बिहार : समीर केरकेट्टा का नयी दिल्ली में रविवार को निधन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 11 अप्रैल 2022

बिहार : समीर केरकेट्टा का नयी दिल्ली में रविवार को निधन

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पटना . कालाजार विभाग के द्वारा कालाजार पर कार्य किया जाता है.कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है.कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लीशमैनिया डोनोवनी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार हफ्ते से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते हैं.इस कार्य में समीर केरकेट्टा ( जेफरी केरकेट्टा) लगे हुए थे.उनका नयी दिल्ली में रविवार को निधन हो गया.उनका दोनों किडनी में कैंसर हो गया था. वे 61 साल के थे. अपने पीछे 2 बच्चों के साथ भरापूरा परिवार को छोड़ गये. नयी दिल्ली से समीर केरकेट्टा का पार्थिव शरीर पटना लाया गया.उनका पैतृक आवास कुर्जी क्रिश्चियन कॉलोनी में है.पूरी तैयारी करने के बाद सोमवार को कुर्जी चर्च में पार्थिव शरीर के साथ मिस्सा किया गया.फादर राजीव रंजन के नेतृत्व में मिस्सा अर्पित किया गया.उनके साथ फादर सेल्विन जेवियर थे.अपने प्रवचन फादर राजीव ने कहा कि हम लोगों के बीच से किसी परिजन की मृत्यु हो जाती है तो दुख लगता ही है.यह सांसारिक मौत है.आज हम लोगों के बीच से समीर केरकेट्टा चले गये.उसके बाद मिस्सा के बीच में परम प्रसाद वितरण किया गया. मिस्सा समाप्त होने के बाद पार्थिव शरीर को कुर्जी कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया. इस दारुण समय में समीर के परिवार के लोगों के साथ शुभचिंतक उपस्थित थे.राजेश केरकेट्टा, वासिल केरकेट्टा,सरोज केरकेट्टा, फिलिप जैकब आदि थे. और दोस्तों से कहते रहे कि दिल्ली से पटना आते ही रहेंगे अंततः पटना जेफरी आ ही गये जेफरी केरकेट्टा का नाम समीर केरकेट्टा भी है. कुर्जी क्रिश्चियन कॉलोनी में रहने वाले आर केरकेट्टा के पुत्र हैं. स्व.आर केरकेट्टा नोट्रे-डेम एकेडमी में अकाउंटेड थे.उनके चार पुत्री और चार पुत्र हैं.पुत्रियों में सरोज बड़ी थीं.पुत्र में जेफरी केरकेट्टा बड़े थे.पटना में कालाजार विभाग में कार्यरत थे. इसके बाद दिल्ली में स्थानांतरित हुआ था.वहां पर बेहतर ढंग से कार्य करते थे.इस बीच बीमार पड़े. किडनी में कैंसर हो गया था. इसका इलाज चल रहा था. इस बीच दिल्ली से पटना आते और जाते थे.पटना के दोस्तों से कहते थे कि अब पटना आते रहेंगे.यह देखें पटना आ ही गये.यह विधि के विधान के तहत हो गया. उनसे मिलने वाले रिश्तेदार और दोस्त आ गये.पर वह बाॅक्स में पड़े रहे.आने वाले लोग जेफरी के बारे कहते रहे जिंदा दिल इंसान थे. चेहरे पर मुस्कान बिखड़ते रहते थे.किसी से दुश्मनी नहीं सभी दोस्त ही थे. जेफरी के दोस्तों में सुशील लकड़ा, जोन बेनेदिक्त,इक्लारेंस हेनरी,सुशील लोबो,जेवियर लुइस आदि आये थे.वहीं जेफरी की धर्मपत्नी गोडेंसिया केरकेट्टा के साथ नर्सिंग करने वाली एडलीन माइकल की पुत्री भी आयी थीं. कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में गोडेंसिया और एडलीन साथ-साथ नर्सिंग की थीं.साथ-साथ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा में काम करती थीं. इसके बाद उक्त संस्थान से गोडेंसिया दिल्ली चली गई. इस बीच एडलीन माइकल की अकाल मौत हो गयी.इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,शेखपुरा की दोस्त लुसी बेनेदिक्त,कुमारी,फिलोमिना डिक्रूज आदि भी कुर्जी चर्च में मिस्सा सुने और कुर्जी कब्रिस्तान में मिट्टी दिये. फादर सेल्विन जेवियर को भी कहते सुना गया कि जब ब्रदर थे तब से केरकेट्टा परिवार को जानते हैं.

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