बिहार : इंसान एक एक साँस लेने को मोहताज : अमिता भूषण - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 14 मई 2021

बिहार : इंसान एक एक साँस लेने को मोहताज : अमिता भूषण

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पटना,14 मई। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता  श्रीमती अमिता भूषण ने कहा है कि कोई भी लोक कल्याणकारी सरकार लोकहित की प्राथमिकताओं से चलती है। मगर बिहार सरकार की  अपनी ही प्राथमिकताएं है। हमेशा की तरह ही थोड़ी अलग जिसका लोक कल्याण से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है ।  उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में जब इंसान एक एक साँस का मोहताज है, अस्पताल में पटे पड़े हुए हैं, मां गंगा की लहरें लाशों को ठिकाने लगाने का जरिया बना हुआ है ,कथित सुशासन बाबू की सरकार इन विपरीत परिस्थितियों से निपटने के उपाय की जगह गिरफ्तारी गिरफ्तारी का खेल खेल रही है। तत्काल इस खेल के केंद्र बिंदु में पूर्व सांसद पप्पू यादव जी बने हुए हैं। खेल ऐसा की जहां खेलने वाली दोनों ही टीमें विजेता है और हार दर्शक रहा है।  उन्होंने कहा कि सरकार जहां अपनी नाकामी छुपाने और उस पर पर्दा डालने में सफल होती दिख रही है वहीं पूर्व सांसद महोदय हर बार की भांति अपने स्टाइल की राजनीति को स्थापित करते हुए एकमात्र मसीहा के रूप में खुद को साबित करने में सफल हो रहे हैं। बस बिहार की जनता इन तमाम नौटंकियों के बीच बेड, ऑक्सीजन, दवाइयों और चिकित्सकों की कमी से अकेले जूझने को मजबूर है।सरकार कह रही है कि कानून के दायरे में ये गिरफ्तारी हुई है। पर सवाल यह है कि जिस मुकदमे का हवाला देकर इन्हें गिरफ्तार किया गया है वो मामला 32 साल पुराना है। फिर ये सरकार पिछले 17 सालों से किस icu में थी जो उन्हें अब तक गिरफ्तार नही कर पाई थी।  उन्होंने कहा कि जिस रूढी साहब ने अपने घर को महामारी में एम्बुलेंस छुपाने का शेल्टर बना रखा है उनपर महामारी एक्ट के अनुसार त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी क्यों नही हुआ। एक तरफ जहां अदालतें पुलिस को बिना किसी गंभीरतम अपराध के गिरफ्तारी से परहेज का आदेश दे रही है वहां क्या पप्पू यादव जी का अपराध उस गंभीरतम की सीमा से भी ऊपर है।  बात घुमफिरकर प्राथमिकताओं पर ही आती है। सरकार को पता है कि नए भारत में लोक कल्याण से वोटों की फसल नही उगती। इसलिये उसने अपनी प्राथमिकताएं बदल दी है। सरकार अब घाव भरने के लिए नही घाव छुपाने के लिए चलाई जा रही है। और पिछले 15 सालों में नीतीश जी ने भाजपा के सानिध्य में छुपाने की इस कला का भरपूर विकास किया है।  गिरफ्तारी का यह प्रकरण इस कला का बेहतरीन उदाहरण है। पप्पू यादव जी अच्छे हैं, बुरे हैं इसका फैसला तो भविष्य में होगा पर जिन विपरीत परिस्थितियों में इनको गिरफ्तार किया गया है उसने आमजनमानस का लोकतंत्र पर भरोसा थोड़ा और कम किया है।

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