मधुबनी : जिला बाल संरक्षण इकाई मधुबनी में चलाया गया टीबी जांच अभियान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 11 मार्च 2022

मधुबनी : जिला बाल संरक्षण इकाई मधुबनी में चलाया गया टीबी जांच अभियान

  • जिले में की जाएगी टीबी मरीजों की खोज, 55 बालिकाओं का हुआ स्क्रिनिंग

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मधुबनी (फिरोज आलम) शुक्रवार को जिले में टीबी मरीजों के खोज के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक अभियान की शुरुआत की गयी है. टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत टीबी मरीजों की खोज की जा रही है. इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई मधुबनी  मधुबनी में टीबी मरीजों की खोज के लिए विशेष कैंप का आयोजन किया गया. इस दौरान बालिका गृह मधुबनी में करीब 55 बालिकाओं की स्क्रिनिंग की गयी. सभी का टीबी जांच के लिए बलगम का सैंपल लिया गया.डी पी सी पंकज कुमार के देख रेख में इस कैंप का आयोजन किया गया. इस मौके पर उन्होंने ने बताया कि टीबी एक जानलेवा बिमारी है. इस बीमारी की समय से जांच और उपचार के अभाव में संपर्क में रहने वाले अन्य सदस्यों में भी रोग के फैलने की संभावना रहती है. साथ ही अनियमित और अधूरे उपचार के कारण कई रोगियों में ड्रग रेजिस्टेंट टीबी हो जाती है.


टीबी मरीजों का होगा मुफ्त इलाज

सी डी ओ डॉ जी एम ठाकुर बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो हफ्तों से ज्यादा की खांसी, खांसी में खून का आना, सीने में दर्द, बुखार, वजन का कम होने की शिकायत हो तो वह तत्काल बलगम की जांच कराए. जांच और उपचार बिल्कुल मुफ्त है. मरीज को इलाज की अवधि तक 500 रुपये प्रतिमाह पोषण राशि दी जाती है. इस मौके पर टीबी के भुबन नारायण कंठ एस टी एस, सचिन कुमार, रेनू चोधरी ए एन एम, कुमारी ज्योतिका जीएनएम, बालिका गृह के अन्य कर्मी मौजूद थे.


उच्च जोखिम युक्त समूह में टीबी मरीजों की होगी खोज:

सीडीओ डॉ जीएम ठाकुर  ने बताया कि  उच्च जोखिम युक्त समूह में टीबी मरीजों की खोज की जायेगी. आनाथालय, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, वृद्धा आश्रम, कारागृह, सुधार गृह, रैन बसेरा और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यक्रम चलाया जाएगा. यहां क्षय रोगियों की स्क्रीनिंग की जाएगी. जांच में टीबी के रोगी पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनका इलाज निशुल्क किया जाएगा. ईंट भट्टा के मजदूर, नव निर्मित कार्यस्थल के मजदूर, ग्रामीण दूरस्थ एवं कठिन क्षेत्र, महादलित टोला और अन्य लक्षित समूह में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका और गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता मरीजों की खोज करेंगे.

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