काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद: सर्वे काम रुका, टीम को जाने से रोका - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 7 मई 2022

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद: सर्वे काम रुका, टीम को जाने से रोका

  • हिंदू पक्ष के वकील का आरोप: मामले को लेकर कोर्ट में करेंगे अपील, क्योंकि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है 
  • सर्वे कमिश्नर बदलने की याचिका पर अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला, अब 9 मई को सुनवाई 

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वाराणसी (सुरेश गांधी) काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सर्वे के दूसरे दिन भी मस्जिद परिसर में पुलिस को धता बताकर घुस गए कुछ मुस्लिमों ने सर्वे का जमकर विरोध किया, जिससे काम नहीं हो पाया। सर्वे टीम के अगुवा का कहना है कि हरिशंकर जैन और विष्णु जैन को मस्जिद परिसर में नहीं जाने दिया गया। हिंदू पक्ष का कहना है कि मस्जिद के अंदर कई लोग मौजूद थे, जिन्होंने बैरिकेडिंग कर सर्वे टीम को रोक दिया। उधर, मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट कमिश्नर के खिलाफ याचिका दायर की़। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए सर्वे जारी रखने का आदेश दिया। जबकि मामले की अगली सुनवाई तिथि नौ मई मुकर्रर की है। जबकि सर्वे की इस कार्रवाई को एएमआईए प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानून का उल्लंघन करने वाला बताया है। 


हिंदू पक्ष ने लगाए आरोप

हिंदू पक्ष के वकील का आरोप है कि, हम इस मामले को लेकर कोर्ट में अपील करेंगे. क्योंकि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है. जबकि कोर्ट का ऑर्डर साफ था. उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई शुरू होने के बाद बैरेकेडिंग के अंदर से कई मुस्लिम आ गए और प्रशासन ने सहयोग नहीं दिया. इसीलिए सर्वे का काम दूसरे दिन भी रोकना पड़ा. अब इस मामले को एक बार फिर कोर्ट के सामने रखा जा सकता है. अदालत में मुकदमा दाखिल करने वाली महिलाओं सीता साहू, मंजू व्यास, राखी सिंह के अनुसार वर्ष 1992 तक मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति थी। महिलाओं ने पुलिस के अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। 


कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

इससे पहले मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. दरअसल मुस्लिम पक्ष की तरफ से कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि, निष्पक्ष जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर को बदला जाना चाहिए. उन्होंने कोर्ट में कहा कि अजय मिश्रा को हटाकर कोर्ट खुद उनकी जगह किसी दूसरे सीनियर वकील को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करे. मामले पर कोर्ट ने सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया. अब 9 मई को अगली सुनवाई होगी. हालांकि कोर्ट ने सर्वे को रोकने का आदेश नहीं दिया. सर्वे जारी रहेगा और अजय मिश्रा ही इस सर्वे की देखरेख करेंगे. इस सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की तरफ से एक दूसरे पर जमकर आरोप भी लगाए गए. हिंदू पक्ष ने कोर्ट में कहा कि सर्वे टीम को अपना काम नहीं करने दिया जा रहा है, वहीं दूसरे पक्ष ने कहा कि मस्जिद की दीवारों को खरोचने की कोशिश की जा रही है. 


कोर्ट ने दिया था आदेश

बता दें कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह और अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर श्रंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गत 26 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे करके 10 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. मिश्रा ने वीडियोग्राफी और सर्वे के लिये 6 मई का दिन तय किया था. 


सर्वे को रोकना कोर्ट की अवहेलना : केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर 

केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर शनिवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे थे। पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में भी सर्वे होना चाहिए. किसी को उस पर शक नहीं करना चाहिए. जब सर्वे किया जा रहा है, तो परिसर में सर्वे क्यों नहीं होगा. वैसे भी ज्ञानवापी शब्द कोई उर्दू का शब्द नहीं है. यह मंदिर है या मस्जिद के फैसला अदालत करेगी.


पुराना नहीं 21 अगस्त 2021 का है मामला

काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का केस भले ही वर्ष 1991 से वाराणसी के स्थानीय अदालत में चल रहा हो और फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही हो, लेकिन मां श्रृंगार गौरी का केस महज साढ़े 7 महीने ही पुराना है. गौरतलब है कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने 18 अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर श्रंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गत 26 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफीकृसर्वे करके 10 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. मिश्रा ने वीडियोग्राफी और सर्वे के लिये छह मई का दिन तय किया था. 


नारेबाजी करता युवक धराया 

ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर शनिवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब एक युवक ने नारेबाजी की जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. युवक का नाम अब्दुल कलाम है. दरअसल मस्जिद में शाम पांच बजे की नमाज़ पढ़ने के लिए लोगों के ज़्यादा संख्या में आने पर पुलिस ने कुछ आपत्ति जताई, जिस पर एक व्यक्ति उत्तेजित हो गया और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगा. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और युवक को थाने लेकर चली गई. 


अफवाहों का बाजार गरम

सर्वे को लेकर दूसरे दिन भर अफवाहों का बाजार गरम था। इंटरनेट मीडिया पर जिस तरह से खबरें परोसी जा रहीं थी, उससे लोग एक दूसरे से पूछते दिखाई पड़े कि कहीं कुछ हुआ है क्या। गलियों से एक वर्ग के लोग बराबर हालचाल ले रहे थे। मोबाइल फोन पर भी लोग गतिविधियों की जानकारी लेते रहे।


सर्वे के आदेश पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर के कुछ इलाकों के सर्वेक्षण पर अदालत का हालिया आदेश रक्तपात और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रहा है। वाराणसी की अदालत के आदेश की निंदा करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा कि काशी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वेक्षण करने का यह आदेश 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का खुला उल्लंघन है, जो धार्मिक स्थलों के रूपांतरण पर रोक लगाता है। यह सरकार का कर्तव्य है कि वो कोर्ट के बताए कि वह गलत क्यों कर रही है। एक अन्य ट्वीट में लिखा कि अयोध्या के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अधिनियम भारतीय राजनीति की धर्मनिरपेक्ष विशेषताओं की रक्षा करता है जो संविधान की बुनियादी विशेषताओं में से एक है। असदुद्दीन ओवैसी का बयान अदालत के एक आयुक्त के वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद में अदालत के आदेश के अनुसार परिसर का सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी करने के एक दिन बाद आया है।  


सर्वे से डर क्यों 

ज्ञानवापी मस्जिद से मूल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को मुक्त कराने के लिए मूल वाद दाखिल करने वाले मुख्य पक्षकार पं. हरिहर पांडेय ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से क्यों डर रहे हैं। कोर्ट ने तथ्यों की जानकारी के लिए सर्वेक्षण एवं जांच करने का आदेश दिया है। प्रतिवादी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर अकारण विवाद करना चाहते हैं जो यह किसी भी स्तर से उचित नहीं है। हरिहर पांडेय ने कहा कि न्यायालय के न्याय पर मुझे पूर्ण विश्वास है। मैं शासन से अपील करता हूं कि न्यायालय का प्रतिरोध करने वाले के ऊपर तत्काल कानूनी एवं दंडनीय कार्रवाई की जाए। हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 में ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने के लिए मैंने, सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा ने मुकदमा दायर किया था। अदालत में मुकदमा दायर होने के कुछ साल बाद पं. सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा का निधन हो गया।

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