बिहार : मंथन ने गरीब परिवारों के बीच कोविड राहत किट बांटी - Live Aaryaavart

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रविवार, 27 जून 2021

बिहार : मंथन ने गरीब परिवारों के बीच कोविड राहत किट बांटी

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पटना. विश्व विख्यात जेसुइट के पटना प्रोविंश के प्रोविंशिएल हैं फादर डोनाल्ड मिरांडा.उन्होंने समाज के किनारे ठहर गये मुसहर समुदाय के बीच कोरोना काल में राहत पहुंचाने की खुली छूट दे रखी है.इसके आलोक में गैर सरकारी संस्था 'मंथन' ने 650 गरीब परिवारों के बीच कोविड राहत किट बांटी. गैर सरकारी संस्था 'मंथन' के निदेशक फादर जूनो सेबेस्टियन ने 'जनादेश' को बताया कि दानापुर, फुलवारीशरीफ और बिहटा के मुसहर बस्तियों में सर्वे किया गया.उन्होंने कहा कि अव्वल इस बार मंथन ने उन लोगों तक पहुंचने का विशेष प्रयास किया है जो बीमार और ऐसे लोगों की मदद करने वाला कोई नहीं है.फादर जूनो ने आगे कहा कि हमने अपने वितरण के लिए ज्यादातर मुसहर बस्तियों पर ध्यान केंद्रित किया है. हम अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दानापुर, फुलवारीशरीफ और बिहटा ब्लॉक में जरूरतमंद मांझी परिवारों तक पहुंचने में उदार मदद के लिए धन्यवाद देते हैं.  बताया जाता है पटना जेसुइट सोसाइटी (पीजेएस) के एक गैर सरकारी संस्था 'मंथन' है. मंथन ने शनिवार 26 जून को पटना जिले के तीन ब्लॉकों में 650 गरीब परिवारों को कोविड -19 राहत किट वितरित किए.मंथन के निदेशक फादर जूनो सेबेस्टियन ने यह भी कहा कि दानापुर, फुलवारीशरीफ और बिहटा के मुसहर बस्तियों में लगभग 4300 लोगों को राहत किट सौंपी गई, जिसमें चावल, दाल, गेहूं का आटा, खाद्य तेल, मास्क, साबुन और डिटर्जेंट पाउडर शामिल थे. उन्होंने कहा कि इस बार मंथन ने सही लोगों तक पहुंचकर राहत किट सौंपी.मंथन दानापुर, फुलवारीशरीफ और बिहटा प्रखंड के 70 से अधिक मुसहर गांवों में काम कर रहा है. इन गांवों में 90% से अधिक मुसहर दैनिक मजदूर हैं.दैनिक मजदूरी से ही परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं.दैनिक मजदूरों की आजीविका है,निर्माण कार्य, सड़कों की सफाई और रद्दी कागज चुनने आदि का है.इन लोगों को मनरेगा में मन नहीं लगता है. कस्बों के पास ही काम खोजकप कार्य करते हैं. इसके पूर्व सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (एसएक्ससीएमटी), पटना के द्वारा गरीबों और कमजोर लोगों के बीच में कोरोना वायरस लॉकडाउन अवधि के दौरान हजारों गरीब लोगों, विशेष रूप से दलित समुदायों में सबसे अधिक वंचित लोगों के लिए भोजन उपलब्ध कराया गया.इलाके के करीब 530 परिवारों को खाना बांटने में लगा रहा.

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