बिहार से उठा छात्र-युवा उभार उत्तरप्रदेश के चुनाव को नई गति दे रहा है. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

बिहार से उठा छात्र-युवा उभार उत्तरप्रदेश के चुनाव को नई गति दे रहा है.

  • रोजगार के सवाल पर उठ खड़े हुए छात्र-युवा उभार में व्यापक संभावना, बड़ा मोर्चा बनाएं: दीपंकर भट्टाचार्य
  • आइसा-इनौस की राज्य कार्यकारिणी की बैठक को माले महासचिव ने किया संबोधित

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पटना 4 फरवरी, पटना के छज्जूबाग स्थित माले विधायक दल कार्यालय में आइसा एवं इंकलाबी नौजवान सभा की संयुक्त कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने आज कहा कि हाल ही में बिहार से उठ खड़े हुए छात्र-युवा उभार में व्यापक संभावना दिख रही है. किसान आंदोलन के बाद अब रोजगार के सवाल पर बिहार से लेकर उत्तरप्रदेश, पंजाब और पूरे देश में छात्र-युवा संगठित हो रहे हैं. जरूरत इस बात की है कि रेलवे के निजीकरण पर आमदा और रोजगार के अवसरों को लगातार घटाते जा रही केंद्र सरकार पर निर्णायक हमला बोलने के लिए और बड़ा मोर्चा बनाएं. बिहार में छात्र-युवा आंदोलन का शानदार इतिहास रहा है. बिहार अपने उस इतिहास को एक बार फिर से दुहराने को तैयार खड़ा दिख रहा है. उन्होंने कहा कि विगत दिनों रेलवे एनटीपीसी व ग्रुप डी के अभ्यर्थियों की मांगों पर आइसा-इनौस के आह्वान पर बिहार बंद ने पूरे देश का ध्यान खींचा. जिस तरह किसान आंदोलन का सेंटर पंजाब रहा, उसी तरह बेरोजगारों के आंदोलन का सेंटर बिहार बन रहा है. ऐसी स्थिति में आइसा-इनौस की जवाबदेही और बढ़ जाती है. नौजवानों का जो विश्वास बढ़ा है उसपर हमें खड़ा रहना है और एक व्यापक जनांदोलन की ओर बढ़ते हुए भाजपा के फासीवादी हमलों को पीछे धकेलना है.


बिहार के विगत विधानसभा चुनाव में रोजगार एक बड़ा मुद्दा बना था और छात्र-युवाओं ने भाजपा-जदयू सरकार को लगभग सत्ता से बाहर धकेल दिया था. हालांकि ऐसा नहीं हो सका. यूपी चुनाव में भी रोजगार बड़ा मुद्दा बन रहा है. बिहार के छात्र-युवा आंदोलन से उसे बल मिला है. यूपी के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर है. वहां भाजपा की हार के साथ 2024 में तानाशाह मोदी सरकार को दिल्ली की गद्दी से हटाने के आंदोलन को नई गति मिलेगी और तब देश का पूरा नजारा बदलेगा. इस बार के केंद्रीय बजट में केंद्र सरकार ने रोजगार के सवाल पर अपने पुराने जुमले को ही दोहराया. उसकी नीति रेलवे का धीरे-धीरे निजीकरण करने की है. रेलवे सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाला सेक्टर है. यदि यह सेक्टर टूट जाएगा, तब रोजगार कहां है? बंैक, बीमा आदि का भी निजीकरण हो रहा है. टेंपरोरी टाइप के काम मिल रहे हैं. जहां बहुत मेहनत करनी पड़ती है लेकिन वेतन उतना ही कम. देश में बेरोजगारों-अर्द्धबेरोजगारों की तादाद लगातार बढ़ रही है. हमें इस बात को लेकर सावधान रहना होगा कि भाजपा जैसी फासीवादी ताकतें इस ऊर्जा को गलत दिशा में मोड़ने की जी तोड़ कोशिश करेगी. आइसा-इनौस के लोगों को इस ऊर्जा को एक सकारात्मक दिशा देना होगा और पूरी लड़ाई को सरकार की नीतियों के खिलाफ मोड़ना होगा. आइसा-इनौस की बैठक में माले राज्य सचिव कुणाल सहित माले के युवा नेता राजू यादव, इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अगिआंव विधायक मनोज मंजिल, केंद्रीय कमिटी के सदस्य अभ्युदय, आइसा के महासचिव व पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, इनौस के मानद अध्यक्ष व डुमरांव विधायक अजीत कुशवाहा, आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष विकास यादव व सचिव सबीर कुमार, इनौस के राज्य अध्यक्ष आफताब आलम व सचिव शिवप्रकाश रंजन, जितेन्द्र पासवान सहित कई जिलों के अध्यक्ष व सचिव शामिल हुए.

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