अनुग्रह बाबू के समय में शिखर पर था बिहार : राज्यपाल - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 18 जून 2021

अनुग्रह बाबू के समय में शिखर पर था बिहार : राज्यपाल

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पटना: बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को ए.एन.कॉलेज में अनुग्रह जयंती सह स्थापना दिवस समारोह का आयोजन जूम ऐप के माध्यम से किया गया। राज्यपाल सह बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति फागू चौहान इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। वहीं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलाधिपति फागू चौहान ने कहा कि अनुग्रह बाबू एक लोकप्रिय राजनेता थे। वे अपने छात्र जीवन से ही देश की सेवा के लिए तत्पर रहे। बिहार के शासन को संभालते हुए उन्होंने राज्य हित में कई प्रमुख कार्य किए। उनके लिए बिहार एक प्रयोगशाला था। महात्मा गांधी द्वारा दिए गए सभी दायित्वों का अनुग्रह बाबू ने सफलतापूर्वक निर्वहन किया। मंत्री रहते हुए सभी विभागों का कुशल संचालन किया तथा विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार भी किया। उनके कार्यकाल में राजस्व विकास में बिहार देश में अव्वल था। वह नैतिक मूल्यों के राजनेता थे तथा बिहार के विकास हेतु सदैव तत्पर रहते थे। महामहिम राज्यपाल ने कहा कि हमारा प्रयास है की बिहार की शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण हो। शिक्षकों की भर्ती हेतु राज्य सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से यह अपेक्षा है कि वह ईमानदारी और निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। यह हमारा दायित्व है कि हम अनुग्रह बाबू के बताए मार्ग पर चलें। वहीं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज श्रद्धेय डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह जी की 134वीं जयंती है। इस महाविद्यालय के लिए परम सौभाग्य का दिन है। अनुग्रह बाबू युगद्रष्टा और सृजनकर्ता थे। उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। सभी दानों में विद्या दान सर्वश्रेष्ठ दान होता है। इस क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य हम सभी पर ऋण है। हम इस ऋण से तभी मुक्त हो सकते हैं ,जब उनके द्वारा निर्मित शिक्षण संस्थानों की स्थापना के उद्देश्यों को हम सब ईमानदारी और कड़ी मेहनत से साकार कर सकें। कुलपति महोदय ने कहा कि अनुग्रह बाबू के कार्य चरैवेति चरैवेति के दर्शन से प्रभावित था।सूर्य की तरह बिना रूके, बिना थके सतत चलते रहना। बिना किसी भेदभाव के सूर्य अपने प्रकाश से एकसमान सब को आलोकित करता है।आज के शिक्षकों का यही धर्म होना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में गहन अध्ययन के माध्यम से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।कुलपति ने ए.एन. कॉलेज को लगातार तीन बार नैक में ए ग्रेड तथा सीपीई स्टेटस प्राप्त करने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय को ऑटोनॉमस हेतु प्रयास करना चाहिए। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से हर संभव मदद प्रदान की जाएगी।


अनुग्रह जयंती समारोह में भाग लेते शिक्षकगण

इस मौके महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. एस.पी. शाही ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय अनुग्रह बाबू और सत्येंद्र बाबू के आशीर्वाद से लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है। कोरोना संक्रमण के समय में महाविद्यालय की आइक्यूएसी की टीम तथा सभी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के प्रयास से अकादमिक गतिविधियां अनवरत जारी है। विद्यार्थियों के लिए स्टूडेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम, क्विज, कोर्सएरा, आईआईआरएस-इसरो के कोर्सेज विद्यार्थी हित में चलाए जा रहे हैं। इस मौके पर महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अनुग्रह ज्योति’ का भी विमोचन किया गया। पत्रिका की संपादक डॉ. रत्ना अमृत ने कहा कि बिहार विभूति डॉ अनुग्रह नारायण सिंह के भावों, विचारों और अनुभूतियों को अनुग्रह ज्योति पत्रिका प्रतिबिंबित करती है।यह सामाजिक और शैक्षणिक ज्योति को आलोकित करती है। इस पत्रिका में महाविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के मूल्यवान विचार, उनके आलेख और उनकी कविताएं प्रकाशित हुई हैं। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. कलानाथ मिश्र ने किया। महाविद्यालय आईक्यूएसी के समन्वयक डॉ अरुण कुमार ने लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर रूसा के उपाध्यक्ष डॉ कामेश्वर झा उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा कुमारी, प्रो. तपन शांडिल्य, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य, महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, विद्यार्थीगण तथा कर्मचारी समारोह में शामिल रहे।

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