विशेष : बाबा विश्वनाथ के सहारे किले को बचाने में उतरे मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 4 मार्च 2022

विशेष : बाबा विश्वनाथ के सहारे किले को बचाने में उतरे मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा के लिए धोनी से कम नहीं है। भाजपा में वे ही एक ऐसे करिश्माई नेता है जो धोनी की तरह बाजी पलटने की माद्दा रखते है। 2017 में भी तमाम सर्वे में यह बात साफ हो चली थी कि लोगों की नाराजगी का खामियाजा भाजपा को ले डूबेगी। लेकिन मोदी ने तीन दिन तक काशी में रहकर रोड शो किया। उसने पूरे पूर्वांचल को प्रभावित किया। परिणाम यह रहा कि 2017 में सातवें चरण के 54 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 36 सीटें जीती थीं, जिनमें बीजेपी को 29, अपना दल (एस) को 4 और सुभासपा को 3 सीटें मिली थी। जबकि सपा ने 11 सीटें, बसपा ने 6 सीटें और निषाद पार्टी ने एक सीट जीती थी। कांग्रेस खाता नहीं खोल सकी थी। इस बार भी मामला वैसा ही है। लोगों की वर्तमान जनप्रतिनिधियों से नाराजगी सिर चढ़कर बोल रही है। यही वजह है कि मोदी इस बार भी लगातार 48 घेटे तक काशी में ही रहेंगे। उनकी मौजूदगी से लोगों पर कितना असर होगा यह तो 10 मार्च को पता चलेगा, लेकिन यह सच है कि मोदी ने जिस तरह बनारस में बाबा विश्वनाथ धाम को नए स्वरुप में लाने के साथ काशी को रिंगरोड से लेकर पूरे शहर को चमकाया है उसका असर काशी ही नहीं पास-पडोस के जिलों पर पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है क्या आखिरी चरण में 2017 वाला प्रदर्शन दोहरा पाएगी भाजपा? क्या पूर्वांचल की 54 सीटों पर चलेगा मोदी मैजिक? क्या वाराणसी से खुलेगा पूर्वांचल विजय का द्वार? खासकर, सपाईयों ने जिस तरीके से सत्ता से पहले तांडव व उत्पात मचा रखा है, वह बीेजेपी का ग्राफ बढ़ाने में कहीं न कहीं से मददगार ही साबित हो रही है 


