श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय के पास मनाया नये साल का जश्न - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय के पास मनाया नये साल का जश्न

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कोलंबो, 14 अप्रैल, श्रीलंका के निवासियों ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर अपने पारंपरिक नववर्ष का जश्न मनाते हुए एक दूसरे के साथ दूध-चावल और केक साझा किए। प्रदर्शनकारी देश में अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट को लेकर राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग करते हुए छठे दिन भी यहां डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान, गृहयुद्ध के समय विकलांग हुए सैनिकों ने चूल्हा जलाया, बौद्ध भिक्षुओं ने धार्मिक मंत्रोच्चार किया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने "लोगों के संघर्ष की जीत हो' के नारे लगाते हुए पटाखे फोड़े। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के कार्यालय के प्रवेश द्वार पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग उन्हें देश की आर्थिक स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। साथ ही भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाते हुए उनके शक्तिशाली परिवार से सत्ता छोड़ने का भी आह्वान कर रहे हैं। अपने पति तथा 10 और आठ साल के दो बच्चों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई प्रदर्शनकारी दिलानी निरंजला ने कहा कि आम दिनों में हमारे बच्चे नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने दादा-दादी के पास जाते हैं, लेकिन आज हम उन्हें देश की वास्तविक स्थिति दिखाने के लिए यहां लाए हैं। उन्होंने कहा, “हम उनसे झूठ नहीं बोलना चाहते कि देश में क्या हो रहा है। हम उन्हें गुमराह रख कर नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने गांव नहीं जाना चाहते हैं। बचपन से ही उन्हें सच्चाई देखनी चाहिए और सच्चाई के साथ जीना चाहिए।" निरंजला के पति, उसिथा गामागे टैक्सी चालक हैं। उन्होंने कहा,‘‘ वह हर सुबह आसमान छूती कीमतों की खबरें देख कर बहुत निराश हो गए थे। उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि यह संघर्ष हो रहा है और यह मुझे नई आशा की किरण और ऊर्जा देता है।' गौरतलब है कि हाल के महीनों में श्रीलंकाई लोगों ने ईंधन और भोजन की कमी और दैनिक बिजली कटौती का सामना किया है। साथ ही, श्रीलंका दिवालिया होने के कगार पर है। राष्ट्रपति गोटाबाया और उनके बड़े भाई प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे सत्ता पर काबिज हैं जबकि उनका राजनीतिक रूप से शक्तिशाली परिवार जनाक्रोश के केंद्र में है। लेकिन राजपक्षे बंधुओं ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है लेकिन संकट और विरोध ने कई कैबिनेट सदस्यों को इस्तीफा देने के लिए प्रेरित किया है। चार मंत्रियों ने कार्यवाहक के रूप में शपथ ली, लेकिन कई प्रमुख मंत्री पद अब भी खाली हैं।

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