आलेख : चिंता करिए और सावधान हो जाइए - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 27 मई 2022

आलेख : चिंता करिए और सावधान हो जाइए

हम देशवासियों व हमारी सरकार के लिए गम्भीर चेतावनी का दृष्टांत व विषय है कि श्रीलंका की आर्थिक स्थिति को देख कर सावधान हो जाइए। श्रीलंका में वहां की सरकार फैल हो चुकी है, एमर्जेंसी लगा दी गई है। लोगों के पास पैसा नहीं है, सरकार कंगाल हो रही है। सौ रुपए की एक कप चाय, डीजल, पैट्रोल नहीं है, रसोई-गेस नहीं है, एटीएम में रुपए नहीं हैं, एक सेव 140 रुपए का, भिण्डी, टमाटर 200 रुपए किलो। आम आदमी भूखों मर रहे हैं, पैसे वालों के पास पैसा होने पर भी उन्हें सामान उपलब्ध नहीं है। बिजली 16 घण्टे नहीं है, मोबाइल चार्ज भी नहीं हो पा रहै हैं। अस्पतालों में दबाएं नहीं हैं, मरीज मर रहे हैं, डॉक्टर मेडिकल स्टाफ सड़कों पर आ गया। राष्ट्रपति के सभी मंत्रियों ने स्तीफे दे दिए हैं। श्रीलंका में जनता उग्र हो चुकी है, सरकार के खिलाफ आन्दोलन हो रहा है, जनता कह रही है कि भूंख से तड़प-तड़प कर मरने से अच्छा है कि गोली मार दो। श्रीलंका में गृहयुद्ध के आसार हैं। सोचिए, ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव जीतने के लिए सबकुछ फ्री में बांटा गया। श्रीलंका ने चीन से कर्जा लिया और देश चलाया। चीन की नीति भी ऐसी है कि जैसे आर्थिक माफिया जुआ खिलाने को पहले उधार देते हैं, फिर सब कुछ छीन लेते हैं। सरकारी खजाने खाली हो गए। श्रीलंका सरकार से व उसकी आर्थिक साख से जनता व अन्य देशों का भरोसा उठ गया। त्राहि त्राहि मची हुई है। भारत में गत तीन दशकों से मुफ्तखोरी की नीति सरकारी स्तर पर चल रही है। ध्यान करिए, तीन दशक पूर्व भारत को भी कर्जा लेने के लिए कई टन सोना गिरवी रखना पड़ा था। भारत में यह नीति हमें श्रीलंका की स्थिति की ओर ले जा रही है :- तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें :- लैपटॉप देंगे, मोबाइल देंगे, कर्जा माफ कर देंगे, दो रुपए किलो गेहूं देंगे, तीन रुपए किलो चावल देंगे, फ्री-फोकट खातों में पैसे डलेंगे, फ्री बिजली, फ्री पानी देंगे, और इसके आगे भी करोड़ों अरबों रुपए हमारे जनप्रतिनिधियों की पेंशन, उन्हें फ्री फोकट की तमाम सुविधाएं हैं, उन्हें टेक्स भी नहीं देना है, इन सबका बोझ भी हमारे सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।


जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा हम लुटते देख रहे हैं। छद्म गरीब और अति उच्च अमीर मजे कर रहे हैं। लेकिन प्रश्न तो उठेंगे, तुष्टिकरण देश में दीमक की तरह लगा है और राजनीतिक दलों में सबसे आगे कांग्रेस व 'आम-आदमी-पार्टी' है। 'आम-आदमी-पार्टी' ने दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली फ्री कर दी, पानी फ्री, राशन फ्री। इन्होंने तय कर लिया कि देश को कंगाल बना कर छोड़ देंगे, लेकिन सत्ता में बने रहैं। जी-न्यूज के सुधीर चौधरी के अनुसार श्रीलंका पर 6 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है इसी कारण श्रीलंका की यह हालत है। भारत में अकेले तमिलनाडु राज्य पर 6 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है, महाराष्ट्र पर 6 लाख 8 हजार रूपए करोड़ रुपए का कर्ज है, पश्चिम बंगाल पर 5 लाख 62 हजार रूपए का कर्ज है, राजस्थान पर 4 लाख 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसी तरह भारत के अनेकों राज्यों पर भारी कर्जा है। भारत की अनेकों राज्य सरकारों पर श्रीलंका के बराबर का कर्ज है, लेकिन उनकी स्थिति अभी तक इसलिए बची है भारत सरकार से कर्जा लेते रहते हैं। अभी पंजाब में बनी "आप" पार्टी की नई सरकार के मुख्यमंत्री ने भारत सरकार से एक लाख करोड़ रुपए की मांग की है। श्रीलंका में चुनाव जीतने की जो नीति चल रही थी, वही नीति भारत के राजनीतिक दल चला रहे हैं। इस कारण से सरकारी स्तर पर व भारत के आर्थिक विशेषज्ञ चिन्तित हैं बैठक कर रहे हैं, चिंतन कर रहे हैं। भारत सरकार के अधिकारियों ने इस पर बड़ी चिंता जाहिर की है। दिनांक 2 अप्रेल 2022 को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक ली, जिस पर अधिकांश अधिकारियों ने राज्यों की मुफ्त योजनाओं पर चिंता जताई और भारत की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए मुफ्तखोरी को जिम्मेदार बताया कहा गया कि यदि मुफ्त की स्कीमों को नहीं रोका गया तो भारत के ये राज्य भी श्रीलंका की तरह कंगाल हो जाएंगे। भारत के बैंकों की हालत यह है कि सरकारी योजनाओं के तहत लिए गए ऋण को लगभग 80 प्रतिशत कर्जदार बापिस नहीं कर रहे हैं। पी.एम. स्वनिधि योजना की तरह मध्यप्रदेश में सी.एम. स्वनिधि के तहत कर्ज बांटे गए, और अधिकांश ऋण-खाते एन.पी.ए. हो गए हैं। इसलिए चिंता करिए, चिंतन करिए, कहीं ऐसा तो नहीं कि महंगाई के विराट स्वरूप और बढ़ते कदम श्रीलंका की स्थिति बनने की ओर है ? 




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लेखक - राजेन्द्र तिवारी, दतिया (म.प्र.) 

फोन-07522-238333, 9425116738, 6267533320 

email- rajendra.rt.tiwari@gmail.com

नोट:- लेखक एक पूर्व शासकीय एवं वरिष्ठ अभिभाषक व राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक  आध्यात्मिक विषयों के चिन्तक व समालोचक हैं। तिवारी जी की दो पुस्तकें, ’’मृत्यु कैसे होते है ? फिर क्या होता है ?’’ तथा ’’आनंद की राह’’ प्रभात प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हो चुकीं हैं।

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