उद्योगपति रतन टाटा की जीवनी सुने अब स्टोरीटेल पर - Live Aaryaavart

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बुधवार, 10 नवंबर 2021

उद्योगपति रतन टाटा की जीवनी सुने अब स्टोरीटेल पर

  • ·         रतन टाटा एक आम व्यक्ति के लिए प्रेरणा स्रोत हैं
  • ·         यह ऑडियोबुक  युवा पुरुष और महिलाओं के लिए एक वरदान है जिसे उन्हें जरूर सुनना चाहिए

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नई दिल्ली : एयर इंडिया की बोली टाटा सन्स ने हाल ही में जीती है, इस  कंपनी ने इस सरकारी एयरलाइंस के लिए सबसे अधिक रुपये की बोली लगाई, इसी के साथ एयर इंडिया लगभग 68 साल बाद फिर से टाटा समूह के पास लौट आई है। रतन टाटा अपने सरल स्वभाव और व्यक्तित्व को लेकर सुर्खियों में रहते हैं , वे भारत में और भारत के बाहर एक ऐसा नाम हैं  जिनका हर कोई आदर और सम्मान करता है. रतन टाटा की दुनिया भर के व्यापार जगत में ऐसी देन है  जिसकी  शायद ही कोई बराबरी कर सकता है। अगर आप भी  उद्योगपति रतन टाटा के जीवन के बारे जानना चाहते हैं तो  ऑडियोबुक प्लेटफार्म स्टोरीटेल पर उनकी जीवनी सुन सकते हैं। स्टोरीटेल पर उपलब्ध ये बायोग्राफी श्रोताओं के बीच बहुत प्रसिद्ध  हो रही है इस ऑडियोबुक बायोग्राफी की ख़ास  बात ये है की रतन टाटा की जिंदगी की हर एक पहलु को ध्यान में रखकर बातें बताई गयीं हैं। स्टोरीटेल एप्प पर इस जीवनी को लोग बहुत  सराहा रहे हैं। रतन टाटा ने भारतीय बिज़नेस को विश्व स्तर पर एक नयी पहचान दी,टाटा ग्रुप भारत के सबसे बड़े बिज़नेस ग्रुप में से एक है।पिछले कुछ दशकों में कई सारी विदेशी कंपनियों को खरीदने से दुनिया भर में इसकी एक अलग पहचान बन गयी है। टाटा संस भारत के सबसे बड़े बिज़नेस ग्रुप टाटा की होल्डिंग कंपनी है,आम तौर पर टाटा ग्रुप की हर कंपनी स्वतंत्र रूप से ही काम करती है।  आज इस ग्रुप की सौ से ज़्यादा कपनियां सौ से ज़्यादा देशों में काम कर रही हैं, और सात लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार दे रहीं हैं।


रतन टाटा कार्यकाल में टाटा ग्रुप न केवल भारत में आगे बढ़ा बल्कि विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। रतन टाटा  के एक भाई हैं जिनका नाम जिमी टाटा है,जब रतन मात्र दस वर्ष  के थे तभी उनके माता पिता का तलाक हो गया था।उनके दुसरे भाई नोएल टाटा उनके पिता नवल टाटा की दूसरी पत्नी सिमोन  टाटा  के बेटे हैं । रतन और उनके भाई नोएल की परवरिश उनकी  दादी  नवजबाई टाटा ने थी। उन्होंने अपनी शिक्षा मुंबई और शिमला के स्कूलों में  की,उसके आगे की स्कूली शिक्षा उन्होंने न्यूयोर्क से की, फिर उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्ट में डिग्री ली,  और उसी साल लॉस एंजलिस में कुछ समय के लिए नौकरी भी की। उसके बाद आगे चलकर उन्होंने हार्वर्ड से 7 हफ्ते का एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम भी किया, रतन टाटा ने लॉस एंजिलिस में रहने का ही मन बना लिया था लेकिन अपनी दादी के कहने पर वह भारत वापस आ गए।उन्होंने  टाटा ग्रुप में एक छोटी सी मैनेजमेंट पोजीशन पर काम करना शुरू किया और उस वक्त किसी को भी नहीं पता था कि एक दिन यह व्यक्ति टाटा संस के चेयरमैन होंगे। रतन टाटा, 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे हैं. अपने 21 साल के कार्यकाल में उन्होंने ग्रुप में बड़े बदलाव किये और टेट्ले, कोरस और जैग्वार-लैंड-रोवर जैसे अन्तर्राष्ट्रीय ब्राण्ड टाटा ग्रुप का हिस्सा बने। उन्होंने टाटा मोटर्स को दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो बनाने के लिये भी प्रेरित किया. भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म-विभूषण से सम्मानित रतन टाटा वर्तमान में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं।

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