हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

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नयी दिल्ली, 29 जुलाई, पेगासस जासूसी कांड, महंगाई और कृषि कानूनों के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के चलते गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तीसरी बार पीठासीन अधिकारी किरीट प्रेमजी भाई सोलंकी ने सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदलों समेत कई विपक्षी दलों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए आसान के इर्द गिर्द जमा हो गए। विपक्षी दलों के शोर शराबे के बीच ही बिना चर्चा के भारतीय विमानपत्‍तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण संशोधन अधिनियम 2021 और अंतर्देशीय पोत विधेयक-2021 को लोकसभा से पारित करवाया गया। इस बीच हंगामा कर रहे सदस्यों ने कार्यवाही में रुकावट पैदा करने की कोशिश की। सदन में हंगामा बढ़ता देख पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही को शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र अग्रवाल ने हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल चलाया और विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण कागज़ात सभा पटल पर रखवाए। बाद में सदन में शोर शराबा बढ़ता देख कार्यवाही को सवा बारह बजे से दो बजे तक के लिये स्थगित कर दिया।


पूर्वाह्न सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पेगासस जासूसी कांड, महंगाई और कृषि कानूनों के मुद्दे पर हंगामे के दौरान कल आसन की तरफ़ कागज़ फेंकने की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक हुई । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को हुई घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटना संसदीय लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है। उन्होंने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाने की अपील करते हुए कहा, “आसन की अवमानना करना हमारी संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है, हम संसद की गरिमा का ध्यान नहीं रखेंगे तो हमारा लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा। मेरी कोशिश होती है कि सभी सदस्यों को अपने विषय रखने का पर्याप्त समय और अवसर दूं और उनको यथोचित सम्मान भी दूं, उनका सम्मान भी रहे यह मेरी जिम्मेदारी है। क्या आप कल की घटना को संसदीय गरिमा के अनुरूप मानते हैं, क्या इसे न्यायोजित मानते हैं। हम इसे लोकतंत्र का मंदिर मानते हैं और हम सबका विश्वास रहता है कि आसन सबके साथ न्याय करेगा। अगर कभी आसन पर कोई प्रश्न हो तो आप चेंबर में आकर कहें, मैं कोशिश करूंगा कि आसन की गरिमा को बनाने के लिए आपके सुझाव मानूं। लेकिन हम सबको सामूहिक रूप से निर्णय करना होगा कि कैसे लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ा सकते हैं।” श्री बिरला ने कहा, “आप एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था हैं और लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, आपसे आग्रह है कि अगर आप उचित समझते हैं तो किस तरह मिलकर इस सदन की गरिमा को बढ़ा सकते हैं इसका सामूहिक प्रयास करना चाहिए। लगातार कई सदस्य घटनाओं की पुनरावृति कर रहे हैं, मैं ऐसे सदस्यों से आग्रह करता हूं कि ऐसी घटनाओं ना दोहराएं जो संसद की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसी घटनाएं दोहराई जाएंगी तो संसद की मर्यादा को बनाए रखने के लिए ऐसे सदस्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी पड़ेगी।” कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आसन की गरिमा को बनाए रखने के लिए सारे विपक्षी दल शुरू के दिन से सहयोग कर रहे हैं। इसी के बदौलत संसद की कामकाज की उत्पादकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सदन में सरकार हमें अपनी बात नहीं रखने दे रही है। इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए कल की घटना पर बोलें। कल की घटना पर माफ़ी माँगनी चाहिए। आसन पर और मेरे ऊपर काग़ज़ फेंकना क्या यह सही है। इस बात पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंकझोंक होने लगी जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही साढ़े ग्यारह बजे तक स्थगित करनी पड़ी। ग़ौरतलब है कि पेगासस जासूसी कांड और कृषि कानूनों समेत अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में कल विपक्ष ने हंगामा किया और इस दौरान पीठासीन सभापति के आसन की तरफ काग़ज़ फेंके गए।

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