झारखंड के जमशेदपुर धर्मप्रांत को नया धर्माध्यक्ष मिला - Live Aaryaavart

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सोमवार, 1 नवंबर 2021

झारखंड के जमशेदपुर धर्मप्रांत को नया धर्माध्यक्ष मिला

  • बिहार के बक्सर धर्मप्रांत को नया धर्माध्यक्ष मिलेगा कब?
  • पश्चिम बंगाल के आसनसोल धर्मप्रांत को नया धर्माध्यक्ष मिलेगा कब?

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जमशेदपुर. इंतजार का फल मीठा होता है.जमशेदपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष फेलिक्स टोप्पो येसु समाजी को 2018 में राँची के महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किये जाने के बाद राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष तेलेस्फोर बिलुंग एस. वी. डी.को जमशेदपुर के प्रेरितिक प्रशासक नियुक्त किया गया था.वे कार्डिनल टेलेस्फोर पी टोप्पो के सहायक थे.3 साल के बाद सहायक धर्माध्यक्ष तेलेस्फोर बिलुंग (60 साल) को पदोन्नत कर जमशेदपुर धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष किया गया है.इस तरह जमशेदपुर धर्मप्रांत को नया धर्माध्यक्ष मिल गया है.  वेटिकन सिटी रोम में रहने वाले संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 1 नवम्बर को रांची के सहायक धर्माध्यक्ष तेलेस्फोर बिलुंग एस.वी.डी. को जमशेदपुर धर्मप्रांत का नया धर्माध्यक्ष नियुक्त किया. वर्तमान में वे जमशेदपुर धर्मप्रांत के प्रेरितिक प्रशासक के रुप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं. इसके पहले रांची के सहायक धर्माध्यक्ष फादर टेलेस्फोर बिलुंग को जमशेदपुर डायसिस का प्रभार दिया गया था.धर्माध्यक्ष टेलेस्फोर रांची के साथ जमशेदपुर का भी प्रभार में थे. धर्माध्यक्ष बिलुंग का जन्म 15 अप्रैल 1961 में राऊरकेला धर्मप्रांत के गायबीरा पल्ली में हुआ था.उन्होंने 1979 में दिव्य वचन के धर्मसमाज (सोसाईटी ऑफ डिवाईन वॉर्ड) में प्रवेश किया.उनका समाज में प्रवेश करना 42 साल हो गया है.उन्होंने दर्शनशास्त्र एवं ईशशास्त्र की पढ़ाई ज्ञानदीप विद्यापीठ पुणे से पूरी की तथा 2 मई 1992 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ.उनका पुरोहिताई जीवन 29 साल का हो गया है. उन्होंने सम्बलपुर के माईनर सेमिनरी ज्योति भवन एवं राऊरकेला के माईनर सेमिनरी विद्या ज्योति लुंगाई में रेक्टर एवं उपप्रचार्य का कार्यभार संभाला.एक पुरोहित के रूप मे उन्होंने ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न पल्लियों में अपनी सेवाएँ दीं. 2011 में वे एस डी वी सोसाईटी के प्रोविंशल सुपीरियर चुने गये. 2014 में वे पुनः भारत  पूर्वी क्षेत्र के प्रोविंशल बने. 6 मई 2014 को वे संत पापा फ्राँसिस द्वारा राँची महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये. उनका धर्माध्यक्षीय पावन अभिषेक 30 अगस्त 2014 को सम्पन्न हुआ. वे 29 वर्षों तक पुरोहित रहे हैं एवं 7 वर्षों तक धर्माध्यक्ष के रूप में सेवाएँ दी हैं.

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