श्रीलंका में विपक्ष के एक नेता का दावा, अगले सप्ताह संसद में करेंगे बहुमत साबित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 30 अप्रैल 2022

श्रीलंका में विपक्ष के एक नेता का दावा, अगले सप्ताह संसद में करेंगे बहुमत साबित

opposition-ensure-to-form-government-in-sri-lanka
कोलंबो, 30 अप्रैल, श्रीलंका के विपक्षी दल समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के एक वरिष्ठ नेता ने शनिवार को दावा किया उनकी पार्टी राजपक्षे परिवार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अगले सप्ताह संसद में बहुमत साबित कर देगी। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अंतरिम सरकार बनाने के लिए 225 सदस्यीय संसद में 113 सांसदों का समर्थन हासिल कर विपक्ष से बहुमत दिखाने को कहा है। 'डेली मिरर’ अखबार ने एसजेबी सांसद और मुख्य विपक्षी सचेतक लक्ष्मण किरीला के हवाले से कहा, 'हर कोई देखेगा कि अगले सप्ताह हमारे पास बहुमत होगा और फिलहाल मैं यह नहीं बताऊंगा कि हम इसे कैसे करने जा रहे हैं।' उन्होंने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, 'राष्ट्रपति को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और उसके बाद संवैधानिक सुधार होना चाहिए, ताकि सरकार के स्तंभों के बीच नियंत्रण और संतुलन सुनिश्चित हो सके।' संवाददता सम्मेलन के दौरान मौजूद एक अन्य एसजेबी सांसद मुजीबुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग पर भी जोर देगी। उन्होंने कहा, 'हमने अब तक इसे नहीं छोड़ा है।' राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को द्वीप राष्ट्र में आर्थिक संकट को दूर करने के लिए संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक दलों को शामिल करते हुए एक सर्वदलीय सरकार बनाने का निमंत्रण दिया। राष्ट्रपति कार्यालय के मीडिया विभाग ने एक बयान में कहा कि 'उन्होंने पार्टी नेताओं और संसद में अब स्वतंत्र रूप से काम कर रहे प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के दौरान यह पेशकश की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि मौजूदा प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे (राष्ट्रपति के सबसे बड़े भाई) सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए इस्तीफा देंगे या नहीं।' वर्ष 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद, इस समय श्रीलंका सबसे बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। गौरतलब है कि इस बीच राजपक्षे परिवार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है और हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति सचिवालय के बाहर बीते 22 दिनों से स्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं।

कोई टिप्पणी नहीं: