रांची : फादर स्टेन स्वामी का अंतिम संस्कार संपन्न - Live Aaryaavart

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बुधवार, 7 जुलाई 2021

रांची : फादर स्टेन स्वामी का अंतिम संस्कार संपन्न

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रांची। मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की संस्थागत मृत्यु के बाद देश-विदेश-प्रदेश में व्यापक प्रतिक्रिया हो रही है।वहीं भारतीय कलीसिया की संवेदना मिल रही है।84 वर्षीय बीमार अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी ने 5 जुलाई को मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां उनका कोविड -19 का इलाज चल रहा था। फादर स्वामी 64 साल तक जेसुइट धर्म समाज के सदस्य और 51 साल पुरोहित रहे। उनके जाने से पूरी भारतीय कलीसिया दुखित है।इसी माहौल में फादर का पार्थिव शरीर को रखकर मिस्सा किया।तीन मुख्य पुरोहितों में फादर जोसेफ जेवियर और फ्रेजर मस्कारेनहास भी थे. पूर्वी भारत के झारखंड राज्य में आदिवासियों और हाशिए के लोगों के अधिकारों की पैरवी कर रहे 84 वर्षीय भारतीय जेसुइट प्रिस्ट फादर स्टेन स्वामी का सोमवार को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के बांद्रा के होली फामिली अस्पताल में दोपहर 1.30 बजे अंतिम सांस ली, जहां उन्हें एक महीने पहले इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। फादर स्टेन स्वामी का अंतिम संस्कार पवित्र मिस्सा समारोह बांद्रा के संत पेत्रुस गिरजाघर में भारतीय समय शाम के अनुसार 4 बजे से शुरू किया गया। पवित्र मिस्सा को ऑनलाइन प्रसारित किया।  मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओस्वाल्ड ग्रेसियस ने शोक संदेश प्रेषित किये थे। मुम्बई में उनकी दाह संस्कार किया गया और पवित्र अवशेष को राँची और जमशेदपुर लाया जाएगा। बॉम्बे के कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस ने एक संक्षिप्त बयान में लिखा, "हमें फादर स्टेन स्वामी के निधन पर गहरा दुख हुआ है। हम फादर स्टेन के जीवन और गरीब आदिवासियों एवं उनके संघर्षों के प्रति फादर की प्रतिबद्धता के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।"  भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) के अध्यक्ष कार्डिनल ने कहा, "फादर स्टेन की गिरफ्तारी बहुत दर्दनाक थी। भारतीय आपराधिक कानून के तहत, दोषी साबित होने तक कोई भी निर्दोष है। मामले की सुनवाई भी नहीं हो सकी। हम बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि मामले को उठाया जाए और सच्चाई सामने आए।" कार्डिनल ग्रेसियस ने अपने बयान में कहा कि "फादर स्टेन ने वंचितों और दलितों के लिए अथक प्रयास किया, जिससे उन्हें गरिमा और उत्थान की भावना मिले। ” सीबीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फादर स्टेन के "शोषित आदिवासियों के प्रति समर्पण" को देखा है। "इस काम की अपनी चुनौतियाँ थीं, लेकिन फादर स्टेन ने गरीबों के लिए एकचित्त होकर काम किया।" उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी और उनका नाम सभी आपराधिक साजिशों से बरी हो जाएगा।


रांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो और सहायक धर्माध्यक्ष थियोडोर मस्कारेनहास द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया कि रांची महाधर्मप्रांत, जहां फादर स्वामी ने अपनी सेवा दी,  उन्हें "आदिवासी अधिकारों के चैंपियन, न्याय के लिए एक सेनानी और साहस के प्रतीक" के रूप में सम्मानित किया। "तथ्य यह है कि पार्किंसंस रोग से पीड़ित इस बीमार व्यक्ति को 84 वर्ष की आयु में गिरफ्तार किया गया था, 7 महीने से अधिक समय तक जमानत से इनकार कर दिया, यहां तक ​​कि एक सिपर की अनुमति नहीं दी और अंत में जेल में कोविद-19 से संक्रमित हुए। यह उन लोगों के लिए एक दुखद चिंतन है जिन्होंने निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार किया और अदालतों ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने लिखा, "पिंजरे का तोता अब स्वर्ग में गाता है, लेकिन उसका खून हमारे हाथों पर है। असंवेदनशीलता, प्रतिशोध और अन्याय के सभी निर्दोष पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ईश्वर का हाथ हस्तक्षेप करे। हमने फादर स्टेन स्वामी को खो दिया है। लेकिन हम अभी भी ईश्वर के न्याय में आशा करते हैं।” जमशेदपुर जेसुइट प्रोविंश के प्रोविंशियल फादर जेरोम कुटिन्हा ने स्टेन स्वामी  "न्याय और सुलह मिशन  के सेवक" की मृत्यु पर "दर्द, पीड़ा और आशा की गहरी भावना" व्यक्त की। एक फेसबुक पोस्ट में, फादर जेरोम कुटिन्हा ने कहा कि "जीवन के मालिक" ने फादर स्वामी को "आदिवासियों, दलितों और अन्य हाशिए के समुदायों के बीच काम करने का एक मिशन दिया था ताकि गरीबों को जीवन और पूर्ण जीवन मिले  एवं वे गरिमा और सम्मान के साथ जी सकें।” फादर जेरोम ने लिखा, "येसु धर्मसमाज [जेसुइट्स] इस समय, फादर स्टेन की विरासत न्याय और सुलह के मिशन में को आगे बढ़ाने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करता है।” इस बीच अल्पसंख्यक ईसाई कल्याण संघ,पटना के महासचिव एस.के.लॉरेंस ने 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की दुखद मृत्यु पर अल्पसंख्यक ईसाई कल्याण संघ ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।साथ ही पटना के समस्त ईसाईयों के साथ साथ भारत तथा विश्व भर के ईसाई समुदाय के लोग एवं अन्य मजहब के भी ज्यादातर लोगों ने शोक प्रकट कर उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की तथा दुख जताया है। उपेक्षितों,दलितो,आदिवासियों के लिये कार्य करने वाले फादर को पूरे विश्व में मिला सम्मान और श्रद्धांजली यह साबित करता है कि वे एक इमान्दार,देश भक्त तथा नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले पुरोहित थे।इसी वजह से उनके प्रति लोगों के मन में अटूट श्रद्धा थी।उनके उन गुणों का स्मरण करते वक्त यह विश्वास ही नहीं होता है कि ऐसे विलक्षण व्यक्ति को जेल की सजा भी काटनी पड़ सकती है।परमेश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे।आज संत पीटर चर्च मुंबई में विशेष मिस्सा के बाद उनकी अन्तिम क्रिया सम्पन्न हुई।

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