मधुबनी : माले कार्यकर्ताओं ने मनाया नक्सलबाड़ी दिवस। - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

मंगलवार, 25 मई 2021

मधुबनी : माले कार्यकर्ताओं ने मनाया नक्सलबाड़ी दिवस।

  • 25 मई 1967 से बर्ष 2021 तक का 54 बर्षो का सफर।
  • बिनाशकारी मोदी सरकार और कोविड नरसंहार के खिलाफ संघर्ष में नक्सलबाड़ी की क्रांतिकारी भावना को बूलंद करने का दिया नारा# ध्रुब कर्ण।

cpi-ml-celebrate-naxalbadi-diwas
मालेनगर/मधुबनी। मालेनगर अबस्थित भाकपा-माले के जिला कार्यालय में नक्सलबाड़ी दिवस को माले कार्यकर्ताओं ने मनाया। नक्सलबाड़ी आंदोलन के शहिदों को श्रद्धांजलि देते हुए,बिनाशकारी मोदी सरकार और कोविड नरसंहार के खिलाफ लड़ाई में नक्सलबाड़ी की क्रांतिकारी भावना को बूलंद करने का संकल्प लिया। माले नेता बिशंम्भर कामत की अध्यक्षता में संचालित नक्सलबाड़ी दिवस को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के जिला सचिव ध्रुब नारायण कर्ण ने कहा कि 1967 में कांग्रेसी कुशासन में जनता का संकट चरम पर चला गया था और सरकार बेनकाब हो गई थी। जनता कांग्रेसी शासन से उब गई थी। ऐसे ही समय में नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन बशंत का बज्रनाद बनकर समूचे देश में आशा का संचार किया और देखते ही देखते गरीब व बंचित जनता के बीच संपूर्ण भारत में फैल  गया । जनता का स्वार्थ ही पार्टी का स्वार्थ है, नक्सलबाड़ी आंदोलन की उद्घोषणा बन कर उभरी। शासक वर्ग के भयंकर दमन का मुकाबला करते हुए कामरेड चारु मजूमदार की अगुवाई में भाकपा ( माले) का गठन 22 अप्रैल 1969 को हुआ। इसके प्रथम व संस्थापक महासचिव कामरेड चारू मजूमदार चुने गए। माले को ध्वस्त करने के लिए शासक समूहों ने नृशंस दमन ढाया। इसके बाबजूद माले का कारवां उतार चढ़ाव से गुजरते हुए आगे बढ़ते चला गया, जो लगातार अब बढ़ते जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज 2021 में भी जनता का संकट चरम पर है। कोविड महामारी ने लाखों भारतीयों का जान ले लिया है। और यह बास्तव में बिनाशकारी मोदी सरकार के निती और लापरवाही से लाखों लाख लोगों का नर संहार हो रहा है। अब मोदी सरकार का नर संहारी कुशासन बेनकाब हो गया है। जनता इसके  खिलाफ खासकर कोविड नरसंहार, देश बेचू और साम्प्रदायिक फासीवादी कार्यशैली के खिलाफ खड़ा हो गया है।ऐसे जन संहारी निजाम से मुक्ति चाहती है। ऐसे समय में नक्सलबाड़ी आंदोलन की क्रांतिकारी भावना को बूलंद व मजबूत करने और संकट में पड़ी जनता की सेवा करने एवं उसके आंदोलनों की अगुवाई करने का संकल्प लेना है। नक्सलबाड़ी दिवस को किसान महासभा के जिला सचिव प्रेम कुमार झा, रहिका प्रखंड माले सचिव अनिल कुमार सिंह, राजनगर प्रखंड माले सचिव दानी लाल यादव ने संबोधित किया। जबकि माले कार्यकर्ता राम नारायण ठाकुर,शैनी साह,जय नारायण साह, शंभू साह, संजय यादव,चौठी साह सहित एक दर्जन कामरेडों ने भाग लिया।

कोई टिप्पणी नहीं: