सेंचुरी के श्रमिकों का संघर्ष नये मोड़ पर ! क्या सेंचुरी की बिक्री वैध है ? - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 22 जुलाई 2021

सेंचुरी के श्रमिकों का संघर्ष नये मोड़ पर ! क्या सेंचुरी की बिक्री वैध है ?

  • वर्षों से कंपनी से आवंटित आवास से हटाने की साजिश अवैध !

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सेंचुरी के श्रमिकों का सत्याग्रही संघर्ष 1375 दिन पूरा कर चुका है। आज भी सैकड़ों श्रमिक और महिलाएं, साथ में युवा, और बच्चों ने, अपना संकल्प रोजगार के पक्ष में ही रखकर, गीतो, नारो, वक्तव्यो से आसमान तक गूंज उठायी है। इस बीचमंजीत ग्लोबल ने सेंचुरी कंपनी को खरीद कर पूरी संपत्ति 62 करोड रुपए में अपने कब्जे में लेने का दावा किया है। श्रमिकों में से 873 श्रमिक और कर्मचारी मिलकर VRS नकार चुके हैं, उन्हें उनके आवाज से दूर रखने और निकालने की साजिश मनजीत ग्लोबल कंपनी करती रही है। जिन श्रमिकों के पास उसी मकान के आधार पर मतदान कार्ड, आधार कार्ड, आदी बने हुए हैं, जिन्हें नोटिस देकर, 'मकान खाली करने बाद आपकी कानूनन बची हुई राशि दी जाएंगी ' यह चेतावनी नोटिस चस्पा कर चुके है! उन्हें भी अपने घर तक पहुंचनेसे बाउंसरो से रुकवा कर अन्यायपूर्ण ही नहीं गैर कानूनी कार्य भी हो रहा है। श्रमिकों ने अपनी ताकत भी लगायी, प्रशासकों से संवाद भी किया। लेकिन प्रशासकों की बात भी पूरी तरह न माननेवाले मनजीत कंपनी के नुमाइदे, बाल बच्चों तक भी, रात 10 बजे तक कंपनी की ओर से हेरान किया गया - आखिर कईयों को अंदर प्रवेश दिया गया।

    

विशेष बात यह कि VRS स्वीकारने वाले करीबन 30 कर्मचारी आज भी कंपनी के क्वाटर्स निवास कर रहे हैं। सत्राटी गांव के सरपंच श्री मोर्य भी VRS लेने के बावजूद कॉलोनी में अपने मकान में कब्जा किये हुए है। लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने के बाद भी सवाल ना करते हुए अन्य परिवारों के विवाद के सुलझाव के बिना,सामान से भरा हुआ निवास उनसे एक प्रकार से छीनना विनाधार,अन्याय हैं। मनजीत ग्लोबल प्रा.लि. और मनजीत कॉटन प्रा.लि. कंपनियों ने सेंचुरी मैनेजमेन्ट से जो कंपनिया खरीदी हैं,उनकी संपत्ति, उसका मूल्यांकन, शासन में भुगतान किया शुल्क आदि का ब्यौरा श्रमिको के समक्ष प्रस्तुत न  करते हुए बिक्री की गई। 1/- रुपये में दोनों मिल्स श्रमिको की संस्थाका देकर चलाने देने का वायदा, चार यूनियन्स के 4 श्रमिक पदाधिकारियों एक पत्र के आधार पर, जिसमें उन्होंने VRS की मांग की ,(जिसमे एक फर्जी हस्ताक्षर भी है ) वापस लिया। 90% श्रमिको की मांग पर जनतांत्रिक भूमिका लेने की विनंती, रोजगार का महत्व आदी काफी समझाजाने पर भी न मानने  वाले चन्द 'नेता' ओने श्रमिको को मालिक बनाने ली संभावना, में रोजगार का अधिकार पाने में अड़ंगा लगाया।फिर भी न्यायालयीन आदेशो के ही कारण मिल्स अवैध रुपये 3.5 साल तक बंद रखने वाले सेंचुरी मैनेजमेंट को 1000 श्रमिको व और कर्मचारियों को हर महीना 1.5 करोड़ रुपए वेतन देना पड़ा। लेकिन मिल्स बंद करने के लिए किसी भी कंपनी को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत जो कानूनी प्रक्रिया चलानी पड़ती है, उसका पालन बिल्कुल नहीं किया। इस स्थिति में वादाखिलाफी करते हुए सेंचुरी ने 'मनजीत ग्लोबल को मिल्स बेची गरी है, सेंचुरी का अस्तित्व खत्म हुआ है ' यह घोषणा करते हुए सेंचुरी केपस का कब्जा ले रखा है। सवाल उठाने पर, मनजीत ग्लोबल के प्रतिनिधि श्री परमजीत सिंह राजपाल को गेट के बाहर रजिस्ट्री हमें दिखानी पड़ी। उसमें भी बहुत नाट्यपूर्णता रहि -कोइ प्रति हमें दी गयी, नहीं पूरी सच्चाई पेश की।


आज भी श्रमिक जनता संघ के सवाल है-

* क्या सेंचुरी पूरी जमीन औऱ संपदा, मनजीत ग्लोबल और मनजीत कॉटन को बेची है ।

* क्या संपत्ति का मूल्यांकन सही रूप से, शासकिय रेट से किया गया है ।

* क्या स्टैम्प ड्यूटी पूर्ण रूप से भुगतान की गयी है ।

* क्या इस संपत्ति का अधिपत्य सेंचुरी ने नयी कंपनी ने पाया हैं ?

वेयरइट ग्लोबल के साथ फर्जी बिक्री नामा करने वाली सेंचुरी कंपनी ने हर साल 350 से 700 करोड़ तक नगद मुनाफा कमाने वाली सेंचुरी टेक्सटाइल & इंडस्ट्रीज लि. ने फिर से फर्जीवाडा किया है?

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