‘संतूर के संत’ भजन सोपोरी का निधन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा , झंडा ऊँचा रहे हमारा। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं व बधाई। 'लाइव आर्यावर्त' परिवार आज़ादी के उन तमाम वीर शहीदों और सेनानियों को कृतज्ञता पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन करता है। आइए , मिल कर एक समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। भारत माता की जय। जय हिन्द।

गुरुवार, 2 जून 2022

‘संतूर के संत’ भजन सोपोरी का निधन

bhajan-sopori-died
नयी दिल्ली, दो जून, ‘संतूर के संत’ नाम से प्रसिद्ध भजन सोपोरी का बृहस्पतिवार को कैंसर की बीमारी के कारण हरियाणा में गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 73 साल के थे। सोपोरी के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे सौरभ तथा अभय हैं। दोनों पुत्र भी संतूर वादक हैं। अभय ने  कहा, “उन्हें पिछले साल जून में बड़ी आंत का कैंसर होने का पता चला था। हमने उन्हें तीन हफ्ते पहले इम्यूनोथेरेपी उपचार के लिए गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया था। यह कारगर नहीं रहा और उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया।’ उन्होंने कहा, “ जब भी मैं प्रस्तुति देता था, पापा मेरे साथ रहते थे। मुझे नहीं पता कि उनके बिना मेरा जीवन कैसा होगा।” उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में किया जाएगा। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक बयान में कहा कि संतूर वादक की बड़ी आंत में चौथे स्टेज का कैंसर था और इस साल फरवरी से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बयान में कहा है, “ बीमारी उनके जिगर और हड्डियों तक फैल गई थी… उन्हें पिछले कुछ महीनों में कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दी गई थी। ” अस्पताल ने कहा, “ उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें 18 मई 2022 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद दो जून 2022 को उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया और उनका निधन हो गया।” सोपोरी के निधन से कुछ हफ्ते पहले 10 मई को महान संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा का निधन हो गया था। वह भी कश्मीर से ताल्लुक रखते थे और इस वाद्य यंत्र को शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। शनिवार को ही पार्श्व गायक केके का कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सोपोरी को उनके करियर में कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया। इनमें 2004 में पद्म श्री, 1992 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और जम्मू कश्मीर स्टेट लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड शामिल हैं। संगीतकार उत्तरी कश्मीर के सोपोर जिले के रहने वाले थे और 'सूफियाना घराने' से आते थे। दस साल की उम्र में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति देने वाले सोपोरी को संतूर वादन की बारीकियां शुरुआत में उनके दादा पंडित संसार चंद सोपोरी और बाद में उनके पिता पंडित शंभू नाथ सोपोरी ने सिखाई थी।


सोपोरी के पास दो मास्टर डिग्रियां थीं। एक भारतीय शास्त्रीय संगीत में जो सितार और संतूर दोनों में विशेषज्ञता है। बहुमुखी कलाकार के पास अंग्रेजी साहित्य में भी मास्टर डिग्री थी और उन्होंने वाशिंगटन विश्वविद्यालय में पश्चिमी शास्त्रीय संगीत गुर सीखे थे। सोपोरी ने हिंदी, कश्मीरी, डोगरी, सिंधी, उर्दू और भोजपुरी के साथ-साथ फारसी और अरबी सहित लगभग सभी भारतीय भाषाओं में 6,000 से अधिक गीतों के लिए संगीत तैयार किया। अपने करियर के दौरान, उन्होंने गालिब, दाग, मोमिन, बहादुर शाह ज़फर, इकबाल, फैज़ अहमद फैज़ और फिराक गोरखपुरी जैसे महान शायरों की 'गज़लों' के लिए भी संगीत तैयार किया। उन्होंने कबीर और मीरा बाई की रचनाओं को भी धुन दी। वर्ष 2011 में भारतीय डाक विभाग ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में सोपोरी के असाधारण कार्य को सम्मान देने के लिए पांच रुपये का डाक टिकट जारी किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने उन्हें "शास्त्रीय भारतीय संगीत की दुनिया का महान व्यक्ति बताया, जिन्होंने संतूर को अपना बनाया।” संगीतकार के निधन पर ट्विटर पर शोक व्यक्त करते हुए, तत्कालीन पूर्ण राज्य जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें "पद्म श्री पंडित भजन सोपोरी साहब के दुखद निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। मिट्टी के एक महान सपूत ..." जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी ट्विटर पर सोपोरी के निधन पर शोक व्यक्त किया। पार्टी ने ट्वीट किया, “डॉ फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने संतूर वादक भजन सोपोरी के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'वह एक महान इंसान थे, बहुत प्रतिभाशाली संगीतकार थे। संगीत में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी। उन्होंने दिवंगत आत्म की शांति और शोक संतप्त परिवार को शक्ति देने की प्रार्थना की।” भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा ने सोपोरी को विन्रम व्यक्ति बताया और कहा कि संगीत की दुनिया को उनकी कमी खलेगी। ‘सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ’ ने कहा कि संगीतकार ने देश के बाकी हिस्सों को सांस्कृतिक रूप से जम्मू- कश्मीर से जोड़ा।

कोई टिप्पणी नहीं: