बिहार : मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी 318 रुपये देने की मांग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 13 अप्रैल 2022

बिहार : मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी 318 रुपये देने की मांग

  •  खेग्रामस राज्य परिषद की बैठक से दलित-गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ जन प्रतिरोध खड़ा करने का आह्वान
  •  20 लाख दलित-गरीबों और ग्रामीण मजदूरों को खेग्रामस का सदस्य बनाने का लक्ष्य संगठन ने बनाया
  • दलित, गरीबों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले के प्रति सरकारी उदासीनता चिंताजनक - धीरेन्द्र झा

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पटना,13 अप्रैल, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और मनरेगा मजदूर सभा की राज्य परिषद की संयुक्त बैठक आज दारोगा राय पथ के 11 नंबर विधायक निवास में शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता विधायक गोपाल रविदास, शत्रुघ्न सहनी, उपेंद्र पासवान, पंकज सिंह, नीलम कुंवर, जीबछ पासवान, कामता सिंह आदि नेताओं ने किया। बैठक में खेग्रामस के सम्मानित राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, भाकपा माले के वरिष्ठ नेता सह खेग्रामस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वदेश भट्टाचार्य और खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा, राज्य सम्मानित अध्यक्ष सत्यदेव राम आदि नेताओं की भागीदारी रही। बैठक को सम्बोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि देश में लूट का अम्बानी-अडाणी राज स्थापित किया जा रहा है। दलितों, आदिवासियों और मजदूरों के रोजी-रोटी, वास-आवास, मजदूरी और शिक्षा-स्वास्थ्य पर हमले किये जा रहे हैं। बढ़ती मंहगाई ने गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में खेग्रामस का सदस्यता अभियान शुरू है, बिहार में संगठन की इतनी मजबूती है कि हम 20 लाख सदस्य बना सकते हैं। पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि बढ़ती मंहगाई और बेकारी के मद्देनजर सरकार को गरीबों को विशेष पैकेज देना चाहिए। भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता स्वदेश भट्टाचार्य ने कहा कि देश का संविधान, लोकतंत्र और जनाधिकार खतरे में है। देश के ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों की गोलबंदी समय की मांग है। खेग्रामस के राज्य सचिव विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्री ने संगठन के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के भूमिहीनों को नही उजाड़ा जाएगा। खेग्रामस के राज्य सम्मानित अध्यक्ष सह विधायक सत्यदेव राम ने कहा कि गरीबों के सवालों पर सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन चल रहे हैं। मनरेगा मजदूरी बढ़ाने और नया वास-आवास कानून बनाने के सवाल पर धारावाहिक आंदोलन चलाने की जरूरत है।

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