धूमधाम से मनाया गया डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल का जन्मोत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 27 नवंबर 2021

धूमधाम से मनाया गया डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल का जन्मोत्सव

  • डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल को मिले ‘भारतरत्न’: मनोज जायसवाल 
  • नरायणपुर-मिर्जापुर में भी हुआ भव्य कार्यक्रम 

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। जायसवाल क्लब के तत्वावधान में शनिवार को जगतगंज स्थित कार्यालय एवं नारायणपुर में महान इतिहासकार, कानूनविद, मुद्राशास्त्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पुरातत्व के अर्न्त‌राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान व जायसवाल समाज के गौरव डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल की 141वीं जयंती धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर न सिर्फ केक काटा गया, बल्कि साहित्यकारों, पत्रकारों सहित कई महान विभूतियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान जायसवाल क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने भारत सरकार से मांग की है कि डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल को मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान दिया जाएं।  जन्मोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान राजराजेश्वर सहस्त्रबाहु के जयकारे के बीच डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर मनोज जायसवाल ने स्वजातिय बंधुओं को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि न सिर्फ डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल के आदर्शो को अपनाएं बल्कि उनके जैसे अपने बच्चों को भी बनाने का प्रयास करे। यह तभी संभव हो पायेगा जब सच्चे मन से इस कार्य में हम लगेंगे। उन्होंने डॉ. काशी जायसवाल के जीवन वृतान्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जायसवाल भारतीय इतिहास के ज्योतिर्धर थे। उन्होंने इतिहास लेखन के माध्यम से सामाजिक जीवन में, राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। आपका जन्म 27 नवंबर, 1881 को उप्र की पावन माटी मिर्जापुर में बाबू महादेव प्रसाद जायसवाल के परिवार में हुआ। आपके पिता लाह और चिवड़े के विख्यात व्यापारी थे। आपके पिता का व्यापार बिहार राज्य में भी फैला हुआ था। डॉ. काशी प्रसाद की प्रारम्भिक शिक्षा एक निजी शिक्षक की देख-रेख में घर पर ही हुई। 


फिर वे मिर्जापुर के लंदन मिशन हाईस्कूल के छात्र रहे। 1906 में डॉ. जायसवाल जी मात्र 25 वर्ष की अवस्था में वह इंग्लैण्ड रवाना हुए और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला पाया। वहां से उन्होंने डेबिस सकॉलर के रूप में चीनी भाषा का अध्ययन किया। अफसोस है कि ऐसे महान विभूति के इतिहास को दबाकर रखा गया। लेकिन अब समाज जागरुक हो गया है और उन्हें सर्वोच्च सम्मान दिलाने के लिए सड़क से संसद तक दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे। इसके लिए देश के हर जिले में समाज की ओर से डीएम को ज्ञापन सौपा जायेगा। इसके अलावा आज के दिन को इतिहास दिवस के रुप में घोषित करने, जिलों में उनकी मूर्ति लगाने, राजधानी से लेकर जिलों में उनके नाम पर सड़क का नामकरण करने व उनके नाम पर मुद्रा के रुप में क्वाइन जारी करने, स्कूल, कालेज, विश्व विद्यालय खोलने, एनसीआरटी में उनकी जीवनी को पढ़ाने की भी मांग प्रदेश व केन्द्र सरकार से करेगा। उन्होने कहा कि आज अगर देश के कोने में जायसवाल समाज का डंका बज रहा है तो यह पहला नाम डाक्टर काशी प्रसाद जायसवाल ने ही दी थी। इस अवसर पर प्रमुख रूप से भगवानदास जायसवाल (नगर अध्यक्ष), विष्णु शिवहरे, मुरलीधर जायसवाल (प्रदेश कोषाध्यक्ष), जमुना दयाल गुप्ता (प्रदेश उपाध्यक्ष युवा), अजय जयसवाल, जितेंद्र जायसवाल, धर्मेंद्र जायसवाल, श्रीमती रीना जायसवाल, श्रीमती राजेश्वरी जायसवाल, श्रीमती माला जायसवाल, अश्वनी जायसवाल, एडवोकेट राहुल जायसवाल, दीपचंद जायसवाल, जीत जायसवाल, किशन जायसवाल, नीरज जायसवाल, भरत जायसवाल, विनोद जायसवाल इत्यादि लोग उपस्थित रहे। इसी तरह नरायनपुर में भी भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज जायसवाल थे। इस मौके पर रमेश जायसवाल, अजय जायसवाल, कंहैया जायसवाल, विजय प्रकाश जायसवाल, धर्मेंद्र जायसवाल, जनार्दन जायसवाल, राजेश चोधरी आदि मौजूद थे।  

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