बिहार : अंतराष्ट्रीय नदी दिवस के अवसर पर परिचर्चा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

रविवार, 26 सितंबर 2021

बिहार : अंतराष्ट्रीय नदी दिवस के अवसर पर परिचर्चा

seminar-on-international-river-day
सुपौल। विश्‍व नदी दिवस (World Rivers Day) 2021। यह दिवस प्रतिवर्ष 26 सितम्‍बर को पूरे विश्‍वभर में मनाया जाता है। इस बार यह 26 सितम्‍बर 2021 रविवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिवस का उदेश्‍य नदियों में बढ़ रहा जल प्रदूषण को कम करना है। क्‍योकि नदिया हमारे जीवन का एक अभिन्‍न अगं है जिस पर जीव-जन्‍तु, प्राणी, पेड़-पौधे निर्भर रहते है। ऐसे में अगर आप विश्‍व नदि दिवस के बारे में विस्‍तार से जानना चाहते है तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे। आपको बता दे की सन 2005 में सभी देशाे के द्वरा जल संसाधनों की देखभाल के लिए या फिर पानी के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिए सयुंक्‍त राष्‍ट्र ने वॉटर फॉर लाइफ डिकेड (विश्‍व नदी दिवस) को घोषित किया। तब से लेकर अं‍तर्राष्‍ट्रीय नदी दिवस प्रतिवर्ष 26 सितम्‍बर को मनाया जाता है। इस दिवस  के अवसर पर "नदियों पर विकास के नाम पर हस्तक्षेपों के बीच उनके जीवन और समाज के सवालों पर" परिचर्चा रविवार 26 सितम्बर को 11 बजे दिन से 1 बजे तक। इसका आयोजक है नदी घाटी समृद्धि मंच & NAPM.जुड़ने के लिए नीचे के लिंक https://us02web.zoom.us/j/87864537700 दिया गया। नदियां जीवनदायिनी है नदियों के किनारे ही महान सभ्यताओं का उदय हुआ है पर आज तथाकथित  विकास के नाम पर बड़े-बड़े बांध, बैराज,  तटबन्ध, वाटरवेज, तो कहीं रन ऑफ द रिवर, कहीं रिवर फ्रंट का निर्माण कर आधुनिकता की दलीलें दी जाती है नदियों में भारी मात्रा में खनन, जल संरचनाओं के साथ उपेक्षा  व अतिक्रमण, नदी व उसके जलग्रहण क्षेत्रों, जलनिकासी के प्रवाह मार्गो में  अधोसंरचनाओं के निर्माण व अवरोधों से आज नदियों के जीवन संकट में पड़ते जा रहा है। ये हस्तक्षेप सरकार भले चमकदार विकास के नाम पर करे पर इसका सीधा फायदा कारपोरेट को होता है और स्थानीय समुदाय को भारी क्षति उठानी पड़ती है। विस्थापन, बाढ़, सुखाड़ के अलावे भी बहुत तरह की परेशानियों का सामना करना  पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में अंतराष्ट्रीय नदी दिवस के दिन हमलोग इन अहम सवालों पर वर्चुअल परिचर्चा  का आयोजन कर रहे है। आप जैसे सम्वेदनशील व्यक्ति को उसमें सादर भाग लेने का आग्रह करते है।

कोई टिप्पणी नहीं: