बिहार : टूटा महागठबंधन, कांग्रेस को नहीं मना पाए लालू - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 23 अक्तूबर 2021

बिहार : टूटा महागठबंधन, कांग्रेस को नहीं मना पाए लालू

mahagathbandhan-break-in-bihar
पटना : बिहार में राजद और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने इस पर मुहर लगा दी है। देश की राजधानी दिल्ली से पटना पहुंचे भक्त चरण दास ने कहा कि अब राजद के साथ हमारा गठबंधन नहीं है। अगले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस अकेले अपने दम पर सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इतना ही नहीं उन्होंने महागठबंधन में टूट के लिए लालू यादव की पार्टी राजद और तेजस्वी यादव को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल, बिहार में इन दिनों राजद और कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इसकी मुख्य वजह है राज्य की दो विधानसभा सीटों पर होने वाला उपचुनाव बताया जा रहा है। बता दें कि, तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में राजद ने इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया था। इसके बाद कांग्रेस ने कहा था कि कुशेश्वरस्थान कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है इसलिए महागठबंधन को इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार उतारना चाहिए था। लेकिन राजद द्वारा उनकी मांग नहीं मानी गई जिसके बाद कांग्रेस ने भी दोनों सीटों से अपने उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान कर दिया। इसके बाद अब बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास ने राजद पर निशाना साधा और कहा कि राजद ने भाजपा से समझौते के कारण कांग्रेस का साथ छोड़ा है और उपचुनाव के बाद राजद और भाजपा हाथ मिला सकते हैं। बता दें कि,इस टूट की आशंका भले ही बहुत पहले से लगाई जा रही थी, लेकिन कयास यह भी लगाया जा रहा था कि हाइ लेवल पर मामला सुलझ जाएगा। लेकिन बात वहां भी नहीं बन पाई। जिसके बाद कांग्रेस ने यह फैसला लिया। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि यह कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी का राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका है। गौरतलब है कि, इस उपचुनाव की घोषणा से लेकर नामांकन वापसी की आखिरी तिथि से पहले तक माना जा रहा था कि दोनों दलों के बीच दोस्ताना संघर्ष होगा। दोनों दल के नेता दूसरे से आग्रह कर रहे थे कि आपसी तालमेल के आधार पर एक-एक सीट बांट ली जाए। सत्ता पक्ष भी इसे नूरा-कुश्ती ही बता रहा था, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजद-कांग्रेस के नेताओं का फासला बढ़ने लगा और अब दोनों की राहें अलग हो गई।

कोई टिप्पणी नहीं: