वीरेंद्र यादव न्‍यूज के 80वें अंक का लोकार्पण - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

वीरेंद्र यादव न्‍यूज के 80वें अंक का लोकार्पण

  • पटना के गांधी संग्रहालय में हुआ वैचारिक विमर्श

virendra-yadav-news-inaugraion
पटना, मासिक पत्रिका वीरेंद्र यादव न्‍यूज ने अपने प्रकाशन के 80 अंक पूरे के लिए हैं। एकदम निर्बाध प्रकाशन। 80 अंकों की यात्रा में कभी रुकावट नहीं, कोई बाधा नहीं। हर एक अंक संग्रहणीय, पठनीय और विश्‍वसनीय। यही है इस पत्रिका की पहचान। पत्रिका की ओर से 80वें अंक के लोकार्पण के मौके पर पटना के गांधी संग्रहालय में एक विचार गोष्‍ठी आयोजित की गयी।  कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए पत्रिका के संपादक वीरेंद्र यादव ने कहा कि पत्रिका सामाजिक सरोकारों को लेकर शुरू की गयी थी। इसका मकसद वंचित समाज के लोगों की आवाज, उनका सरोकार और संवेदनाओं को मंच प्रदान करना था। अपने इस उद्देश्‍य में पत्रिका काफी हद तक सफल रही है। उन्‍होंने कहा कि पत्रिका ने अपने सरोकार के साथ नियमित प्रकाशन के 80 अंक पूरे कर लिये हैं तो इसका श्रेय पाठकों, शुभेच्‍छुओं और पत्रिका के लिए समय-समय पर आर्थिक सहयोग करने वाले लोगों को जाता है। उनके सहयोग के बिना इतनी लंबी यात्रा संभव नहीं थी।


वैचारिक विमर्श के विषय ‘मीडिया का सरोकार और खबरों के बाजार’ को लेकर अपनी बात रखते संपादक वीरेंद्र यादव ने कहा कि मीडिया का सरोकार और खबरों का बाजार अलग-अलग चीजे हैं। पहले मीडिया हाउस में इसके लिए अलग-अलग विभाग होते थे। संपादकीय अलग, विज्ञापन अलग और वितरण अलग। लेकिन अब इनके शीर्ष पदों पर बैठे व्‍यक्ति की जिम्‍मे‍वारियां आपस में मिल गयी हैं। इस कारण एक नया शब्‍द गढ़ा गया एडवरटोरियल। यह एडवरटाइजमेंट और एडिटोरियल का मिला हुआ रूप है। मतलब यह है कि अब विज्ञापन और खबरों का भेद मिटता जा रहा है। यह बाजार की जरूरत भी हो गयी है। वीरेंद्र यादव न्‍यूज की चर्चा करते हुए संपादक ने कहा कि किसी भी पत्रिका का नियमित रूप से प्रकाशन सिर्फ पाठकों के भरोसे संभव नहीं है। इसकी आर्थिक जरूरत के लिए विज्ञापनदाता के पास जाना ही पड़ता है। वैसी स्थिति में विज्ञापनदाताओं के सरोकार को समझना भी संपादक के लिए जरूरी हो जाता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म के बिहार समन्‍वयक राजीव कुमार ने कहा कि पत्रिका में पंचायतों के सशक्तिकरण और चुनाव सुधार के मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर संतोष यादव ने कहा कि अब सरोकार का मीडिया और बाजार की खबर हो गयी है। वैसी स्थिति में जनसरोकार का पक्ष कमजोर होता जा रहा है। प्रो. बीएन विश्‍वकर्मा ने कहा कि किसी भी पत्रिका का नियमित रूप से प्रकाशित करते रहना बड़ी चुनौती है। पत्रकार हेमंत कुमार और अभिषेक चंद्रा ने कहा कि वीरेंद्र यादव न्‍यूज का हर अंक चुनाव के लिहाज से संग्रहणीय होता है। इस मौके चितरंजन प्रसाद, प्रमोद यादव, आनंद कुमार, अमित कुमार गौतम, सुलभा सुप्रिया, संतोष कुमार, दुर्गेश यादव, सचिन कुमार यादव, महबूब आलम अंसारी, नसीम अहमद, अरुण नारायण, मिथिलेश शर्मा, पत्रकार विजय कृष्‍ण अग्रवाल आदि ने अपने विचार व्‍यक्‍त किये। धन्‍यवाद ज्ञापन रणविजय कुमार और आदित्‍य आदर्श ने संयुक्‍त रूप से किया। 

कोई टिप्पणी नहीं: