मधुबनी : 3 दिवसीय शिल्प जागरूकता कार्यक्रम का पद्मश्री और DM ने किया उद्घाटन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 4 मार्च 2022

मधुबनी : 3 दिवसीय शिल्प जागरूकता कार्यक्रम का पद्मश्री और DM ने किया उद्घाटन

  • कला से सकारात्मक संभावनाओं का होता है विकास, जिले में हस्तशिल्प की अपार संभावनाएं: DM

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मधुबनी (अजय धारी सिंह) पद्मश्री दुलारी देवी और जिलाधिकारी अमित कुमार ने बुधवार को जवाहर नवोदय विद्यालय रामपट्टी, मधुबनी के बहुउद्देशीय सभागार में दीप जलाकर 3 दिवसीय शिल्प जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.


मधुबनी जिले में हस्तशिल्प की अपार संभावनाएं

आपको बताते चलें कि भारत सरकार के हस्तशिल्प विभाग के तत्वावधान में कार्यालय सहायक निदेशक के द्वारा जवाहर नवोदय विद्यालय रामपट्टी, मधुबनी के में 3 दिवसीय शिल्प जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का मकसद लोगों में विशेषकर चौदह वर्ष के ऊपर की आयु के बच्चों में कौशल विकास के लिए शिल्प के महत्व को रेखांकित करना है. कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि मधुबनी जिले में हस्तशिल्प की अपार संभावनाएं हैं. विशेषकर चित्रकला के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं हैं. उन्होंने शिल्प जागरूकता कार्यक्रम के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त  की और इसके सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला.


ग्रोथ और डेवलपमेंट के बीच अंतर को समझना चाहिए

उन्होंने कहा कि हम सभी में कोई न कोई कौशल अवश्य होता है, आवश्यकता केवल उसे मौके प्रदान करने की होती है. साथ ही किसी भी कार्य को बेहतर तरीके से करने के लिए क्षमता संवर्धन की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि हम सभी प्रायः विकास की बात करते हैं, चाहे आधारभूत संरचना के विकास की बात हो, कला के विकास की बात हो या कौशल विकास की बात हो. परंतु हमें विकास के लिए अग्रेजी के दो भिन्न शब्दों ग्रोथ और डेवलपमेंट के बीच अंतर को समझना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ ग्रोथ का आशय आकार में वृद्धि से होता है, वहीं डेवलपमेंट का तात्पर्य सर्वांगीण विकास से होता है. हमारे भीतर सभी सकारात्मक संभावनाओं का विकास हो यह परम आवश्यक है.


शिल्प के माध्यम से होता है सकारात्मकता, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का विकास

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शिल्प अपने आप में परिपूर्ण है. शिल्प के माध्यम से हमारे अंदर किस प्रकार सकारात्मकता, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का विकास किया जा सकता है. इस पर चर्चा करने के उद्देश्य से विभिन्न हस्तशिल्पों जैसे मिथिला चित्रकला, सिकी कला, पेपरमेशी आदि से कई कलाकार इसमें आए हुए हैं. उन्होंने व्यवहारिक ज्ञान के विकास के लिए हार्ड स्किल के साथ साथ सॉफ्ट स्किल के विकास पर भी बल दिया. हमारे विद्यालय हमारे सामाजिक विकास की आधारशिला हैं. उपस्थित लोगों के लिए उन्होंने अनुशासन का मूल मंत्र भी दिया. जीवन में जब भी जरूरत हो, अपनी बात अपने अभिभावकों और शिक्षकों से जरूर साझा करें. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि इंटरमीडिएट के बाद मेरे मन में भी भविष्य को लेकर बड़ी आशंकाएं थीं. परंतु, मैंने आत्मसंयम से काम लिया और सारी दुविधाएं छटती चली गईं. इसलिए कभी भी संयम नहीं खोना चाहिए. 


आज डॉक्टर और इंजीनियर से आगे भी संभावनाओं के अनेक द्वार हैं

संबोधन के अंत में उनके द्वारा उपस्थित सभी लोगों के बीच 3 दिवसीय शिल्प जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होने पर खुशी जाहिर की गई और शिल्प के माध्यम से कौशल विकास एवं कार्य दक्षता के नए सोपान पर आरूढ़ होने के लिए शुभकामनाएं दी गईं. जिलाधिकारी ने कहा कि आज डॉक्टर और इंजीनियर बनने से आगे भी संभावनाओं के अनेक द्वार खुले हैं. इसलिए जिस क्षेत्र में जाएं, अच्छा करने का प्रयास करें. इस अवसर पर पद्मश्री दुलारी देवी, ए० के० द्विवेदी प्रधानाचार्य नवोदय विद्यालय, मधुबनी, बी० के० झा सहायक निदेशक कार्यालय हस्तशिल्प, भारत सरकार, सुमित कुमार, डीपीएम, नाबार्ड, केदार प्रसाद सिंह, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एमएसएमई, शिवाकर कंठ, प्रतिनिधि जिला उद्योग केन्द्र मधुबनी ने भी अपनी बात रखी. वहीं कार्यक्रम में भाग लेने वालों में राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त चित्रकार विभा दास, पेपरमेसी के लिये युवा केन्द्र की ओर से सुनील चौधरी,  टेराकोटा के राज्य पुरस्कार प्राप्त प्राप्त चित्रकार भोला पंडित, लाह के कलाकार पति-पत्नी सुकन साह और सीता देवी, गौरांगी क्रिएशन से वंदना कुमारी, अनिता कुमारी,  के साथ साथ अन्य कलाकार, मीडिया कर्मी और अन्य लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम में नवोदय स्कूल के कल्चर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत आये बच्चों ने मणिपुर की एक सुंदर नृत्य प्रस्तुति भी दी.

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