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फिरहाल, वाराणसी में पीएम मोदी की रोड शो में उमड़ा सैलाब यह बताने के लिए काफी है उनकी क्रेज बरकरार है। पीएम मोदी ने गोदौलिया में सरदार पटेल की मूर्ति पर माल्यार्पण कर रोड शो की शुरुआत की, तो लंका स्थित मालवीय चौराहा तक भीड़ की लरी टूटी नहीं। मलदहिया चौराहे से काशी विश्वनाथ धाम व लंका तक जय श्रीराम व हरहर महादेव के नारे गूंजते रहे। भला क्यों नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मभूमि भी तो है और सियासत का केंद्र भी है। यहीं से पूर्वांचल की राजनीति सधती है और पूर्वांचल की जीत, यूपी की बाजी भी तय करती है। यही वजह है कि सिर्फ मोदी ही नहीं बाजी अपने पाले में लाने के लिए राहुल प्रियंका से लेकर अखिलेश तक डेरा जमाएं हुए है और ताबड़तोड़ रैलिया आखिरी दौर में कर रहे है। बता दें, काशी क्षेत्र की 2017 में सातवें चरण के 54 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 36 सीटें जीती थीं, जिनमें बीजेपी को 29, अपना दल (एस) को 4 और सुभासपा को 3 सीटें मिली थी। जबकि सपा ने 11 सीटें, बसपा ने 6 सीटें और निषाद पार्टी ने एक सीट जीती थी। कांग्रेस खाता नहीं खोल सकी थी। यूपी में दोबारा सत्ता पाने के लिए भाजपा इस बार भी पूर्वांचल में सभी 54 सीटों पर विजय का लक्ष्य लेकर चल रही है। कारण, उनके नेतृत्व में ही वर्ष 2014, 2017 और 2019 में पूर्वांचल में भाजपा ने क्लीन स्वीप जैसी स्थिति बनाई थी। सुभासपा के सपा के पाले में जाने के बाद भाजपा अब नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। इसमें बाहुबली विधायक व माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी का धमकी भरा वायरल वीडियो भाजपा के लिए रामबाण की तरह काम कर रहा है। जिसमें अब्बास अंसारी ने मंच से कहा कि सरकार आने पर 6 महीने तक किसी भी सरकारी अधिकारी व पुलिस कर्मियों की ट्रांसफर वह पोसिं्टग नहीं होगी, उन लोग से सरकार बनने पर किए गए जुल्म व अत्याचार पर हिसाब लिया जाएगा। यह अलग बात है कि वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर मऊ में अब्बास पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। बता दें, चुनाव के सातवें चरण के प्रचार का शोर शनिवार शाम पांचे थम जाएगा। इस फेज में 9 जिलों की 54 विधानसभा सीटों पर 7 मार्च को मतदान होना है, जहां मतदाता 613 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। यूपी में सत्ता के लिहाज से यह सबसे अहम है, जिसके चलते बीजेपी से लेकर सपा, बसपा और कांग्रेस ने अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आजमगढ़ और जौनपुर जिले को सपा का गढ़ माना जाते हैं तो मऊ और गाजीपुर में उसके सहयोगी सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाशराजभर और जनवादी पार्टी के प्रमुख संजय चौहान का असर है। वहीं, बाकी जिले में बीजेपी और उसके सहयोगी अपना दल (एस) का प्रभाव माना जाता है। बीजेपी पूर्वांचल के जिलों में माफियाराज के मुद्दे के जरिए जनता को साधने की कोशिश कर रही है। क्योंकि पूर्वांचल के जिले खासतौर पर मऊ, गाजीपुर में सातवें चरण में मतदान हो रहा है। वहीं पीएम मोदी और सीएम योगी माफिया और गुंडागर्दी के मुद्दे पर विपक्षी दलों को साध रहे हैं तो विपक्ष ने बीजेपी के पांच साल के कामकाज पर सवाल खड़े कर रही है. रोजगार और महंगाई पर घेर रहे हैं तो आवारा पशु एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। 


चलाया वंदे भारत अभियान

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इससे पहले पीएम मोदी ने मिर्जापुर की रैली में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया इस सदी के नाजुक दौर से गुजर रही है और महामारी, अशांति, अनिश्चितता से अनेक देश प्रभावित हैं, लेकिन संकट चाहे कितना भी गहरा हो, भारत के प्रयास उससे भी ज्यादा बड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि  कोरोना काल में वंदेभारत अभियान चलाकर एक-एक नागरिक को विदेश से लाया गया। अफगानिस्तान में ऑपरेशन देवी चलाकर भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकाला और अब यूक्रेन से अपने नागरिकों और छात्रों को बचाने में भारत लगा हुआ है। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन संकट का जिक्र करते हुए कहा कि हमने ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन से हजारों छात्रों को सुरक्षित रूप से निकाला है और शेष बचे लोगों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए हवाई जहाज लगातार उड़ान भर रहे हैं। लेकिन ’घोर परिवारवादियों’ और ’माफियाओं’ ने उनके इस अभियान को विफल करने की हरंभव प्रयास में है। 


बीजेपी ने क्लीक्लीन स्वीप किया था

2017 के विधानसभा चुनाव में सातवें चरण इन 54 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 36 सीटें जीती थीं, जिनमें बीजेपीको 29, अपना दल (एस) को 4 और सुभासपा को 3 सीटें मिली थी. वहीं, सपा ने 11 सीटें, बसपा ने 6 सीटें और निषाद पार्टी ने एक सीट जीती थी. कांग्रेस खाता नहीं खोल सकी थी. हालांकि, इस बार ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी से नाता तोड़कर सपा के साथ हाथ मिला लिया है तो निषाद पार्टी ने बीजेपी से गठबंधन कर रखा है। आजमगढ़ की 10 सीटों में से सपा ने 5, बसपा ने 4 और बीजेपी ने 1 सीट पर कब्जा जमाया था। मऊ जिले की 5 सीटों में से 4 बीजेपी और 1 बसपा ने जीती थी। जौनपुर जिले की 9 में से 4 बीजेपी, एक अपना दल (एस), 3 सपा और 1 बसपा को मिली थी। गाजीपुर की 7 में से 3 बीजेपी, सुभासपा, दो सपा ने जीती थी। चंदौली की चार में से 3 बीजेपी और 1 सपा के खाते में गई थी. वाराणसी की 8 में से 6 सीटें बीजेपी, एक अपना दल (एस)  और एक सुभासपा ने जीती थी। भदोही की 3 में से दो बीजेपी और एक निषाद पार्टी को मिली थी. मिर्जापुर की पांच में से 4 बीजेपी और एक अपना दल (एस) तो सोनभद्र जिले की 4 में से 3 तीन बीजेपी और एक अपना दल (एस) ने कब्जा जमाया था। 


पूर्वांचल की 54 सीटों पर 7 को मतदान 

सातवें चरण में रॉबर्ट्सगंज, ओबरा, दुद्धी, दीदारगंज, अतरौला, गोपालपुर, सकलडीहा, सागरी, शिवपुर, मुबारकपुर, सेवापुरी, भदोही, ज्ञानपुर, औराई, मधुबन, घोसी, मोहम्मदाबाद गहना, मऊ, मोहम्मदाबाद, सैयदपुर, चकिया, अजगर,रोहनियांमछली शहर, मरियाहू, छांबी, मिर्जापुर, मझवां, चुनार, शाहगंज, जौनपुर, मल्हानी,बदलापुर, पिंडारा, आजमगढ़, निजामाबाद, जमानिया, मुगलसराय, फूलपुर- पवई, लालगंजमेहरगढ़, जाफराबाद, सैदपुर, मरिहां, घोरावल, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, गाजीपुर, जंगीपुर, जहूराबाद और मुंगरा बादशाहपुर.


दागी प्रत्याशियों की भरमार 

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सातवें चरण में 214 (35 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता 5वीं और 12वीं के बीच घोषित की है। जबकि 346 (57 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता स्नातक और इससे ज्यादा घोषित की हैं। 10 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता डिप्लोमा धारक घोषित की हैं वहीं 30 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता साक्षर और 4 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता असाक्षर घोषित की है। 3 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता घोषित नहीं की है। उम्मीदवारों द्वारा घोषित आपराधिक मामले 607 में से 170 (28 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किये है वहीं गंभीर आपराधिक मामले 131 (22 फीसदी) है। इसमें आपराधिक मामले में सपा सबसे आगे है, जिसमें 45 में से 26 (58 फीसदी), बीजेपी के 47 में से 26 (44 फीसदी), बसपा के 52 में से 20 (38 फीसदी), काग्रेस के 54 में से 20 (37 फीसदी) और 47 में से 8 (17 फीसदी) आप पार्टी के हैं। उम्मीदवारों द्वारा घोषित आपराधिक मामलों में पहले स्थान पर प्रगतिशील मानव समाज पार्टी से विजय मिश्रा हैं जो भदोही के ज्ञानपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार हैं जिनके ऊपर 24 मामले दर्ज हैं (गंभीर धराये 50), दूसरे स्थान पर गाजीपुर जनपद के गाजीपुर विधान सभा सीट से बसपा के राज कुमार सिंह गौतम हैं जिनके ऊपर 11 मामले (गंभीर धराये 25) और तीसरे स्थान पर कांग्रेस के वाराणसी पिंडर विधानसभा क्षेत्र से अजय है जिनके ऊपर 17 मामले दर्ज (गंभीर धराये 18) है।


