पोषित बच्चों और स्वस्थ माँ से होगा स्वस्थ भारत का निर्माण : डॉ. अनन्या - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 15 मई 2022

पोषित बच्चों और स्वस्थ माँ से होगा स्वस्थ भारत का निर्माण : डॉ. अनन्या

  • स्वस्थ भारत (न्यास) के सातवें स्थापना दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत के निर्माण में पोषण के महत्व विषय पर हुआ परिसंवाद
  • मोटे अनाज को थाली का हिस्सा बनाने पर जोर

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नई दिल्ली, “सरकार की ओर से माँ और बच्चों के पोषण पर कई योजनाएं लायी गयी है। भारत में मिड डे मील और सखी,  आंगनवाडी सहित तमाम ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं जो गरीब और कुपोषण परिवार और बच्चों को पोषण और संतुलित अहार के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए ही हैं। अमेरिका में हुए एक रिसर्च में यह पाया गया है कि रागी, ज्वार, बाजरा आदि मोटे अनाज में गेहूं से अधिक पोषण होता है। 1980 के दशक तक यह मोटा अनाज हमारे यहां गरीबों का भोजन होता था, फिर उन्होंने भी इसे खाना छोड़ दिया। आजकल इन्हीं मोटे अनाजों को अंग्रेजी में सुपर फूड कहा जा रहा है।” उक्त बातें हावर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ी पब्लिक हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. अनन्या अवस्थी ने स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा आयोजित स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर में स्वस्थ भारत के निर्माण में पोषण का महत्व विषय पर बोलते हुए कही।


डॉ अवस्थी ने घर में काम करने वाली एक सहायिका का उदाहरण देते हुए कहा कि, वो अपने बच्चे को चिप्स के पैकेट खिलाने को तैयार है लेकिन फल और पोषण वाला अनाज उसे महंगा लगता है। यह सच भी है आंकड़ों के नजरिए से। लेकिन 5 रुपये के 4 पैक चिप्स और 20 रुपये के केले देने में क्या बेहतर है यह उन्होंने उसे समझाया। पोषण पैकेट वाले फूड में नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया की यहां मदद काफी अहम है जिससे माँ और उनके बच्चों को पोषित भोजन और संतुलित थाली के बारे में समझाया जा सकता है। भारत में निचला तबका जिसके पास भोजन के लिए पैसे कम है उनकी सोच को भी बाजार के बड़े ब्रांड का प्रचार प्रभावित करता है। जबकि उनके लिए सरकार ने सखी और आंगनवाड़ी वाटिका का भी इंतजाम किया है, जहां से फल और सब्जी इनको और बच्चों को दिया जाए जिससे उनका शरीर का पोषण हो। बस ये वर्ग इन योजनाओं से परिचित नहीं है। भोजन की जरूरत घर से पूरी होती है इसमें माँ के साथ पिता की जिम्मेदारी भी बनती है ताकि बच्चा कुपोषित न हो। उन्होंने आगे कहा कि भारत की युवा पीढ़ी अगर भोजन के कारण बीमार होगी तो स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण अधूरा रहेगा। सखी और आँगनबाड़ी केंद्रों में गरीब परिवार की माँ और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए बहुत सी योजना इंतजार कर रही। यहां बच्चों का अन्नप्रासन संस्कार भी कराया जाता है। 2 से 6 साल तक के बच्चों को उचित पोषण मिलना आवश्यक है। इसपर सरकार बहुत काम कर रही है। स्वस्थ भारत का निर्माण पोषित बच्चों और स्वस्थ माँ से ही होगा। अपने अध्यक्षीय संबोधन में मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. अल्का अग्रवाल ने डॉ. अनन्या अवस्थी के बताए सुझाओं को अमल में लाने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में हम पोषणयुक्त भोजन पर कम ध्यान दे रहे हैं यहीं कारण है कि तमाम तरह की बीमारियां बिन बुलाए मेहमान की तरह हमारे शरीर को जकड़ रही हैं। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार महिमा सिंह ने किया।

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