बिहार : सगुनी की सरपंच बिंदु देवी छपरा जेल से रिहा - Live Aaryaavart

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बुधवार, 24 नवंबर 2021

बिहार : सगुनी की सरपंच बिंदु देवी छपरा जेल से रिहा

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सारण. आज पूरे एक माह बाद, अन्याय पूर्ण तरीके से सारण जिले के परसा प्रखण्ड के सगुनी की सरपंच बिंदु देवी छपरा जेल से रिहा हुई है.उनका जगह-जगह  स्वागत लोगों ने किया है.कई किलोमीटर उनके समर्थक पैदल ही चल दिए.अन्याय खिलाफ लड़ाई में लोगों की यह सहभागिता और अनेक जनसंगठनों का साथ होना वाकई में इस कठिन समय में सकून देता है. वे सभी का आभार व्यक्त करते हुए अन्याय व भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रखने का एलान की है. छपरा की सामाजिक कार्यकर्ता (Social Worker of Chhapra) और सरपंच बिंदु देवी की गिरफ्तारी (Bindu Devi Arrested) का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. जिसको लेकर लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया. सामाजिक संगठनों ने इसे पुलिस उत्पीड़न बताया और इस घटना पर आक्रोश जताया. लोगों ने कहा कि सत्ता के संरक्षण में पंचायत चुनाव में विवाद (Dispute in Panchayat Election) उत्पन्न कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश है. पटना के इनकम टैक्स चौराहे से कई सामाजिक कार्यकर्ता पटना से छपरा तक पदयात्रा कर उनका समर्थन करेंगे और परसा थाने का घेराव भी करेंगे. इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Letter to CM Nitish Kumar) से जांच की मांग की है. बिंदु देवी की गिरफ्तारी से लोगों का पुलिस के खिलाफ काफी आक्रोश है. लोगों ने कहा कि बिंदू देवी को अकारण पुलिस ने फंसा कर जेल भेज है. उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ यह प्रदर्शन किया जा रहा है. उन्होंने जल्द से जल्द बिंदू देवी को रिहा करने की मांग की और पुलिस के रवैये से आक्रोशित नजर आये. बता दें कि सारण जिले के परसा प्रखण्ड के आदर्श पंचायत सगुनी की सरपंच बिंदु देवी प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता हैं. जो कि कई जनसंगठनों से जुड़ी हैं. जिन्हें परसा थाने की पुलिस 24 अक्टूबर की देर शाम अंधेरे में गिरफ्तार किया था और बाद में फर्जी मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया. इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि बिंदु के दो पट्टीदारों के बीच उसी दिन आपस में झगड़ा हुआ था. मारपीट होते देख बिंदु सरपंच होने के नाते बीच-बचाव करते हुए झगड़े को समाप्त कराया. इस पर पंचायत चुनाव में बिंदु की भागीदारी से वंचित करने के लिए एक पक्ष ने उन्हें मुकदमे में फंसाने की साजिश रचने लगा. जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. इसमें कहीं न कहीं पुलिस की भी संलिप्तता है. लोगों ने बताया कि अंधेरा होने पर थाने की पुलिस आयी और मारपीट करने वाले दोनों पक्षों से न तो पूछताछ किया और न ही किसी को पकड़ा, लेकिन बिंदु देवी से दुर्व्यवहार करने लगी और अपशब्द बोलते हुए उन्हें घसीटने लगी. इसका प्रतिरोध करने पर उनका बांह मरोड़कर जबरदस्ती जीप में बैठा कर थाने ले गयी. जब बिंदु ने बिना किसी वारंट के रात के अंधेरे में एक महिला सरपंच के साथ गैरकानूनी तरीके से थाने ले जाने की घटना पर प्रतिवाद की और उनके पति पुलिस अधीक्षक सारण सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों को सूचित किए तो पहले थाना प्रभारी बोले की उनको छोड़ रहे हैं फिर पुलिस खुद को फंसता देख, उनकी गिरफ्तारी के घंटों बाद अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए इनका नाम भी एफआईआर में शामिल कर दिया. इस मामले में उनके पति मणिलाल सहित पूरे परिवार के सभी सदस्यों पर केस दर्ज कर दिया गया. जिसमें अधिकांश लोग दिल्ली में रहते हैं. उनका नाम भी प्राथमिकी में फर्जी तरीके से शामिल कर दिया.सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह पुलिस का दुर्व्यवहार है. एक निष्ठावान सरपंच को पुलिस के द्वारा जबरन जेल भेज दिया जाता है. जिसे वह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसके खिलाफ हम लोग लगातार आवाज उठाते रहेंगे और आज हम लोग पटना से पदयात्रा करते हुए छपरा के परसा थाना पहुंचेंगे. जहां थाने का घेराव भी करेंगे और जल्द से जल्द बिंदु देवी की रिहाई की मांग करेंगे.सामाजिक कार्यकर्ता आकांक्षा कुमारी ने बताया कि पुलिस का रवैया सही नहीं है. बिंदु देवी को विपक्ष के मुखिया और सरपंच के द्वारा जबरन जेल भिजवाया गया है. जिसके खिलाफ हम लोग लगातार आवाज उठाएंगे.


अन्याय व भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी रहेगी जंग-बिंदु देवी

सगुनी की सरपंच बिंदु देवी को आज जेल से रिहा किया गया. उनको एडीजे कोर्ट से 22 को जमानत मिल गयी थी कागजी कार्रवाई पूरा होने के बाद आज उन्हें रिहा किया गया.रिहा होने पर होने पर ग्रामीणों ने उनका अनेक स्थानों पर भव्य स्वागत किया. बिंदु देवी ने लोगों को आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह न्याय और अन्याय के बीच की लड़ाई है. पंचायती राज में ग्राम कचहरी के माध्यम से मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए मैंने सदैव गाँव के लोगो की सस्ता न्याय दिलाने के कोशिश की.मैं अन्य महिला जन प्रतिनिधियों की तरह डम्मी जनप्रतिनिधि  बनने के बजाय खुद ही ग्राम कचहरी संचालन  किया.मैंने सरपंच की गरिमा का सम्मान करते हुए थाने की दलाली नही की, इसी से कारण भयभीत लोग जो गाँव में दो घरों के झगड़े में केस कराकर थाने व कोर्ट कचहरी में दलाली करते है मुझे षड्यन्त्र के तहत फर्जी मुकदमें में फँसवाये. मैं सच्ची थी और बगैर किसी जुर्म के पुलिस उत्पीड़न का शिकार बनी. मेरे खिलाफ हुए अन्याय को देखकर अपने पंचायत सगुनी और अपना क्षेत्र छोड़िए राज्य भर के न्याय पसंद लोग औऱ समाजिक संगठन लगातार संघर्ष किए मैं सगुनी की जनता व इस संघर्ष में साझीदार लोगों का आभार व्यक्त करती हूँ.भ्रष्टाचार व अन्याय के खिलाफ न्याय के लिए सदैव लड़ती रहूँगी.विदित हो कि विगत 24 अक्टूबर को दो लोगों के झगड़े में इनका नाम शामिल कर परसा पुलिस जेल भेज दी थी.इसके खिलाफ पटना में धरना,  प्रदर्शन पटना से परसा तक कि पैदल यात्रा, छपरा में धरना इत्यादि कार्यक्रम हुए.आज जेल से रिहा होने पर सोनहो के पास टोल प्लाजा पर भारी संख्या में समर्थक जूटकर उनका स्वागत किए. वहां से  पैदल ही सैकड़ो लोग उनके घर तक  चल दिए.सगुनी पंचायत के अनेक स्थान पर लोग उनको माला पहनाकर फूलों की वर्षा कर स्वागत किए.

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