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गुरुवार, 19 अगस्त 2021

किन्नर जीवन की उलझती परतों पर आधारित ममस्पर्शी कहानी है लल्लन मिस

  • · सांसद  निधि के 2.5करोड़ से लल्लन के स्कूल के लिए अधिक से अधिक धनराशि देना चाहूंगी : सोनल मानसिंह
  • · राजकुमारी एक  हिजड़ा है, जिसने बच्चों के लिए शिक्षा की लड़ाई लड़ी
  • · लल्लन मिस समाज के भेदभाव और रूढ़िवादिता को चुनौती देती हैं

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नई दिल्ली: निर्माता, निर्देशक और लेखक रमा पांडेय द्वारा निर्देशित ‘लल्लन मिस’ नाटक  सच्ची कहानी पर आधरित  एक हिजड़े की संघर्ष की दास्तान है। इस नाटक को देश के कई शहरों में मंचित किया गया और रंगमच प्रेमियों से काफी प्यार और सहराना मिली है। यह नाटक अब वाणी प्रकाशन से किताब के रूप में प्रकाशित हुई है जिसका लोकार्पण आज  होटल एम्बेस्डर,दिल्ली में हुआ। लोकार्पण  मौके पर जानी मानी नृत्यांगना, राज्यसभा सांसद, पद्म विभूषण सोनल मानसिंह , प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण, लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री विकास कुमार झा, श्री दिनेश पटनायक, डायरेक्टर जनरल इंडियन काउंसिल ऑफ़ कल्चरल रिलेशन, श्री सच्चिदानंद जोशी ,मैम्बर  सेक्रेटरी इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स  उपस्थित  थे,किन्नर सोनम द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया । लल्लन मिस एक हिजड़े  की वास्तविक जीवन की कहानी पर आधारित है, जिसने  सामाजिक पूर्वधारण की दीवारों को तोड़कर झुग्गी  बस्तियों के बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण किया, ताकि  उनका एक बेहतर 'भविष्य' बन सके। 44 वर्षीय राजकुमारी जिसे लल्लन हिजड़ा के नाम से भी जाना जाता है ने  पटना में इस स्कूल का निर्माण किया। भू-माफिया की धमकी के बावजूद उसे अभी भी स्कूल चलाने की इच्छा थी। स्कूल चलाने के 15 साल बाद, लल्लन को भू-माफिया से स्कूल खाली करवाने के लिए धमकियाँ  मिलनी शुरू हुई  और बाद में भू-माफिया द्वारा  स्कूल को जला दिया गया। इतना होने बावजूद लल्लन क्षेत्र के अन्य सक्रिय भागीदारों  के साथ मिलकर स्कूल का पुनः निर्माण कराने की कोशिश करती  है। लोकार्पण में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद  सोनल मानसिंह ने कहा “हम सभी एक ही जाति क़े लोग हैं किन्नरों को हमारे प्राचीन पुराणों में भी सम्मान औऱ महत्व दिया गया है। हमें इस युग में भी किन्नरों को वही  सम्मान औऱ अधिकार देना होगा जिस सम्मान औऱ अधिकार क़े ये पात्र हैं। आगे उन्होंने भरोसा दिलाया कि इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के लिए उन्हें जो  सांसद  निधि के तहत  2.5 करोड़ अनुदान  देने का अधिकार होता है उसमें से अधिक से अधिक धनराशि वे लल्लन के स्कूल के निर्माण के लिए  देने की कोशिश करेगी”।


पुस्तक की लेखिका  रमा पांडेय ने कहा “ राजनेताओं और भू-माफिया की धमकियों के कारण जिस दर्द और सैलाब से एक किन्नर गुजरती है । यही किन्नर जीवन की उलझती परतों पर आधारित ममस्पर्शी कहानी कहती है लल्लन मिस पुस्तक।  साथ ही इस पुस्तक की बिक्री से जो भी रोयल्टी आएगी उसका एक हिस्सा  लल्लन मिस को जाएगा” ।

पटना से आये लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा ने कहा “ साहित्य जो सबका हित करे, 20 साल पहले छपे  दो पन्ने के मेरे एक सहित्य को रमा पांडे ने नाटक क़े रूप अमर कर दिया है, औऱ आज यह एक किताब के रूप में  भी प्रकाशित हुई जो बड़ी हर्ष की बात है ”।

शोभना नारायण  ने कहा “जो दर्द और दुःख किन्नरों क़े जीवन में है वह दर्द और दुःख रमा पांडे ने जितनी ख़ूबसूरती से रखा है वो काबिलेतारीफ है”।

श्री दिनेश पटनायक “ नाटक में जो हास्य को प्रस्तुत किया है वह बहुत शानदार है । किन्नरों से भेदभाव होना बहुत ही  दुःख की बात है और यह और भी बड़े  दुःख की बात थी कि इन्हें न्याय दिलाने में  हमारी  न्यायपालिका ने इतना समय लिया”।

सच्चिदानंद जोशी “किन्नरों का भी अपना समाज है, कमी सब में होती हैं ,हममें भी कमी होती है हमें इन्हें सम्मान के नजर से देखना चाहिए. रमा पांडे ने आसमान पर सुराग करने जैसा काम किया है जो बड़ी ह्म्मित का कार्य है”।

वाणी प्रकाशन से अदिति महेश्वरी ने कहा “ नाटक का किताब के रूप में आना एक सुखद अनुभव रहेगा इस माध्यम से हमारी आगे की पीढ़ीयां इस कहानी को जान पाएंगी”।

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