आलेख : विशेष : दूर्वाक्षत के आँगन में उतरा था चाँद -सितारा ! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 23 अप्रैल 2022

आलेख : विशेष : दूर्वाक्षत के आँगन में उतरा था चाँद -सितारा !

  • जैसे किसी पारम्परिक उत्सव का मंडप सजा हो प्यारा !!

mihila-durwaksha
दूर्वाक्षत मिथिलाक्षर अभियान लगातार अपनी लक्ष्य की तरफ बढ रहा है ! इस संस्था की शुरुआत इस ध्येय से हुई थी कि ये अपनी विलुप्त होती संस्कृती को सहेजने के लिए काम करेगी और उस ध्येय की पूर्ति में  दूर्वाक्षत जी जान से लगा हुआ है ।इसके संस्थापक अध्यक्ष पंडित श्री कौशल झा  हैं, जिनके मार्गदर्शन में यह संस्था सुचारू रूप से चल रही है । श्री शैलेंद्र झा  एवं श्रीमती सविता झा सोनी  इस संस्था के वो मजबूत कड़ी हैं , जिनके साथ मिलकर यहाँ के कार्यकर्ता अपनी रणनीति बनाते हैं और एक दूसरे के साथ  कदम से कदम मिलाकर चलते हैं।


दूर्वाक्षत मिथिलाक्षर अभियान 

एक के बाद एक , हफ्ते भर के अंदर इतना सुंदर आयोजन कर डाला  जो अपने आप में एक बहुत  बड़ी उपलब्धी साबित होती है ।  10/4/2022 को "मैथिलेत्तर सम्वाद" के नाम से एक आयोजन हुआ जिसको  ज्ञान-यज्ञ का नाम देना अनुचित नहीं होगा । इस आयोजन की शुरुआत गोसाओन की अराधना करते हुए श्रीमती मधुलता मिश्रा ने किया ।  अपने-अपने क्षेत्र में महारत हासिल किये हुए विद्वान  एवं विदुशी इस ज्ञान-यज्ञ के वक्ता बन के पधारे थे जिनकी मातृभाषा ,  मैथिली नही थी लेकिन दूर्वाक्षत से जुड़ने के बाद उनमें मैथिली के प्रति अगाढ प्रेम देखा गया और उसको उन्होंने सबके  ज़ाहिर भी किया । 


सभी आगन्तुक महानुभाव  दूर्वाक्षत के कार्यशैली से प्रभावित होकर  उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशिर्वचनों का पावन तोहफा देकर गये। मिथिलाँचल से लेकर पूरे देश एवं विदेश से लोग इसमें जुड़े रहे और इस आयोजन का आनंद लिये । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अशोक अविचल , विशिष्ट अतिथि डाक्टर कैलाश कुमार मिश्र , अध्यक्ष डाक्टर राजीव रंजन दास एवं संचालक श्री अंजनी कुमार चौधरी थे। कई नामी-गिरामी व्यक्तित्व वाले अतिथियों ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत कर इसको भव्य और सफल बनाये।  16/4/2022 को दूर्वाक्षत परिवार के  छोटे-छोटे सितारों ने ऐसा शमाँ बाँधा की वहाँ उपस्थित आदरणीय अतिथि जन एवं उसे देख रहे दर्शक जन के लिए ये मानना मुश्किल हो गया कि ये आयोजन डिजिटल माध्यम से हो रहा है या हमलोग इसे प्रत्यक्ष में देख रहे हैं ।  आज कल के बच्चे जहाँ  पाश्चात्य सभ्यता की तरफ धडल्ले से आकर्षित हो रहे हैं  वहीं दूर्वाक्षत के इन सितारों ने अपनी संस्कृती को पूरे कार्यक्रम के दौरान पकड़े रखा। उन सितारों के  मन में अपने संस्कृति एवं परम्परा के लिए इतना आदर होने का का पूरा श्रेय उनके माता -पिता को जाता है जो ये दर्शाता है कि इनकी परवरिश किस विचारधारा से हो रही है । मैथिली भाषा जो मिथिलाँचल की अपनी भाषा है उसको ही  पूरे कार्यक्रम में बोला गया। सभी सितारों ने इसी भाषा को माध्यम बना के अपने-अपनें  भावों को प्रस्तुत किया । "उभरती प्रतिभा" की शुरुआत अभिनव अंजनी चौधरी के द्वारा प्रस्तुत की गई भगवती वंदना से हुई ।  शिवानी झा ने जहाँ पितृ-प्रेम  में डूबकर होकर अपने पापा के प्रति स्नेह ज़ाहिर  किया तो वहीं आस्था झा , अनक झा, अनिकेत मिश्रा और साक्षी झा दिल्ली से  माँ भगवती को अपने भावों से मनाकर भावपूर्ण प्रस्तुती दिये । विदुशी झा युनाइटेड किंगडम  और अविष्का झा नोयडा से अपने-अपने नृत्य से सबका दिल जीता । 


नैना झा ने जहाँ अपने गीत के माध्यम से जनकपुर धाम ले के चली  तो वहीं प्रेरणा मिश्रा सिंगापुर से शिव पार्वती विवाह गीत  गाकर सबको अचंभित किया । अभिनव अंजनी  चौधरी सिंगापुर से मीरा भजन  को गाने के साथ साथ हार्मोनियम बजा कर सबको मंत्र _मुग्ध किया तो वहीं स्नेहा झा ने विद्यापति गीत से अपना भाव प्रकट किया ।  ये सब किसी पारम्परिक उत्सव से कम नहीं लग रहा था । मानों कोई पारिवारिक आयोजन  हो रहा हो जिसमें  हम सभी लोग  शामिल हुए हैं ।  डाक्टर गुंजन झा संगीत में स्वर्ण पदक जीतने वाले इस कार्यक्रम के अध्यक्ष बन कर आये थे। संगीत के रग रग से वाकिफ गुंजन जी  भी इस उभरती प्रतिभा को खूब सराहा । इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डाक्टर कैलाश कुमार मिश्र की बात बहुत अच्छी लगी उन्होनें कही की , आज कल के पिता में मातृत्व का अंश देखने को मिल रहा है जिसके फलस्वरूप पिता भी माँ की भाँति अपनें  बच्चों के मनोभाव समझते हुए उनकी पसंद , ना-पसंद को महत्व देकर उनका साथ देने लगे हैं । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाक्टर राजीव रंजन दास  बच्चों  की प्रस्तुती देख भाव_विभोर हो गये । उनको इन सितारों में अपनी संस्कृती और सभ्यता की चमकती छवि नजर आई । दास जी ने आगे बोला कि जब अभी से इनमें अपनी मिट्टी की खुशबू इतनी  भरी है तो आगे ये अपनें संस्कार से सारे मिथिलाँचल को जरूर महकाऐंगे।   इस दोनों आयोजन को इतनी सुगमता से समायोजन कर सबके सामने प्रस्तुत करने का  श्रेय , श्री पंडित कौशल झा , श्री अंजनी कुमार चौधरी ,  श्रीमती अर्चना झा अन्नू ,श्री वीरेश्वर झा एवं दूर्वाक्षत परिवार को जाता है ।  दूर्वाक्षत परिवार सच्च मायने में  बहुत भाग्यशाली है जिसके  पास खुद के अपनें चमकते सितारे और इतने समर्पित कार्यकर्ता हैं  जो कि दिल से दूर्वाक्षत से जुड़े हुए हैं । 



अर्चना झा अन्नू 

निदेशक 

(दूर्वाक्षत मिथिलाक्षर अभियान)

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