंदा करते हुए कहा कि जिसमें उन्होंने कहा है कि टीका के लिए एक न्यूनतम कीमत तय की जानी चाहिए. कहा कि यह सब गरीबों के नाम पर उन्हें ही परेशान करने के लिए किया जा रहा है. हमने सरकार की पिछली योजनाओं का हश्र देखा है कि किस प्रकार कागजात की डिमांड करके गरीबों के लिए परेशानी खड़ी की जाती रही है. इसलिए हमारी मांग है कि बिना किसी किंतु-परंतु के गरीब तबके सहित सभी लोगों को मुफ्त में टीका उपलब्ध करवाया जाए. आज के मांग दिवस के तहत किसान सभा कार्यालय में अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, वरिष्ठ माले नेता केडी यादव, अविनाश कुमार, ऐक्टू नेता आर एन ठाकुर, जितेंद्र कुमार आदि ने भी पोस्टर प्रदर्शन किया. दरभंगा, सिवान, अरवल, गोपालगंज, नालंदा, गया, नवादा, आरा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, भागलपुर, फतुहा आदि जगहों पर भी माले कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों से कोविड के नियमों का पालन करते हुए मांग दिवस में अपनी भागीदारी निभाई.

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