वोटरों ने कहा, मोदी जैसा कोई नहीं 

डा रितु कहती है यूपी की हालत ऐसी ही बंजर जमीन की तरह हो गई है, जिसे मोदीजी जैसा नेता ही ठीक कर सकते हैं। गुजरात में एक बार सूखा आया, लेकिन फिर मोदीजी ने नहीं होने दिया। एक बार दंगा हुआ, फिर नहीं होने दिया। एक बार भूकंप आया, फिर एक साल में उससे भी बड़ा शहर खड़ा कर दिया। पाकिस्तान की हालत पतली कर दी। कुछ ऐसा ही योगी कर रहे है। पांच साल में एक भी दंगा नहीं हुआ। लोग सड़कों पर सुरक्षित है। व्यापारियों की हत्याएं व फिरौती पर ब्रेक लग गया। इसलिए दुबारा यूपी में योगी ही आना चाहिए, वरना मुख्तार बेटा खुद बता रहा है क्या हश्र होने वाला है। 


काशी की अड़ियों पर सिर्फ सियासत 

भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में इन दिनों धार्मिक, आध्यात्मिक और राजनीतिक गतिविधियों की त्रिवेणी बह रही है। काशी वैसे पूरी तरह धार्मिक भावनाओं से सराबोर है लेकिन चुनावी माहौल का असर यहां भी देखने को मिल जाता है। सुबह शुरू होकर रात तक चलने वाली धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में राजनीतिक चर्चाएं भी अपना स्थान बना ही लेती हैं। यहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शिविर के बाहर जलपान की एक दुकान ऐसी ही चर्चाओं का अड‌्डा बन गई है, जहां मौका मिलते ही सरकारी कर्मचारी, काशीवासी, नाविक और दुकानदार सरकारें बनाने-बिगाड़ने में जुट जाते हैं।


आधुनिकता के रंग में रंगी काशी 

इतिहास के पन्नों से भी पुरानी काशी पुरातनता को सहेजे आधुनिकता के रंग में रंग रही है। नित नए विकास के सोपान को गढ़ रही है। पुरानी ख्याति को स्पर्श कर रही है। सरकार विकास को रफ्तार देने संग धर्म, संस्कृति, अध्यात्म व बनारसीपन जिंदा रखने की जुगत में लगी है। श्री काशी विश्वनाथ धाम इसका सबसे बड़ा साक्ष्य है। धाम को विस्तार दिया गया पर इसकी पुरातनता से कहीं छेड़छाड़ नहीं हुई। धाम में मौजूद सभी मंदिरों को उचित स्थान दिया गया। इतना ही नहीं, मंदिर जिस दिशा में थे, उसी दिशा में स्थापित किए गए। तंग गलियों को संवारा गया, प्राचीरों को सहेजा गया पर मूल स्वरूप नहीं बदले गए। स्मार्ट सिटी के तहत दर्जनों वार्डों का कायाकल्प हो रहा है, इसमें भी इसी बात को ध्यान में रखकर कार्य हो रहे हैं।


पार्किंग 

शहर में तीन स्‍थानों पर आधुनिक वाहन पार्किंग की व्‍यवस्‍था की गई है। इसे गोदौलिया चौराहा, टाउन हाल मैदान व सर्किट हाउस के पास बनाया गया है। गोदौलिया पार्किंग में केवल दो पहिया वाहनों को रखने की व्‍यस्‍था है। वहीं, टाउन हाल मैदान व सर्किट हाउस के पास बने पार्किंग में दो पहिया वाहनों के साथ्‍ा चार पहिया वाहनों को भ्‍ाी खड़ा करने की व्‍यवस्‍था है। उधर, ग्रामीण क्ष्‍ोत्रों में भी सड़कों को जहां चौड़ा किया जा रहा है वहीं, रिंगरोड गांवों को शहर से जोड़ने में मददगार है। मोदी के बनारस का सांसद और देश का प्रधानमंत्री बनने से पहले तक बनारस में भी दुश्वारियों का पहाड़ था। दूसरे शहरों की तरह यहां भी बदइंतजामी थी, सड़कें जर्जर, बिजली-पानी का संकट, कुंड-तालाब कब्जे में वगैरह-वगैरह। समय ने करवट ली और यह कहना गलत नहीं होगा कि बड़े ही कम समय में भी किसी शहर में बड़ा बदलाव लाए जा सकने की बनारस एक जीती-जागती मिसाल है। 




--सुरेश गांधी--

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